मोहनदास करमचंद गांधी के बारे में वे यूनीक बातें, जो बहुत कम लोग जानते हैं

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, इंदौर
फुटबॉल प्रेमी गांधीजी :
दक्षिण अफ्रीका में दो फुटबॉल क्लबों की स्थापना: अहिंसा और सत्याग्रह के साथ गांधीजी का खेल प्रेम कम ही चर्चित रहा है। दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान उन्होंने डरबन और जोहान्सबर्ग में ‘पैसिव रेजिस्टेंसर्स सॉकर क्लब’ नाम से दो फुटबॉल टीमों की शुरुआत की थी। वे खुद खेलते नहीं थे, लेकिन मैचों का संचालन, रेफरी और खिलाड़ियों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए मैदान का उपयोग करते थे।

नकली बत्तीसी की अनूठी आदत :
गांधीजी के दांत समय से पहले गिर गए थे, इसलिए वे नकली दांतों का इस्तेमाल करते थे। वे इन्हें मुंह में हमेशा नहीं लगाए रखते थे; अपनी धोती के पल्ले या कमरबंद में बंधी एक छोटी थैली में रखते थे। केवल भोजन करते समय दांत लगाते, खाने के बाद उन्हें साफ करके वापस थैली में रख लेते थे।

अंग्रेजी में हल्का आयरिश लहजा :
राजकोट से लंदन लॉ की पढ़ाई करने पहुंचे गांधीजी ने जिस ट्यूटर से अंग्रेजी का उच्चारण सुधारा था, वह आयरिश थे। इसके प्रभाव से गांधीजी के बोलने के लहजे में जीवनभर एक सौम्य आयरिश पुट महसूस किया जाता था।

कौन चार्ली चैपलिन?
1931 में गोलमेज सम्मेलन के दौरान जब लंदन के ईस्ट एंड में चार्ली चैपलिन उनसे मिलने आए, तब गांधीजी को नहीं पता था कि चैपलिन कौन हैं, क्योंकि उन्होंने कभी सिनेमा नहीं देखा था। जब सहयोगियों ने बताया कि वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय कलाकार हैं और गरीबों-मजदूरों की बात फिल्मों में उठाते हैं, तब गांधीजी उनसे मिले और दोनों के बीच औद्योगिकीकरण व मशीनों के प्रभाव पर लंबी चर्चा हुई।

ब्रिटिश डाक टिकट पर छपने वाले पहले गैर-ब्रिटिश व्यक्ति :
जिस ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ उन्होंने दशकों तक संघर्ष किया, उसी ग्रेट ब्रिटेन ने 1969 में गांधी जन्मशती पर उनके सम्मान में विशेष डाक टिकट जारी किया। गांधीजी ब्रिटिश डाक टिकट पर प्रदर्शित होने वाले पहले विदेशी और गैर-शाही व्यक्ति थे।

हिटलर को ‘प्रिय मित्र’ संबोधन से पत्र :

द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, जुलाई 1939 और दिसंबर 1940 में गांधीजी ने एडोल्फ हिटलर को दो पत्र लिखे थे। पत्र की शुरुआत उन्होंने “Dear Friend” से की थी और मानवीय आधार पर विश्व को महाविनाशकारी युद्ध से बचाने की अपील की थी। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने इन पत्रों को सेंसर कर दिया और वे हिटलर तक नहीं पहुंचे।

पृथ्वी के दो चक्कर के बराबर पैदल सफर :

स्वास्थ्य और राजनीतिक आंदोलनों के चलते गांधीजी ने 1913 से 1948 के बीच अनुमानित 79,000 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। यह दूरी पूरी पृथ्वी के दो चक्कर लगाने (भू-मध्य रेखा के बराबर) के समतुल्य है। वे सामान्यतः प्रतिदिन 15 से 18 किलोमीटर तेज गति से चलते थे।

नोबेल पुरस्कार का अधूरा सम्मान :
गांधीजी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार (1937, 1938, 1939, 1947 और 1948) नामांकित किया गया। जनवरी 1948 में उनकी हत्या से कुछ दिन पहले ही उनका पांचवां नामांकन भेजा गया था। नोबेल समिति ने मरणोपरांत पुरस्कार न दिए जाने के नियम के चलते उस वर्ष किसी को भी शांति का नोबेल नहीं दिया और आधिकारिक तौर पर कहा कि “इस वर्ष कोई जीवित उपयुक्त उम्मीदवार मौजूद नहीं है।”

2अक्टूबर 2026

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