बेहतरीन कलाकार “तैयब अली” की पुण्यतिथि है आज

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

आज 4 सितंबर है।
तारीखों के कैलेंडर में यह एक अजीब और बेहद भावुक करने वाला दिन है। आज जहाँ भारतीय सिनेमा के सबसे जिंदादिल अभिनेता ऋषि कपूर का जन्मदिन है, वहीं अपनी बिना दांतों वाली मुस्कान से लोगो का दिल जीतने वाले कॉमेडियन मुकरी साहब की पुण्यतिथि भी है

जब भी इन दोनों का नाम साथ आता है, जेहन में फिल्म अमर अकबर एंथनी का वो सदाबहार गाना गूंज उठता है…..
“तैयब अली प्यार का दुश्मन हाय-हाय…”

इस गाने में मुकरी साहब ने तैयब अली
लड़की के पिता का किरदार निभाया था और ऋषि कपूर उनके होने वाले दामाद अकबर बने थे।

इस गाने के परदे पर आने और अमर होने के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प कहानी है।

इस गाने को महान गायक मोहम्मद रफ़ी ने गाया था। जब रफ़ी साहब को पता चला कि यह गाना ऋषि कपूर गाएंगे, लेकिन बीच-बीच में मुकरी साहब के डायलॉग भी होंगे, तो उन्होंने एक तरकीब लगाई।

रफ़ी साहब ने मुकरी के बोलने के अंदाज को कॉपी करते हुए अपनी आवाज को थोड़ा भारी और मजाकिया बनाया, ताकि ऐसा लगे कि खुद मुकरी साहब ही गा रहे हैं।

इस गाने की शूटिंग के दौरान मुकरी साहब को सच में गुस्सा आ गया था। दरअसल, ऋषि कपूर उन्हें चिढ़ाते हुए उनके बेहद करीब आकर नाच रहे थे। उन्होंने अपनी शरारतों से मुकरी साहब को इतना तंग कर दिया कि मुकरी साहब कैमरे के सामने सचमुच चिढ़ गए।

निर्देशक मनमोहन देसाई को मुकरी साहब की वो असली झुंझलाहट इतनी पसंद आई कि उन्होंने सीन में कोई कट नहीं लगाया और वही शॉट फाइनल कर दिया।
यहाँ तक कि फ़िल्म में मुकरी साहब के किरदार का नाम तैयब अली’ कादर ख़ान ने सुझाया था। फिल्म के लेखक कादर खान और निर्देशक मनमोहन देसाई मुकरी के किरदार के लिए एक ऐसा नाम चाहते थे जो बोलने में थोड़ा कड़क लगे।
तब कादर खान ने यह नाम अपने मोहल्ले के एक पुराने परिचित के नाम पर सुझाया था।

मुकरी साहब के छोटे कद और बिना दांत की मुस्कान ने इस नाम को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया।

ये गाना असल में एक मजाकिया कव्वाली के रूप में फिल्माया गया था। उस दौर में जहाँ कव्वालियाँ बहुत गंभीर या सूफियाना होती थीं, वहीं ऋषि कपूर के डांस स्टेप्स और मुकरी साहब के फेशियल एक्सप्रेशन्स ने इसे सबका पसंदीदा गाना बना दिया।

आज भी जब किसी कड़क ससुर का जिक्र होता है, तो लोग मजाक में तैयब अली कह देते हैं।

लेकिन सिनेमा की इस चकाचौंध से दूर, इन दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता था जो आज के दौर में ढूँढे नहीं मिलता।

साल 2000 में जब मुकरी साहब ने आखिरी सांस ली, तो रात के दो बजे ऋषि कपूर को यह खबर मिली।
दिखावे की इस दुनिया में जहाँ कई बड़े नामी सितारे वक्त नहीं निकाल पाए, वहीं ऋषि कपूर सुबह ठीक सात बजे मुकरी साहब के घर के बाहर खड़े थे।

उनकी बेटी नसीम मुकरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जैसे ही हमने सुबह दरवाजा खोला, चिंटू जी वहां खड़े थे।
वह अंदर आए और मेरे पिता को देखकर किसी छोटे बच्चे की तरह फूट-फूटकर रोने लगे।

और आज दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं..लेकिन लोगों को याद हमेशा रहेंगे…

#RishiKapoor #bollywood #films