नेपाल त्रासदी
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
ज़रूरी नहीं कि देश की सेवा और लोगों की जान बचाने के लिए हमेशा सेना की वर्दी ही पहनी जाए…
वर्दी के बिना भी कुछ लोग रक्षक बनकर इतिहास रच देते हैं!

ऐसी ही एक मिसाल पेश की है नेपाल के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षक राजेंद्र दवाडी ने, जिन्होंने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से एक-दो नहीं, बल्कि 1,643 बच्चों की जिंदगी बचाई.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के दौरान जब लांगटांग लिरुंग चोटी से ग्लेशियर टूटा, तो त्रिशूली घाटी में प्रलय आ गया। त्रिभुवन त्रिशूली स्कूल में सुबह की प्रार्थना और कक्षाएं चल रही थीं।
तभी राजेंद्र जी को नदी के ऊपरी इलाके बेत्रावती में रहने वाले उनके एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने घबराती आवाज में कहा,
“नदी सब कुछ बहाकर ले जा रही है, गांव खत्म हो चुका है, तुरंत वहां से भागो!
शुरुआत में दवाडी को लगा कि कंक्रीट से बनी तीन मंजिला स्कूल की इमारत सुरक्षित है क्योंकि वह नदी से 60 मीटर की ऊंचाई पर थी। लेकिन तभी एक छात्र के माता-पिता ने आकर बताया कि पानी का स्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बिना एक पल गंवाए स्कूल की घंटी बजाकर 900 से अधिक बच्चों को पहाड़ियों की तरफ पैदल ही भागने को कहा..घबराए बच्चों ने ऊँचाई पर एक बोधि वृक्ष के नीचे खड़े होकर जान बचाई।
और स्कूल की बसें जो लगभग 700 बच्चों को लेकर स्कूल की तरफ ही आ रही थीं उन बसों ड्राइवरों से कांटैक्ट कर उन्हें रास्ते से ही वापस मुड़वाया..
एक बस जो ठीक स्कूल के सामने वाले पुल को पार कर रही थी, उसे उन्होंने चिल्लाकर पीछे मोड़ने को कहा। बस के मुड़ते ही वह पुल नदी के तेज बहाव में ढह गया।
जब तक आखिरी बच्चा सुरक्षित ऊंचाई पर नहीं पहुंच गया, राजेंद्र जी और उनके साथी शिक्षक मैदान में डटे रहे।
बच्चों के सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद, कंक्रीट की वो तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह सैलाब में बह गई। स्कूल तबाह हो गया,
लेकिन सभी १६४३ बच्चों की जान बच गई..
दुखद बात यह रही कि इस रेस्क्यू में स्कूल के एक इतिहास शिक्षक जो अपने रूम पर थे और एक वफादार चौकीदार ने अपनी जान गंवा दी।
यह घटना हमें सिखाती है कि हीरो कोई सुपरपावर लेकर पैदा नहीं होते। जब विपत्ति आती है, तो एक साधारण शिक्षक भी अपनी सूझबूझ और फर्ज के प्रति निष्ठा से भगवान का रूप ले लेता है।
राजेंद्र दवाडी जी के इस अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को पूरे विश्व का सलाम! 🙏
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