नंदू और क्राइम मास्टर गोगो के किरदार ने अमर कर दिया इन्हें

आज जन्मदिन मना रहे हैं शक्ति कपूर

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

फिल्मी दुनिया में कुछ ऐसे एक्टर भी हैं जिनका बॉलीवुड डेब्यू विलेन के तौर पर हुआ लेकिन बाद में वो हीरो बनके चमके और सुपरस्टार बन गए जैसे विनोद खन्ना या शत्रुघ्न सिन्हा।
शक्ति कपूर भी बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर विलेन में से एक रहे हैं. उन्होंने विलेन के रूप में अपनी ऐसी पहचान बना ली थी कि लोग उनसे डरते थे…

लेकिन फिर इस टाइपकास्ट से बाहर निकलने के लिए उन्होंने भी विनोद खन्ना से इंस्पायर होकर हीरो बनने की ठानी थी लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ऐसा झटका लगा कि फिल्म थियेटर से सिर्फ कुछ ही मिनटों में उतर गई?

आज बॉलीवुड के क्राइम मास्टर गोगो यानी शक्ति कपूर का जन्मदिन है…
उनके जन्मदिन के खास मौके पर आइए जानते हैं उनके विलेन बनने से लेकर, बतौर हीरो फ्लॉप होने का वो दिलचस्प किस्सा, जो उन्होंने खुद अपने एक इंटरव्यूज में शेयर किया था।

शक्ति कपूर का असली नाम सुनील सिकंदरलाल कपूर था.. इन्होंने पुणे के FTII से एक्टिंग सीखी थी। शुरुआत में छोटे-मोटे रोल्स करने के बाद उन्हें असली पहचान 80 के दशक की शुरुआत में मिली।

सुनील दत्त अपनी फिल्म रॉकी से अपने बेटे संजय दत्त को लॉन्च कर रहे थे। उन्हें एक ऐसे विलेन की तलाश थी जो डैशिंग भी हो और लोग उसे देखकर डर भी जाएं।
तब उन्होंने सुनील कपूर को विलेन के रूप में कास्ट किया।
हालांकि, सुनील दत्त को लगा कि एक खूंखार विलेन के लिए सुनील नाम बहुत सीधा-साधा है। इसलिए उन्होंने उनका नाम बदलकर शक्ति कपूर रख दिया, जो आगे चलकर उनका स्क्रीन नेम बन गया
इसके बाद फिरोज खान की कुरबानी और हिम्मतवाला जैसी कई फिल्मों ने शक्ति कपूर को बॉलीवुड का सबसे डिमांडिंग विलेन बना दिया।

जब शक्ति कपूर विलेन के तौर पर नए-नए स्थापित हो रहे थे, तब का एक बेहद मजेदार किस्सा उन्होंने अपने इंटरव्यू में शेयर किया था।

साल 1987 में उनकी एक फिल्म आई थी इंसानियत के दुश्मन…इस फिल्म में उन्होंने बेहद क्रूर विलेन का रोल निभाया था। शक्ति कपूर ने बड़े चाव से अपने माता-पिता को दिल्ली के एक थिएटर में यह फिल्म देखने भेजा। उन्हें लगा कि माता-पिता बड़े पर्दे पर बेटे को देखकर गर्व महसूस करेंगे, लेकिन पासा उल्टा पड़ गया

शक्ति कपूर ने आगे बताया कि जैसे ही फिल्म शुरू हुई, पर्दे पर मेरा पहला ही एंट्री सीन आया। उस सीन में मैं फिल्म की हीरोइन के साथ बदसलूकी कर रहा था और उसका दुपट्टा खींच रहा था।
यह देखते ही थिएटर में बैठे मेरे पिता गुस्से से लाल-पीले हो गए। उन्होंने तुरंत गुस्से में मेरी मां का हाथ पकड़ा और कहा, चलो, उठो यहाँ से…ये लड़का बाहर भी यही आवारागर्दी करता था और अब बड़े पर्दे पर भी यही गंदे काम कर रहा है…
मुझे नहीं देखनी ऐसी फिल्म।

और वे फिल्म बीच में ही छोड़कर थिएटर से बाहर निकल गए।

घर आकर पिता ने उन्हें डांट लगाई और कहा कि शरीफ इंसान के रोल क्यों नहीं करते?

इस पर शक्ति कपूर ने हंसते हुए जवाब दिया था,

“ पिताजी, आपने मुझे जो चेहरा दिया है, उसे देखकर कोई डायरेक्टर मुझे शरीफ इंसान का रोल देता ही नहीं है!”

माता-पिता की डांट और विलेन की इमेज से हटकर शक्ति कपूर के मन में भी हीरो बनने की ख्वाहिश जागी।

इसके पीछे की वजह थे दिग्गज एक्टर विनोद खन्ना, जिन्होंने विलेन से शुरुआत करके देश के सबसे हैंडसम हीरोज में जगह बनाई थी।

शक्ति कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि मैंने विनोद खन्ना को देखा था। वो विलेन से हीरो बने थे। मुझे लगा कि मैं भी अच्छा दिखता हूं, मेरी भी बॉडी अच्छी है, तो मैं हीरो क्यों नहीं बन सकता?
बस यही सोचकर मैंने सोच लिया कि अब मैं सिर्फ हीरो के रोल ही करूंगा।

साल 1982 में शक्ति कपूर को बतौर मेन लीड हीरो एक फिल्म मिली, जिसका नाम था जख्मी इंसान..
इस फिल्म में उनके अपोजिट एक्ट्रेस राखी गुलजार थीं।

शक्ति कपूर इस फिल्म को लेकर इतने कॉन्फिडेंट थे कि उन्होंने अपनी रिलीज होने वाली बाकी फिल्मों के डायरेक्टर्स से कहना शुरू कर दिया था कि अब मुझे विलेन के रोल के लिए साइन मत करना, मैं सिर्फ हीरो बनूंगा और उन्होंने विलेन के रोल के ऑफर्स ठुकराने शुरू कर दिए.

लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फ़िल्म फ्लॉप हो गई। दर्शकों को शक्ति कपूर का हीरो बनना बिल्कुल रास नहीं आया।

अपने एक टीवी इंटरव्यू में इस फिल्म के हश्र का जिक्र करते हुए शक्ति कपूर ने बताया था कि जब जख्मी इंसान रिलीज हुई, तो वो बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी डिजास्टर साबित हुई।

मुंबई के एक बड़े सिनेमाघर में तो ये हाल था कि फिल्म शुरू होने के मात्र 15 मिनट के अंदर ही थियेटर के मालिक ने उसे स्क्रीन से उतार दिया था क्योंकि हॉल में एक भी दर्शक नहीं था…
मुझे इतना बड़ा झटका लगा कि मेरा हीरो बनने का भूत एक ही झटके में उतर गया।

फ्लॉप के बाद शक्ति कपूर ने बिना वक्त गंवाए समझदारी दिखाई। वे तुरंत उन प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के पास वापस गए जिन्हें उन्होंने मना किया था।
उन्होंने सबसे कहा, भाई मुझे माफ करो, मैं विलेन ही ठीक हूं, मुझे काम दे दो।

इसके बाद उन्होंने विलेन के किरदारों के साथ-साथ कॉमेडी में हाथ आजमाया।

कादर खान के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही और आगे चलकर राजा बाबू के नंदू और अंदाज अपना अपना के क्राइम मास्टर गोगो जैसे किरदारों ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया।

शक्ति कपूर को जन्मदिन की शुभकामनाएं..

आपको शक्ति कपूर की कौन सी फिल्म पसंद आई थी?

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