376 महिला चिकित्सा पेशेवरों सहित 689 छात्रों को मिली उपाधि

डिग्री हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं के साथ उपराष्ट्रपति

एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

रायपुर। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज रायपुर एम्स के तीसरे दीक्षांत समारोह में शिरकत की। उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह के दौरान मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए।

इस अवसर पर कुल 689 छात्रों को डिग्रियां दी गईं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। कुल 376 महिला चिकित्सा पेशेवरों और 313 पुरुष चिकित्सा पेशेवरों ने अपनी पढ़ाई पूरी कर उपाधि प्राप्त की। डिग्रियां प्राप्त करने वाले छात्र मुख्य रूप से एमबीबीएस (MBBS), नर्सिंग (B.Sc & M.Sc Nursing), स्नातकोत्तर (MD/MS), सुपर-स्पेशियलिटी (DM/MCh), डॉक्टरेट (Ph.D) और एलाइड हेल्थ साइंसेज पाठ्यक्रमों से संबंधित थे। मुख्य अतिथि, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन द्वारा विभिन्न शैक्षणिक विषयों में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक (Gold Medals) और मेरिट प्रमाण पत्र सौंपे गए।

इस दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर को इस बदलाव का प्रतीक बताया और एडवांस्ड हेल्थकेयर, रिसर्च और ट्रांसप्लांटेशन (अंग प्रत्यारोपण) के क्षेत्र में इसकी उपलब्धियों के बारे में बताया, जिसमें राज्य का पहला स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद, डर और अभाव के माहौल से निकलकर शांति, तरक्की और अवसरों की ओर बढ़ने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी हिंसा का बोलबाला था, वहां आज सड़कें, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी और निवेश देखने को मिल रहे हैं।

इस मौके पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल मौजूद थे।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। इसकी आधारशिला मई 2009 में रखी गई थी और यह संस्थान 2012 में कार्यशील (चालू) हुआ।