गरबा के नाम पर हजारों की वसूली पर प्रशासन, मीडिया सब मौन

गणपति पर्व पर स्थल झांकी के लिए लिए गए दस-बीस रूपए पर सबने मचाया था हल्ला
राजनांदगाँव।
अजब शहर है अपना और गजब यहाँ के लोग हैं। सिर्फ यहाँ निवास करने वाले लोग नहीं बल्कि कुछ सालों के लिए यहाँ शासन और प्रशासन की बागडोर संभालने के लिए आने वाले अफसर और नेता भी गजब हैं। यदि गजब नहीं हैं, अजब नहीं हैं तो फिर शहर में गरबा के आयोजन के नाम पर कई जगह होने वाली वसूली पर सब खामोश क्यों हैं?

बात सही है। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि के मौके पर शहर में कई जगह गरबा का आयोजन होना है। आयोजकों ने इसकी तैयारियाँ भी लगभग पूरी कर ली हैं। साल दर साल गरबा के आयोजन भव्य होते जा रहे हैं और आयोजनों में खर्चे भी बेहिसाब हो रहे हैं। अब आयोजनों में होने वाले खर्चों को कोई एक व्यक्ति तो वहन करेगा नहीं, सो गरबा के आयोजन में आने वाले लोगों से आयोजन के नाम पर राशि ली जा रही है। इतना ही नहीं, हर आयोजनकर्ताओं ने गरबा के आयोजन के लिए प्रायोजक भी तैयार रखे हैं।

यहीं से उठती है शहर के लोगों, नेताओं और प्रशासनिक अफसरों के अजब-गजब होने की बात। क्या किसी को नजर नहीं आता कि गरबा के आयोजन के नाम पर खुलेआम वसूली हो रही है। प्रायोजक बनाकर उनसे राशि ली जा रही है और गरबा में आने वाले लोगों से भी लिए ही जा रहे हैं। क्या यह संभव है कि ये सब रकम वसूली का खेल प्रशासन की जानकारी के बिना हो रहा हो? संभव ही नहीं। सब कुछ खुलेआम हो रहा है और सब आंख मूंदकर बैठे हुए हैं।

प्रशासन की सख्ती नजर आई थी और उसका असर भी दिखा था, पर तब जब गणपति पर्व के दौरान गणेश पंडाल में शुल्क लिया जा रहा था। प्रशासन ने न सिर्फ गणपति पंडालों में स्थल झांकी के लिए हो रही वसूली को रूकवाया था, बल्कि कुछ पंडालों की झांकियों को कुछ समय के लिए बंद भी करा दिया था। अब नवरात्रि में गरबा के आयोजन के नाम पर हो रही वसूली पर प्रशासनिक हलकों में सन्नाटा है। रही बात मीडिया प्रतिष्ठानों की तो कई मीडिया प्रतिष्ठान कुछ गरबा आयोजनों में बतौर प्रायोजक जुडे़ हुए हैं, उन्हें तो इस तरह की वसूली से मजा ही आ रहा होगा। मिडिया ने तब जमकर खबर चलाई और छापी थी और विरोध किया था जब गणपति पंडालों में स्थल झांकी के नाम पर दस-बीस रूपए लिए जा रहे थे लेकिन अब गरबा में हजारों रुपए का पास बेचा जा रहा है और मीडिया के मजे हैं।

गुगल भी यह बता रहा है कि राजनांदगांव में वर्तमान नवरात्रि के दौरान कमर्शियल गरबा आयोजनों के लिए एंट्री पास या टिकट की बिक्री की जा रही है, जिसे कुछ लोग या स्थानीय संगठन व्यावसायिक “वसूली” या केवल मनोरंजन के नाम पर पैसे कमाने का जरिया मान रहे हैं। कई क्लब और संगठनों के बड़े आयोजनों में एंट्री के लिए टिकट हाउस बनाए गए हैं, जहां प्रति व्यक्ति या पूरे दिनों के पास के लिए ₹300 या इससे अधिक के शुल्क (चार्जेस) लिए जा रहे हैं।हिंदू जागरण मंच और अन्य स्थानीय संगठनों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन या कमर्शियल इवेंट नहीं है, बल्कि यह मां दुर्गा की आराधना का धार्मिक पर्व है। संगठनों ने मांग की है कि गरबा पंडालों में अश्लील गानों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर व कार्यक्रमों को सख्ती से बंद कराया जाए। पुलिस अधीक्षक (SP) को भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पंडालों के बाहर असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है।