बाल कलाकार के रूप में शुरू हुआ था आशा पारेख का करियर

आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

आज 2 अक्टूबर है। पूरा देश आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मना रहा है, लेकिन सिनेमा प्रेमियों के लिए आज का दिन एक और वजह से बेहद खास है। आज हिंदी सिनेमा की सबसे कामयाब, खूबसूरत और जिंदादिल अभिनेत्रियों में से एक आशा पारेख का जन्मदिन है।

आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था।

आशा पारेख बचपन में डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन उनकी मां ने उन्हें शास्त्रीय नृत्य सिखाया और जब वे सिर्फ 10 साल की थीं, तब एक स्टेज प्रोग्राम में महान निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें नृत्य करते देखा। वो उनके हुनर से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी फिल्म मां में उन्हें बेबी आशा पारेख के नाम से बाल कलाकार का पहला ब्रेक दिया।

इसके बाद बिमल रॉय ने उन्हें साल 1954 में अपनी अगली फिल्म बाप बेटी में भी कास्ट किया। कुछ और फिल्मों में काम करने के बाद आशा जी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अभिनय से कुछ समय का ब्रेक ले लिया।

जब आशा पारेख 16-17 वर्ष की हुईं, तो उन्होंने बतौर लीड एक्ट्रेस फिल्मों में वापसी करने की कोशिश की, और उन्हें पहली बार रिजेक्शन मिला।

बात साल 1959 की है, मशहूर डायरेक्टर विजय भट्ट अपनी नई फिल्म गूंज उठी शहनाई बना रहे थे और उन्होंने आशा पारेख को अपनी फिल्म के लिए बतौर लीड एक्ट्रेस कास्ट भी कर लिया था। दो दिन तक शूटिंग चली, लेकिन फिर अचानक डायरेक्टर ने उन्हें ये कहकर फिल्म से निकाल दिया कि वह स्टार मैटीरियल नहीं हैं और उनमें हीरोइनों जैसी बात नहीं है

इस रिजेक्शन के ठीक कुछ दिनों बाद, फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी ने डायरेक्टर नासिर हुसैन से आशा पारेख का स्क्रीन टेस्ट लेने को कहा।

नासिर हुसैन ने स्क्रीन टेस्ट के बाद तुरंत उन्हें अपनी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म दिल देके देखो के लिए शम्मी कपूर के अपोजिट साइन कर लिया

इस फिल्म की दिलचस्प बात ये थी कि ये 2 अक्टूबर 1959 को यानी आशा जी के 17वें जन्मदिन पर ही रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
इस एक फिल्म ने विजय भट्ट के रिजेक्शन का ऐसा जवाब दिया कि आशा पारेख रातोंरात स्टार बन गईं और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

इसके बाद नासिर हुसैन और आशा पारेख की जोड़ी ने बॉलीवुड को लगातार 7 सुपरहिट फिल्में दीं। इनमें दिल देके देखो, जब प्यार किसी से होता है, फिर वही दिल लाया हूं, तीसरी मंजिल, बहारों के सपने, प्यार का मौसम और कारवां जैसी शानदार फिल्में शामिल थीं।
नासिर हुसैन की रंगीन संगीतमय कहानियों और आशा जी के बेहतरीन डांस ने सिनेमा में तहलका मचा दिया था।

60 और 70 के दशक में आशा पारेख की दीवानगी इस कदर थी कि वह उस दौर की सबसे महंगी अभिनेत्री बन चुकी थीं। लेकिन इस स्टारडम के साथ कुछ डरावने किस्से भी आए।

अपनी आत्मकथा द हिट गर्ल में आशा पारेख ने बताया कि एक बार उनका एक फैन उनसे शादी करने की जिद पर अड़ गया। वो कई दिनों तक मुंबई में उनके घर के बाहर डेरा डाले रहा।
जब पड़ोसियों और घर के लोगों ने उसे वहां से हटाने की कोशिश की, तो उसने चाकू निकाल लिया और सबको डराने लगा।

इस घटना से आशा जी इतनी डर गईं कि उन्होंने कई दिनों तक खुद को घर में बंद कर लिया था। बाद में पुलिस ने आकर उस शख्स को गिरफ्तार किया, लेकिन वह जेल से भी आशा जी को लव लेटर लिखता रहता था।

सिल्वर स्क्रीन पर अपनी मुस्कान से लाखों दिलों को जीतने वाली आशा पारेख अपनी जिंदगी में अकेली ही रहीं। उन्होंने कभी शादी नहीं की।

उन्होंने अपनी आत्मकथा Asha Parekh: The Hit Girl में अपनी शादी ना करने का खुलासा किया है।

दरअसल, आशा जी अपनी जिंदगी में सिर्फ एक ही इंसान से प्यार करती थीं और वो थे नासिर हुसैन जिन्होंने आशा पारेख को उनकी पहली फिल्म दिल देके देखो में बतौर मुख्य अभिनेत्री ब्रेक दिया था।
इसके बाद दोनों ने साथ में लगातार 7 ब्लॉकबस्टर फिल्में कीं और इसी दौरान दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए।

लेकिन नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। आशा पारेख उनसे बेहद प्यार करती थीं, लेकिन वह किसी का घर तोड़ने वाली नहीं बनना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने नासिर साहब के परिवार से उन्हें अलग करने की कभी कोशिश नहीं की।
और जब वो नासिर साहब से शादी नहीं कर सकती थीं, तो उन्होंने किसी और से भी शादी न करने का फैसला किया और पूरी जिंदगी सिंगल रहने का चुनाव किया।

यही वजह है कि आज भी नासिर हुसैन का पूरा परिवार जिसमें आमिर खान और इमरान खान भी शामिल हैं, आशा जी को बहुत सम्मान देता है।

जब आशा जी ने फिल्मों में काम करना कम किया, तो उन्होंने खुद को समाज सेवा में लगा दिया। उन्होंने मुंबई में आशा पारेख हॉस्पिटल की शुरुआत की ताकि गरीबों का इलाज हो सके।

इसके अलावा, वो सेंसॉर बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष भी बनीं। काम को लेकर वह इतनी सख्त थीं कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग उन्हें पीठ पीछे हिटलर भी कहते थे। लेकिन आशा जी ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

साल 2020 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा।

उन्होंने अपने 40 वर्षों से अधिक के लंबे फिल्मी सफर में 85 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है और 1960 व 1970 के दशक में वह बॉलीवुड की सबसे सफल और सबसे महंगी अभिनेत्रियों में शुमार थीं।

जन्मदिन की शुभकामनाएं

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