
राजनांदगांव पुलिस के सुरक्षा प्लान से ‘मदिरा’ का जिक्र गायब शहर पूछ रहा— क्या विसर्जन झांकी में शराबियों को मिल गई है अघोषित छूट?
जितेंद्र जैन जीतू
राजनांदगांव। गणेश विसर्जन और 25 सितंबर की रात निकलने वाली ऐतिहासिक झांकियों को लेकर राजनांदगांव पुलिस ने अपना ‘अभेद्य’ सुरक्षा खाका खींच दिया है। 800 जवानों की भारी-भरकम फौज, आसमान में मंडराते 4 ड्रोन, 10 निगरानी मचान, “One Cop–One Pandal” का फॉर्मूला और जेल से छूटे बदमाशों की कुंडली—प्रेस नोट में पुलिसिया चाक-चौबंद व्यवस्था की चमक ऐसी है कि परिंदा भी पर न मार सके।
लेकिन, इस लंबे-चौड़े फरमान को पढ़कर शहर का आम नागरिक माथा पकड़ रहा है और ‘मदिरा प्रेमी’ मन ही मन गदगद हैं। कारण? पुलिस की पूरी विज्ञप्ति से उस सबसे बड़े ‘खलनायक’ का नाम ही नदारद है, जो हर साल झांकियों की रात फिजा में जहर घोलता है—यानी ‘शराब’।
अपराध रोकना है, पर अपराध की ‘जड़’ पर खामोशी क्यों?
पुलिस ने अपनी विज्ञप्ति में चाकूबाजी, आपसी रंजिश, विवाद और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका तो बड़े गाढ़े अक्षरों में जताई है। मगर खाकी यह भूल गई (या शायद नजरअंदाज कर गई) कि झांकियों की रात चलने वाले चाकू और टूटने वाले सिर किसी वैचारिक मतभेद का नतीजा नहीं होते, बल्कि शराब के नशे में डीजे के बेस पर थिरकते सिरफिरों की ‘शराबी बकझक’ से शुरू होते हैं।
जब तक बोतल अंदर नहीं जाती, तब तक किसी में इतनी ‘हिम्मत’ नहीं आती कि वह सरेराह हथियार लहरा दे। सवाल यह उठता है कि जब पुलिस को विवाद और चाकूबाजी की इतनी फिक्र है, तो शराबियों पर नकेल कसने के लिए एक शब्द तक क्यों नहीं फूटा? क्या पुलिस मान चुकी है कि नशे में धुत हुड़दंगी अब शांति दूत बन चुके हैं?
प्रेस नोट जारी होने के बाद शहर के गलियारों में जबरदस्त चर्चा है। डीजे की धुन पर जाम छलकाकर हुड़दंग मचाने वालों के बीच यह संदेश तैर रहा है कि जब पुलिस ने शराब को लेकर कोई चेतावनी ही नहीं दी, तो इसका मतलब रास्ता साफ है!
शहर का जागरूक वर्ग अब व्यंग्य कसते हुए पूछ रहा है— क्या इस बार पुलिस ने शराबियों को ‘विशेष पास’ जारी कर दिया है?
क्या विसर्जन झांकी के दौरान ‘ब्रीथ एनालाइज़र’ थानों की अलमारियों में ही धूल फांकेंगे?
क्या अवैध शराब बेचने वाले कोचियों और नशेड़ियों को यह मान लेना चाहिए कि फ्राई डे यानी 25 की रात उनके लिए ‘ड्राई डे’ नहीं बल्कि ‘फ्री डे’ है?
पुलिस ने डीजे संचालकों को सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि मानकों और कोलाहल अधिनियम का पाठ पूरी मुस्तैदी से पढ़ाया है। लाउडस्पीकर की आवाज कितनी डेसिबल होगी, इसकी पूरी गणित बिठा ली गई, लेकिन झांकी मार्ग पर शराबियों का जो ‘शोर’ और ‘उत्पात’ बरपेगा, उस पर कोई पैमाना तय नहीं हुआ।
हर साल का अनुभव गवाह है कि रात गहराते ही विसर्जन मार्ग पर शराब की खाली बोतलें, लड़खड़ाते कदम और अश्लील फब्तियां आम हो जाती हैं। महिलाएं और परिवार जो बप्पा के दर्शन करने निकलते हैं, वे इसी शराबी हुड़दंग के डर से आधी रात से पहले ही घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
आसमान में ड्रोन उड़ाना और मचान पर चढ़कर दूरबीन लगाना आधुनिक पुलिसिंग का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जमीन पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए उस शराब पर प्रहार करना होगा जो कानून के चिथड़े उड़ाने का काम करती है।
राजनांदगांव की जनता अब पुलिस कप्तान सुश्री अंकिता शर्मा से यह स्पष्टीकरण चाहती है, क्या झांकी मार्ग पर शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्ती होगी, या फिर यह मान लिया जाए कि पुलिस का सुरक्षा घेरा शराब की बोतल के आगे नतमस्तक हो गया है? पुलिस को चाहिए कि वह तत्काल संशोधित दिशा-निर्देश जारी कर शराबियों, कोचियों और झांकी में मदिरा सेवन कर शामिल होने वालों पर सीधी कानूनी कार्रवाई का चाबुक चलाए, ताकि बप्पा की विदाई वाकई मंगलमय और सुरक्षित रह सके।


