दो माह बीत जाने के बाद भी रसोइयों को मानदेय नहीं मिलने से बढ़ी आर्थिक परेशानी

राजनांदगाँव /गंडई पंडरिया। स्कूली बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन परोसकर उनका पेट भरने वाले स्कूल रसोइयों की अपनी ही थाली खाली होती जा रही है। एक ओर जहां महंगाई आसमान छू रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों का खाना बनाने वाले इन रसोइयों को पिछले दो महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

​मिड-डे मिल योजना के तहत स्कूलों में दिन-भर मेहनत करने वाले इन जरूरतमंद मजदूरों को प्रतिमाह मात्र ₹2,000 का मानदेय मिलता है। इतनी न्यूनतम राशि में भी समय पर भुगतान न होना व्यवस्था की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। पिछले दो महीनों से मानदेय न मिलने के कारण कई रसोइयों के घरों में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है।

​रसोइयों का कहना है कि वे सुबह से स्कूल पहुंचकर पूरी ईमानदारी से बच्चों के लिए भोजन तैयार करते हैं, लेकिन जब पारिश्रमिक की बारी आती है तो उन्हें महीनों इंतजार करना पड़ता है।

​समय पर मध्यान्ह भोजन रसोइयों को मानदेय न मिलने से इन परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन चलाने के लिए ब्याज पर पैसे या दुकानदारों से उधार लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। अधिकांश रसोइया बेहद गरीब परिवारों से जीवन यापन करती हैं और यही मानदेय उनकी आजीविका का मुख्य सहारा होता है।

​स्कूल रसोइया संघ ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। केसीजी संघ के जिलाध्यक्ष पवन बघेल का कहना है कि यदि जल्द से जल्द पिछले दो महीनों के बकाए मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इसके लिए पूरा संघ तैयार है।पूरे जिले भर में लगभग 1728 रसोईया मध्यान्ह भोजन का कार्य कर रही है।

​रसोइयों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है, ताकि इन मेहनतकश मजदूरों को समय पर उनका हक मिल सके और वे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।

जिला शिक्षा अधिकारी खैरागढ़ केपी साव का कहना है कि मध्यान्ह भोजन रसोइयों का आबंटन आ गया है, बीईओ कार्यालय से उनका भुगतान होता है। जानकारी ले सकते हैं।