
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
जब हम बॉलीवुड के मशहूर भाई-बहनों की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में कपूर, खान या अख्तर खानदान के नाम सबसे पहले आते हैं। लेकिन इस चकाचौंध भरी इंडस्ट्री में एक ऐसी जोड़ी भी है, जिसका बॉलीवुड में न तो कोई गॉडफादर था और न ही कोई फिल्मी बैकग्राउंड।
मैं बात कर रही हूँ हुमा कुरैशी और उनके छोटे भाई साकिब सलीम की।
आज हुमा और साकिब दोनों ही फिल्म जगत का जाना-माना नाम हैं, लेकिन दिल्ली के एक रेस्टोरेंट बिजनेसमैन के बच्चों का मुंबई आकर स्टार बन जाना इतना आसान नहीं था।
आइए रक्षाबंधन के मौके पर जानते हैं उनके जीवन के कुछ ऐसे रियल किस्से, जो आज के भाई- बहन के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं..
इनके पिता का नाम सलीम कुरैशी है। दिल्ली में उनकी Saleem’s नाम की एक बहुत पुरानी और मशहूर कबाब रेस्टोरेंट चेन है, जिसकी शुरुआत साल 1977 में डिफेंस कॉलोनी से हुई थी।
जब हुमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और थिएटर करने लगीं, तो उन्होंने अपने घर में मुंबई जाने की इच्छा जताई।
एक रूढ़िवादी परिवार होने के कारण उनके पिता शुरुआत में इसके सख्त खिलाफ थे। उनका मानना था कि फिल्मों की दुनिया उनके जैसे साधारण परिवार के बच्चों के लिए नहीं है। लेकिन हुमा के जुनून को देखकर उनकी मां ने पिता को मनाया। पिता ने हुमा को सिर्फ एक साल का समय दिया और कहा कि अगर कुछ नहीं हुआ, तो वापस आकर पढ़ाई पूरी करनी होगी या शादी करनी होगी।
हुमा साल 2008 में दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हुईं। शुरुआती दिनों में फिल्मों के बजाय वो मोबाइल और साबुन के विज्ञापनों में काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें सैमसंग मोबाइल के एक विज्ञापन में सुपरस्टार आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला।
इस विज्ञापन को मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप डायरेक्ट कर रहे थे।
शूटिंग के दौरान एक ऐसा मजेदार वाकया हुआ जो हुमा को पहली फिल्म दिलाने की बड़ी वजह बना…
हुआ यू कि एक दिन हुमा विज्ञापन के हिसाब से काफी हैवी मेकअप करके सेट पर पहुंची थीं।
अनुराग ने उन्हें टोकते हुए पूछा, “इतना मेकअप क्यों लगाया हुआ है?”
दिल्ली की रहने वाली हुमा उस समय अपने एटीट्यूड में थीं, उन्होंने अनुराग को पलटकर जवाब दिया,
“मेरा यह दसवां विज्ञापन है, शायद आपका पहला है।
हुमा के इस बेबाक अंदाज और कैमरे के सामने उनकी स्क्रीन प्रेजेंस से अनुराग बहुत इम्प्रेस हुए। शूटिंग के दूसरे ही दिन अनुराग ने हुमा से कहा,
“मैं तुम्हें अपनी अगली फिल्म में कास्ट करूँगा।”
हुमा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह नंबर वन गधी थीं, क्योंकि उन्होंने अनुराग की बात पर भरोसा नहीं किया और हंसते हुए कहा,
“मैं तो अभी मुंबई आई हूँ, यहाँ लोग ऐसी बातें बोलते ही रहते हैं
अनुराग कश्यप अपनी बात के पक्के निकले। जब उन्होंने अपनी कल्ट फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर की कास्टिंग शुरू की, तो उन्होंने हुमा कुरैशी को बिना किसी ऑडिशन के उन्हें लीड रोल के लिए साइन कर लिया।
इसके साथ ही अनुराग की कंपनी ने हुमा के साथ 3 फिल्मों की डील भी साइन की थी।
उधर साकिब सलीम दिल्ली में अपने पिता के रेस्टोरेंट में हाथ बंटा रहे थे। उसी दौरान उनकी एक गर्लफ्रेंड बनी जो मॉडलिंग के लिए मुंबई शिफ्ट हो गई। साकिब भी सिर्फ अपनी गर्लफ्रेंड के पीछे-पीछे मुंबई आ गए और खर्च चलाने के लिए मॉडलिंग शुरू कर दी।
उन्होंने पेप्सी, लेज टाटा डोकोमो और केएफसी जैसे कई विज्ञापनों में काम किया।
एक दिन साकिब मुंबई के वरसोवा इलाके के एक मशहूर कैफे में अपने दोस्तों के साथ बैठे थे। वे हमेशा की तरह बहुत लाउड होकर बातें कर रहे थे, मजाक कर रहे थे और पूरे कैफे का ध्यान उनकी तरफ था।
उसी कैफे में यशराज फिल्म्स की मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर शानु शर्मा भी बैठी थीं।
उन्होंने साकिब की इस बेबाकी, एनर्जी और दिल्ली वाले लड़कों वाले एटीट्यूड को नोटिस किया।
शानु, साकिब के पास गईं, अपना कार्ड देकर कहा,
“तुम यशराज फिल्म्स के ऑफिस आओ, हमारे पास तुम्हारे लिए एक रोल है।”
साकिब जब YRF के ऑफिस पहुंचे, मुझसे फ्रेंडशिप करोगी के लिए 3 पन्नों की स्क्रिप्ट दी गई।
साकिब ने जिंदगी में कभी एक्टिंग नहीं की थी, इसलिए उन्होंने शानु शर्मा से कहा,
“मुझे स्क्रिप्ट समझने के लिए दो घंटे का समय चाहिए।”
साकिब ऑफिस के बाहर एक कोने में बैठ गए। उन्होंने अपने दिल्ली वाले कजिन को फोन लगाया और कहा,
“भाई, दिल्ली के लौंडे कैसे बात करते हैं, मुझे थोड़ा टोन समझा।”
उनके कजिन ने फोन पर ही उन्हें गाइड किया। साकिब वापस अंदर गए और अपना ऑडिशन शॉट दिया।
ऑडिशन इतना शानदार था कि यशराज फिल्म्स के हेड आदित्य चोपड़ा ने खुद उनका टेप देखा और तुरंत उन्हें लीड रोल के लिए फाइनल कर लिया..
जब फिल्मी बैकग्राउंड वाले सितारे बड़ी गाड़ियों और मैनेजरों के साथ घूमते हैं, तब पैसे बचाने के लिए इन दोनों भाई-बहन ने मुंबई में एक छोटा सा शेयरिंग फ्लैट किराए पर लिया था।
ऑडिशन के रिजेक्शन से लेकर शुरुआती दिनों के अकेलेपन तक, दोनों ने हर मुश्किल का सामना साथ मिलकर किया।
साकिब ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में हमारे पास कार नहीं थी। हम ऑटो या बस से ऑडिशन देने जाते थे। कई बार ऐसा होता था कि एक का ऑडिशन अच्छा जाता और दूसरे का खराब, तो घर आकर हम एक-दूसरे को संभालते थे।
दोनों ने तय किया था कि वे घर से बार-बार पैसे नहीं मांगेंगे, इसलिए वे विज्ञापनों के जरिए अपना खर्च चलाते थे।
हुमा कुरैशी ने जब इंडस्ट्री में कदम रखा, तो उन्हें उनके एक्टिंग के लिए तारीफ़ मिली, लेकिन उनके वजन और प्लस साइज को लेकर लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया। बॉलीवुड की जीरो साइज की रूढ़िवादिता के बीच हुमा का टिके रहना आसान नहीं था।
ऐसे समय में साकिब उनके सबसे बड़े सपोर्टर बनकर खड़े रहे। साकिब अक्सर कहते हैं कि हुमा ने इंडस्ट्री को यह सिखाया कि टैलेंट किसी साइज का मोहताज नहीं होता। आज हुमा भारत में बॉडी पॉजिटिविटी की एक बड़ी मिसाल हैं।
हुमा और साकिब का रिश्ता कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2017 में दोनों ने फिल्म दोबारा: सी योर इविल में असली भाई-बहन का किरदार निभाया।
यही नहीं, अब दोनों सिर्फ भाई-बहन नहीं बल्कि बिजनेस पार्टनर्स भी बन चुके हैं। उन्होंने मिलकर अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है, जिसके तहत हाल ही में उनकी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म बेबी डू डाई डू रिलीज हुई है। इस फिल्म में हुमा ने एक गूंगी लड़की का किरदार निभाया है,
दोनों भाई-बहन ने पारंपरिक हीरो-हीरोइन की लीक से हटकर अपना करियर बनाया हुमा कुरैशी ने एक थी डायन, बदलापुर और अक्षय कुमार के साथ ‘जॉली एलएलबी 2 में काम किया।
हॉलीवुड में उन्होंने ज़ैक स्नाइडर की फिल्म ‘आर्मी ऑफ द डेड से डेब्यू किया। ओटीटी पर उनकी सीरीज महारानी के तीनों सीजन सुपरहिट रहे हैं।
साकिब सलीम ने बॉम्बे टॉकीज और रेस 3, कबीर खान की फिल्म 83 में उन्होंने मोहिंदर अमरनाथ का मुख्य किरदार निभाया था। ओटीटी पर सबसे शानदार सीरीज रंगबाज में शुक्ला का किरदार निभाया..
अगर आपके पास हुनर है और आपके साथ परिवार या भाई-बहन का सपोर्ट है, तो आप दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। बिना किसी फिल्मी सरनेम के, केवल अपनी मेहनत के दम पर इस भाई-बहन की जोड़ी ने जो मुकाम हासिल किया है, वह काबिले तारीफ है।
रक्षाबंधन की आप सबको शुभकामनाएँ…
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