
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
लड़कियों के कपड़े फाड़ते हो? निकल जाओ मेरे घर से..
आप सोच रहे होंगे कि ये किस फ़िल्म का डायलॉग है..? लेकिन आपकी जानकारी के लिए मैं बता देती हूँ कि ये किसी फ़िल्म का डायलॉग नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे ख़ूँख़ार और लोकप्रिय विलेन रंजीत के पिता का है, जो उन्होंने अपनी ही फिल्म का प्रीमियर देखकर लौटे रंजीत से गुस्से में कहा था।
आज रंजीत जी का जन्मदिन है। पर्दे पर 150 से ज्यादा बार खूंखार रेपिस-ट और गुंडे का रोल करने वाले वाले रंजीत असल जिंदगी में शुद्ध शाकाहारी हैं और उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया..
आज उनके जन्मदिन पर पढ़िए ये शानदार किस्सा जब उनके पिता ने उन्हें घर से निकलने को कह दिया था…
बात साल 1971 की है, जब रंजीत जी की बड़ी फिल्म शर्मीली रिलीज हुई थी, इस फ़िल्म में पहली बार रंजीत ने विलेन का किरदार निभाया था..
इस फिल्म का प्रीमियर दिल्ली के उसी सिनेमा हॉल में रखा गया, जहां रंजीत बचपन में फिल्में देखा करते थे। वे बड़े उत्साह के साथ अपने माता-पिता और पूरे परिवार को अपनी फिल्म दिखाने ले गए..
इस फ़िल्म में रंजीत के साथ खूबसूरत अभिनेत्री राखी और चार्मिंग हीरो शशि कपूर ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी…
फ़िल्म के एक सीन में रंजीत को अभिनेत्री राखी के कपड़े खींचने थे और उनके साथ जबरदस्ती करने का अभिनय करना था।
पर्दे पर रंजीत की यह गुंडागर्दी देखकर उनके रूढ़िवादी सिख परिवार के लोग इतने नाराज और शर्मिंदा हुए कि वे इंटरवल में ही थिएटर छोड़कर उठकर चले गए।
जब रंजीत घर पहुंचे, तो उनके पिता ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा
“ये क्या काम है? लड़कियों के कपड़े फाड़ता है, निकल जा घर से? अमृतसर में हमारी इतनी इज्जत है, नाक कटवा दी… जाओ, हीरोइन राखी से माफ़ी मांगो, डॉक्टर-इंजीनियर का रोल करो, वरना घर में मत आना।”
रंजीत साहब के सामने अब अजीब मुसीबत खड़ी हो गई थी।
उन्होंने राखी से मिलकर सारी बात बताई और इसके बाद खुद रंजीत ने अभिनेत्री राखी को अपने घर बुलाया और उन्होंने उनके परिवार को समझाया कि वह सिर्फ एक्टिंग कर रहे थे और असल जिंदगी में बहुत अच्छे इंसान हैं, तब जाकर उनके घरवाले शांत हुए..
रंजीत साहब का असली नाम गोपाल बेदी था, और अपना फ़िल्मी सफर शुरू करने से पहले वो एनडीए में सेलेक्ट होकर एयरफोर्स की ट्रेनिंग ले रहे थे, लेकिन वहाँ उन्हें अपने ही ट्रेनर की बेटी से प्यार हो गया, जिस कारण उन्हें वहाँ से वापस भेज दिया गया। इसके बाद किस्मत उन्हें सपनों की नगरी मुंबई ले आई..
बॉलीवुड में उनकी पहली डेब्यू फ़िल्म सावन भादों थी, इसके बाद जब सुनील दत्त ने उन्हें अपनी फ़िल्म रेशमा और शेरा में रोल दिया तो उन्होंने उनका नाम गोपाल से बदलकर फ़िल्मी अंदाज़ में रंजीत रख दिया था…
लेकिन सच तो ये है कि नाम रखने से कुछ नहीं होता। शायद उनका नाम गोपाल भी रहता तब भी उनके नाम से वैसा ही ख़ौफ़ होता, क्योंकि खौफ़ उनके नाम में नहीं बल्कि उनकी कमाल की एक्टिंग में था।
उन्होंने अपनी आँखों के क्रूर एक्सप्रेशन से रंजीत नाम को खौफ का दूसरा नाम बना दिया। अगर वे अपने असली नाम गोपाल बेदी के साथ भी पर्दे पर आते, तो अपनी लाजवाब अदाकारी के दम पर उस नाम से भी दर्शकों को उतना ही डराते।
पर्दे पर दशकों तक डराने वाले रंजीत साहब को जन्मदिन की शुभकामनाएं
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