
जो सीखने को तैयार होता है वह काफी विनम्र होता है
जैन बगीचे में श्रेयांशप्रभ जी का चातुर्मासिक प्रवचन
राजनांदगांव। “छोटी छोटी घटनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। भले ही खुद को बहुत कुछ आता हो किंतु अनुभवी कुछ कहते हैं तो उनकी भी बात को मानना चाहिए।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर ग्रहण करने का उत्साह होना चाहिए।
मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि जो सीखने को तैयार होता है वह काफी विनम्र होता है। आप कितने भी बड़े हो जाएं किंतु हमेशा सीखने के लिए तैयार रहें,तभी आप जीवन में सफलता को प्राप्त कर सकेंगे। आप दूसरे की कभी अवमानना ना करें, सबका सम्मान करें और उनसे कुछ सीखने की कोशिश करें।
मुनि श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि माता-पिता को प्रणाम करना अच्छी बात है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी अन्य की अवमानना करें। आप सबका बहुमान करें और उनसे कुछ सीखने का प्रयास करें। हमारे भीतर सभी गुण भरे पड़े हैं, प्रयास करें कि इन गुणों में निखार आये। इसके लिए हमारे भीतर उत्साह होना चाहिए और हर घटना से सीख लेने की ललक होनी चाहिए,तभी हम जीवन में सफल हो पाएंगे। हमने किसी के बोलने को गलत ले लिया और उनसे कुछ सीख नहीं पाए तो हम अपने आपको ही धोखा देंगे। बोलने वाले के शब्दों को बुरा मत मानो और उनसे कुछ सीख लो। सीखने का गुण हमारे भीतर होना ही चाहिए।

