सुभाष घई के एक विज्ञापन में महिमा से छीन ली कई फिल्में

आज जन्मदिन

“यदि कोई भी निर्माता महिमा चौधरी को साइन करना चाहता है, तो उसे पहले सुभाष घई से संपर्क करना होगा।”

90 के दशक में अखबारों में छपे इस एक विज्ञापन ने रातों-रात महिमा चौधरी का पूरा करियर ब्लॉक कर दिया था और ये विज्ञापन खुद उनके गॉडफादर और निर्देशक सुभाष घई ने छपवाया था। इस एक नोटिस की वजह से इंडस्ट्री के निर्माताओं ने महिमा से दूरी बना ली थी और महिमा के हाथ से कई बड़ी फिल्में निकल गईं,
यहाँ तक कि रामगोपाल वर्मा की सुपरहिट फिल्म सत्या में मनोज वाजपेयी के अपोजिट साइन हो चुकी महिमा को रातों-रात बिना बताए फिल्म से हटा दिया गया था और उन्हें इस बात का पता सुबह अखबार पढ़कर चला…
जबकि वे इस फिल्म के लिए टोकन अमाउंट भी ले चुकी थीं.

लेकिन जिस निर्देशक ने महिमा को स्टार बनाया, वो उनका इस कदर दुश्मन क्यों बन गया था कि विज्ञापन छपवा दिए थे। इसके लिए फ़िल्म की तरह फ़्लैश बैक में चलते हैं..

इस कहानी की शुरुआत होती है दार्जिलिंग की रहने वाली ऋतु चौधरी से..
ऋतु का जन्म आज ही के दिन यानी 13 सितंबर 1973 को दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में हुआ था.
जब बड़ी हुई तो मन पढ़ाई से ज़्यादा फ़िल्मों में लगता था, इसीलिए बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़कर मॉडलिंग करने लगी..

उन्हीं दिनों मशहूर विज्ञापन फिल्ममेकर प्रहलाद कक्कड़ पेप्सी के लिए एक बड़ा भारतीय विज्ञापन प्लान कर रहे थे. उन्हें इस ऐड के लिए एकदम नए और फ्रेश चेहरों की तलाश थी. ऋतु ने भी इसके लिए ऑडिशन दिया और वे सिलेक्ट हो गईं..

साल 1993 में जब यह पेप्सी विज्ञापन टीवी पर आया, तो इसने तहलका मचा दिया. विज्ञापन में ऋतु के साथ सुपरस्टार आमिर खान और मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय भी थीं…

इसके तुरंत बाद ऋतु मुंबई आ गईं और एक म्यूजिक चैनल पर वीडियो जॉकी के तौर पर काम करने लगीं।

उन्हीं दिनों सुभाष घई अपनी फिल्म परदेस के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे जो गंगा नाम की एक बेहद मासूम और संस्कारी भारतीय लड़की के किरदार में फिट हो सके. पहले इस रोल के लिए माधुरी दीक्षित जैसी बड़ी अभिनेत्रियों के नाम पर भी विचार किया गया था, लेकिन घई साहब एक नया चेहरा ही चाहते थे.

जब ऋतु को पता चला, तो उन्होंने भी परदेस के लिए ऑडिशन दिया. शुरुआत में घई साहब की टीम के लोगों को लगा कि वे इस रोल के लिए फिट नहीं हैं, क्योंकि महिमा का स्टाइल काफी वेस्टर्न था और वे ज्यादातर अंग्रेजी में बात करती थीं.
लेकिन सुभाष घई को महिमा की आंखों की चमक और उनकी मासूम हंसी बेहद पसंद आई, और उन्होंने महिमा को शाहरुख खान के अपोजिट साइन कर लिया.

इसी फिल्म के दौरान सुभाष घई के कहने पर उन्होंने अपना नाम ऋतु से बदलकर महिमा रख लिया, क्योंकि घई साहब का मानना था कि M अक्षर से शुरू होने वाले नाम उनकी हीरोइनों के लिए बहुत लकी होते हैं..
और ऋतु चौधरी बन गई महिमा चौधरी..

फ़िल्म रिलीज़ हुई और ब्लॉकबस्टर रही।

महिमा रातों-रात स्टार बन गईं।उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड भी मिला। लेकिन इस फिल्म के बाद महिमा और सुभाष घई के बीच कॉन्ट्रैक्ट को लेकर विवाद हो गया।
महिमा ने बिना बताए कुछ शोज़ किए, जिससे नाराज होकर सुभाष घई कोर्ट चले गए और अखबारों में विज्ञापन छपवा दिया कि सुभाष घई से पूछे बिना कोई महिमा को अपनी फिल्म में साइन ना करें।

इन सब विवादों से जूझते हुए महिमा इंडस्ट्री में फिर भी काम कर ही रही थीं कि साल 1999 में उनके साथ एक खौफनाक हादसा हुआ।
फिल्म दिल क्या करे की शूटिंग के दौरान बेंगलुरु में उनकी कार का भयानक एक्सीडेंट हो गया। गाड़ी का शीशा टूट गया और काँच के टुकड़े उनके चेहरे में जा घुसे।
डॉक्टरों ने जब ऑपरेशन किया तो उनके चेहरे से 67 कांच के टुकड़े निकालने पड़े थे।

एक इंटरव्यू में महिमा ने बताया था कि सर्जरी के बाद ठीक होने में उन्हें काफ़ी टाइम लगा था, इस दौरान वो अपना चेहरा शीशे में भी देखना पसंद नहीं करती थीं, और इस एक्सीडेंट के बारे में इंडस्ट्री में भी किसी को नहीं बताया था क्योंकि उन्हें लगता था चेहरा ख़राब होने पर कोई उन्हें फ़िल्मों में काम नहीं देगा।

लेकिन इस मुश्किल घड़ी में अभिनेता अजय देवगन और काजोल ने उनका साथ दिया। उन्होंने मीडिया से यह बात छुपाई ताकि महिमा का करियर खत्म न हो, अपने परिचित बेहतरीन प्लास्टिक सर्जन से उनका इलाज शुरू करवाया. उन्होंने फिल्म की शूटिंग रोक दी और महिमा पर काम पर लौटने का कोई दबाव नहीं डाला…
जब महिमा सेट पर लौटीं, तो वे अपने चेहरे के दागों को लेकर चिंतित रहती थीं.
जब भी निर्देशक कैमरे को उनके क्लोज-अप के लिए पास लाते, तो अजय तुरंत बीच में टोक देते थे और कैमरामैन से कहते थे कि केवल लॉन्ग शॉट्स ही लिए जाएं..

जब महिमा इस सदमे से उबरने की कोशिश कर रही थीं, तब मीडिया की संवेदनहीनता का एक उदाहरण सामने आया..
एक नामी मैगजीन के फोटोग्राफर ने छुपकर सेट पर उनकी तस्वीर ली और मैगजीन के कवर पर वो तस्वीर छापी और हेडलाइन दी स्कारफेस यानी दागदार चेहरा..

इस संवेदनहीनता ने महिमा को मानसिक रूप से तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने फिर दोबारा सर्जरी कराई, खुद को संभाला और एक साल बाद धड़कन में नजर आई, जिसमें उनकी बहुत तारीफ़ हुई थी.. इसके बाद लज्जा और बागबान जैसी कई बेहतरीन फ़िल्में की।

महिमा की निजी जिंदगी भी आसान नहीं रही। 2006 में उन्होंने बॉबी मुखर्जी से शादी की, हालांकि उनका रिश्ता लंबा नहीं चला और दोनों अलग हो गए। उनके एक बेटी है जिसकी परवरिश महिमा ख़ुद कर रही है।

वो जीवन ही क्या जिसमें मुश्किल ना आए,
साल साल 2022 में महिमा को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था.
उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कि वे खुद को बहादुर दिखाने के चक्कर में इस दर्द को अकेले झेल रही थीं और उन्होंने अपने माता-पिता तक को नहीं बताया था. लेकिन जब अनुपम खेर ने उनके साथ वीडियो बनाकर अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया तब उनके पिता को पता चला कि उनकी बेटी को फर्स्ट स्टेज कैंसर है।

आज महिमा चौधरी कैंसर को पूरी तरह हरा चुकी हैं और अपनी बेटी के साथ मुंबई में एक खुशहाल और नॉर्मल लाइफ जी रही हैं।

महिमा चौधरी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। ❤️

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