आज जन्मदिन हैं इन रॉकस्टार का

आज देश के सबसे चहेते रॉकस्टार और प्लेबैक सिंगर केके का जन्मदिन है…
बिना किसी संगीत की शिक्षा लिए उन्होंने अपनी जिंदगी में जो मुकाम हासिल किया, वो वाकई काबिलेतारीफ़ है।
उनका जन्म 23 अगस्त 1968 को दिल्ली के एक मलयाली परिवार में हुआ और स्कूलिंग दिल्ली के माउंट सेंट मैरी स्कूल से हुई…

कहते हैं न कि प्रतिभा किसी ट्रेनिंग की मोहताज नहीं होती। जब उनके पिता टेप रिकॉर्डर में उनकी माँ के गाए मलयाली गाने रिकॉर्ड करते थे.. तो केके उन्हें बड़े प्यार से सुनते थे। और आख़िरकर… सुनते-सुनते ही वह गाना भी सीख गए…

जब वो दूसरी कक्षा में थे, तब उन्होंने पहली बार स्टेज पर माइक पकड़ा था, और फ़िल्म राजा रानी का गाना “ जब अंधेरा होता है…”गाया था। जिस पर उन्हें बहुत तारीफ़ मिली थी..बस यही वो मोमेंट था, जहाँ से उनकी लाइफ बदल गई…

लेकिन कॉलेज के बाद जिंदगी का एक और इम्तिहान बाकी था…

उन्हें अपनी बचपन की दोस्त ज्योति से प्यार था और लेकिन शादी करने से पहले परिवार चलाने के लिए नौकरी का होना जरूरी था।
इसीलिए संगीत का शौक होने के बावजूद उन्होंने करीब 8 महीने तक एक होटल और मार्केटिंग फर्म में सेल्समैन के तौर पर काम किया।
लेकिन मन तो हर समय संगीत की तरफ़ भागता था, आख़िरकार केके ने फ्रस्टेड होकर नौकरी छोड़ दी..
इसके बाद त्नी और परिवार ने हौसला बढ़ाया और कहा, वो करो जिसके लिए तुम बने हो..

इसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों शिबानी कश्यप और सैबल बसु के साथ मिलकर जिंगल बनानी शुरू कर दी..जिंगल से सर्वाइव करने के लिए पैसे तो मिले, लेकिन संतुष्टि नहीं…
फाइनली अपने सपने पूरे करने के लिए साल 1994 में वो सपनों की नगरी मुंबई आ गए…

मुंबई आने के बाद उनकी जेब में पैसे तो नहीं थे लेकिन हाथ में उनके गाने का डेमो टेप था..जिसे उन्होंने संगीतकार लुईस बैंक्स, रंजीत बरोट और लेजली लुईस को दे दिया…

सबसे पहले लेजली लुईस ने केके की आवाज़ को पहचाना और उन्हें UTV के सेंटोजन सूटिंग्स के विज्ञापनों में गाने का पहला ब्रेक दिया।

इसके बाद केके काम की तलाश में थे, तब उनके साथ एक मजेदार किस्सा हुआ…
दरअसल हुआ यूँ कि काम की तलाश में केके संगीतकार मशहूर संगीतकार और ड्रमर रंजित बारोट के पास पहुंचे..
रंजित बारोट ने उनकी आवाज़ सुनी और उन्हें एक जिंगल गाने का मौका दिया..

गाना रिकॉर्ड होने के बाद जब फीस की बात आई तो रंजित बारोट ने केके की तरफ देखकर अपने हाथ की पांच उंगलियां दिखा दी।
केके उस समय बिल्कुल नए थे और उन्हें मुंबई के मार्केट रेट का कोई अंदाजा नहीं था। उन्होंने सोचा कि जिंगल गाने के 500 रुपये मिलेंगे, केके 500 रुपये की बात सोचकर ही खुश थे,

लेकिन असली सरप्राइज तब मिला जब रंजित बारोट ने उन्हें चेक काटकर हाथ में थमाया।

केके ने जब चेक देखा, तो उस पर 5,000 रुपये लिखे हुए थे…1994 के दौर में एक नए लड़के के लिए सिर्फ एक जिंगल गाने के 5,000 रुपये मिलना बहुत बड़ी बात थी।

केके अपनी ईमानदारी और सादगी के लिए जाने जाते थे।
वो तुरंत रंजित बारोट के पास गए और बोले कि

“सर, शायद गलती से एक जीरो ज़्यादा लग गया है, आपने तो पांच उंगलियां दिखाई थीं।”

इस पर रंजित बारोट हंस पड़े और बोले,

“भाई, वो गलती नहीं थी। मुंबई में पांच उंगलियों का मतलब 500 नहीं, 5,000 रुपये होता है। तुम इस रकम के हकदार हो, तुम्हारी आवाज़ बेहतरीन है।”

इसके बाद केके की आवाज का जादू ऐसा चला कि उन्होंने 11 भाषाओं में 3500 से ज्यादा जिंगल्स गा डाले…पेप्सी से लेकर नेरोलैक तक, हर मशहूर विज्ञापन में उन्हीं की आवाज गूंजने लगी…
उनका पहला प्लेबैक सॉंग बना मशहूर संगीतकर एआर रहमान की तमिल फिल्म काधल देसम में “कल्लूरी साले…

इसके बाद साल 1996 में गुलज़ार साहब की फिल्म माचिस में विशाल भारद्वाज के संगीत में उन्होंने अपना पहला हिंदी गाना “छोड़ आए हम वो गलियां….गाया,
जिसमें उनके साथ हरिहरन और सुरेश वाडकर भी थे। केके ने इस गाने की सिर्फ दो लाइन ही गाई थी लेकिन बॉलीवुड में एंट्री इस गाने के साथ हो गई थी…

और साल 1999 में केके के सपनों को पंख लग गए…
फिल्म हम दिल दे चुके सनम में उनका गाया गाना “तड़प तड़प के इस दिल से…रिलीज हुआ।
इस गाने में उनके दर्द और वोकल रेंज ने पूरे देश के युवाओं के टूटे दिल को तड़पा दिया वो बतौर सोलो लीड सिंगर रातों-रात बड़े स्टार बन गए।

इसी साल उन्होंने सोनी म्यूजिक के साथ अपना पहला सोलो एल्बम पल रिलीज किया। जिसके गाने “ पल… और “ यारों… स्कूल-कॉलेज के फेयरवेल और दोस्ती के सदाबहार एंथम बन गए।

इसके बाद तो केके ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इमरान हाशमी के किरदारों को अपनी आवाज देकर उन्होंने एक अलग ही दौर शुरू किया।
“तू ही मेरी शब है….ज़रा सा….दिल इबादत…. जैसे गानों से वो हर आशिक की आवाज बन गए

ओम शांति ओम का आँखों में तेरी अजब सी…और काइट्स का ज़िन्दगी दो पल की…केके की आवाज़ में सुनना आज भी एक अलग सुकून देता है…

भले वो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी दिल टूटता है, जब भी दोस्तों की याद आती है, या जब भी पहली बार प्यार होता है… केके अपनी आवाज़ के साथ हमारे पास लौट आते हैं…और हम गुनगुनाने लगते हैं…

“हम, रहें या न रहें कल… कल याद आएंगे ये पल…” ❤️❤️❤️

वैसे तो केके के सारे ही गाने शानदार हैं लेकिन आपके दिल के करीब कौन सा है..?

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश