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Atul Shrivastava

Atul Shrivastava

वरिष्ठ पत्रकार · राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़

9425240408 राजनांदगाँव
30+
वर्षों का अनुभव
1994
पत्रकारिता शुरू
11
साल न्यूज़ चैनल
मेरी पत्रकारिता यात्रा
1994 – 95 · शुरुआत

साल 1994-95 का समय। काम की तलाश में राजनांदगाँव के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने समाचार पत्र सबेरा संकेत के बल्देव बाग स्थित दफ्तर पहुँचा। ये मैं था। वैसे ये पहली बार नहीं था, जब कहीं काम करने गया। इससे पहले कालेज अधूरा छूट गया था और फिर कुछ समय एक निजी बस में राजनांदगाँव-जगदलपुर मार्ग पर कंडक्टरी कर चुका था। चूँकि लिखने पढ़ने का शौक था, इसलिए वह काम छोड़ सबेरा संकेत के दफ्तर पहुँच गया।

सबेरा संकेत · पृष्ठभूमि

वैसे ये पहला मौका नहीं था, जब सबेरा के दफ्तर पहुँचा होऊं। आज के दौर में कुछ शब्द प्रचलन में हैं — जैसे GEN Z, ZEN ULFA। हम जब किशोर उम्र के थे, युवा हो रहे थे, ऐसे कोई शब्द तब पैदा नहीं हुए थे। और न मोबाइल था। मोबाइल छोड़ो, टेलीविजन भी नहीं था। तब सबेरा जाना होता, अपने मोहल्ला समिति की कोई खबर लेकर या फिर अपनी कविताएँ या कहानी छपवाने। उस समय रामाधीन मार्ग में सबेरा संकेत का दफ्तर था और हैंड कम्पोजिंग से अखबार छपता था।

पहली नियुक्ति · सिटी रिपोर्टर

रामाधीन मार्ग के सबेरा कार्यालय में सबेरा संकेत के संस्थापक संपादक शरद कोठारी जी से कभी मुलाकात नहीं हुई पर बल्देव बाग के दफ्तर जब पहुँचा तो पहला सामना उन्हीं से हुआ। नीचे कुछ छोटी छोटी पूछताछ करने के बाद उन्होंने ऊपर भेज दिया। पहली मंजिल के दफ्तर में उनके पुत्र और अखबार के संपादक सुशील कोठारी जी मिले। उन्होंने भी कुछ पूछताछ की और प्रूफ-रीडर का काम दे दिया। हालाँकि मेरी लिखने पढ़ने की जिज्ञासा को देखते हुए उन्होंने दो-तीन महीने में ही मुझे एडिटोरियल डेस्क पर भेजकर सिटी रिपोर्टर बना दिया।

1999 · रायपुर · देशबन्धु

1999 में अपनी उम्र की जिस दहलीज पर पहुँचकर मैं राजनांदगाँव छोड़ रायपुर पहुँचा, उस दहलीज पर पहुँचने से पहले ही मेरे जन्म के 15 साल पहले हमारे चहेते राजा साहब दिवंगत हो गए थे। राजनांदगाँव से निकल मैंने रायपुर में पत्रकारिता की नर्सरी कहे जाने वाले देशबन्धु के दफ्तर में जाकर काम माँगा। पूर्व के अनुभव को देख वहाँ काम मिल गया। उसके बाद कई अखबारों और सबसे ज्यादा समय 11 साल एक न्यूज़ चैनल में देने के बाद अब एक नई शुरूआत की कोशिश कर रहा हूँ।

नई शुरुआत · digvishahar.com

अब अपनी खुद की वेबसाइट बनाया है। और यह वेबसाइट नांदगाँव रियासत के दिवंगत शासक महंत राजा दिग्विजय दास जी के नाम से बनाया है। उम्मीद है मेरे इस नए प्रयास को आप सबका आशीर्वाद मिलेगा।

अतुल श्रीवास्तव —