रूस की लैब से लीक हुआ प्लेग का बैक्टीरिया!

खुशदीप सहगल, नई दिल्ली

प्लेग का बैक्टीरिया रूस की लैब से लीक! क्या रूस इस बारे में कुछ छुपाने की कोशिश कर रहा है? वह खुल कर क्यों नहीं बोल रहा? क्या कोरोना की तरह कोई महामारी फिर सिर उठा रही है?…

दरअसल, दारिया शिपिलोवा नाम की लैब टेक्नीशियन की मौत से इस मामले ने तूल पकड़ा है. रूस के इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में 28 साल शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मौत ने वैश्विक स्तर पर प्लेग के खतरे को जन्म दिया है. उनकी मृत्यु के बाद रूस में ‘न्यूमोनिक प्लेग’ फैलने की आशंकाओं के चलते लगभग 200 लोगों को क्वारंटाइन (पृथकवास) में रखा गया है. ये सभी शिपिलोवा के संपर्क में आए थे…

हालांकि रूस की स्वास्थ्य नियामक संस्था ‘रोस्पोट्रेबनादज़ोर’ के अनुसार, शिपिलोवा की मौत “अज्ञात कारण के गंभीर निमोनिया” से हुई है. सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि लैब में एक टेस्ट ट्यूब दुर्घटना के कारण वह न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमित हो गई थीं.शुरुआत में एक वरिष्ठ रूसी अधिकारी ने भी सोशल मीडिया पर उनकी मौत का कारण प्लेग बताया था, जिसे बाद में बदलकर “संभावित” कर दिया गया…

इरकुत्स्क के गवर्नर ने क्षेत्र में सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है. रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी संस्था की प्रमुख अन्ना पोपोवा आपातकालीन रोकथाम प्रयासों का समन्वय कर रही हैं. गवर्नर ने कहा, “सभी पहचाने गए संपर्क व्यक्तियों को चिकित्सा निगरानी में रखा गया है. आज की तारीख तक, संपर्क व्यक्तियों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे हैं, और उनके प्रयोगशाला परीक्षण के परिणाम नेगेटिव हैं…”

दारिया शिपिलोवा उसी संस्थान में यर्सिनिया पेस्टिस (प्लेग फैलाने वाले बैक्टीरिया) पर शोध कर रही थीं कि ये खुद को एंटीबायोटिक दवा से कैसे बचा लेता है. उनके इस शोध से संबंधित पेपर भी इसी साल प्रकाशित हुए थे. शिपिलोवा काम के सिलसिले में हाल में मंगोलिया की सीमा के पास बुर्यातिया गई थीं…

रूसी मीडिया आउटलेट ल्युडी बैकाला के अनुसार, शिपिलोवा ने चिकित्सा कर्मचारियों को बताया था कि उनसे 25 सितंबर को गलती से प्लेग के जीवित बैक्टीरिया वाली एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी. अमेरिका और अन्य देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां भी इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे इस सिलसिले में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे…

रूस से हर साल बड़ी संख्या में लोग भारत आते हैं. अगर रूस से संक्रमण के कोई संकेत मिले तो भारत को भी निवारक कदम उठाने पड़ सकते हैं…

हालिया इतिहास में प्लेग के महामारी बनने की बड़ी घटनाएं 19 वीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के शुरू में हो चुकी है. 1855 ईस्वी में दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान के जंगलों में रहने वाले भूरे पेट वाले चूहों से इंसानों में प्लेग की शुरुआत हुई थी. जहाजों से तब भारत, हांगकांग और ताईवान समेत 60 देशों में प्लेग फैला. अकेले भारत में 1918 तक एक करोड़ लोग मारे गए. महामारी 1960 तक लगभग ख़त्म हो गई थी. हालांकि 1990 के बाद अफ्रीका से इसके कई मामले सामने आए…
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