
मौलिकप्रभ जी का चातुर्मासिक प्रवचन
राजनांदगांव। “जिसका धर्म की प्रति रुझान रहता है वह कैसी भी परिस्थिति आ जाये अपना रास्ता नहीं बदलता। हमें धर्म के प्रति आस्था रखनी चाहिए। धर्म ही हमारे संस्कार का आधार है। ” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मौलिकप्रभ सागर जी ने व्यक्त किए।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने फरमाया कि हम 20 साल पुरानी बातें भी याद रखते हैं लेकिन धर्म की बातें हम भूल जाते हैं। हम धर्म की बातों को आखिर क्यों याद नहीं रखते। हम अपने जीवन में झूठ काफी बोलते हैं। कदम-कदम पर झूठ बोलते हैं। आखिर हमारा संस्कार क्या कहता है? हम सच का सामना क्यों नहीं कर पाते? हमें सच का सामना करना होगा और सत्य को ही अपनाना होगा तभी हम उज्जवल भविष्य का सपना साकार कर पाएंगे।
मुनि श्री मौलिकप्रभ जी ने कहा कि हमें झूठ बोलने से बचना चाहिए। सत्य में बड़ी ताकत होती है। सत्य से श्रद्धा,समझ और श्रेष्ठ आचरण का निर्माण होता है। यही हमारे लक्ष्य की ओर बढ़ने का रास्ता भी है। आप श्रद्धा,समझ और श्रेष्ठ आचरण के साथ क्रियाएं करो। आपके स्वभाव में समता एवं सद्भाव आये तभी आप इस जीवन में सफल होंगे।

