
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
आप सबने शाहिद कपूर की फिल्म कबीर सिंह तो देखी ही होगी, इस फिल्म में अभिनेता आदिल हुसैन भी नजर आए थे, लेकिन आप ये नहीं जानते होंगे कि वो इस फिल्म को करना ही नहीं चाहते थे।
ये बात ख़ुद आदिल हुसैन ने एक इंटरव्यू में बताई थी,
दरअसल, जब मेकर्स उनके पास आए, तो उस समय वे फिल्म मुक्ति भवन के सिलसिले में काफी बिजी चल रहे थे और यात्रा पर थे।
उन्होंने फिल्म को टालने के इरादे से अपने मैनेजर से कहा कि वो मेकर्स से उनकी सामान्य फीस से 5 गुना ज्यादा पैसे मांग लो, ताकि वे खुद ही मना कर दें। लेकिन मेकर्स तुरंत उतनी भारी रकम देने के लिए राजी हो गए और आदिल को वो रोल करना पड़ा,
फ़िल्म में उनका छोटा सा रोल था, लेकिन उससे भी दिलचस्प वाक़या आदिल हुसैन के साथ इस फ़िल्म की रिलीज़ के बाद हुआ।
जब आदिल अपने एक दोस्त के साथ सिनेमाघर में यह फिल्म देखने गए, तो फिल्म में दिखाई गई महिलाओं के प्रति हिंसा और घृणा को देखकर वे बेहद असहज हो गए। फ़िल्म देखकर उन्होंने सोचा कि मैंने अपनी जिंदगी में कभी पूरी स्क्रिप्ट पढ़े बिना कोई फिल्म साइन नहीं की थी, और फिर ये भूल कैसे हो गई और ये उनकी इकलौती भूल थी।
फिल्म शुरू होने के महज 20 मिनट के भीतर ही वे थिएटर छोड़कर बाहर आ गए। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वे अपनी पत्नी को कभी यह फिल्म नहीं देखने देंगे, वरना वह बहुत नाराज होंगी।
इसी बेबाक और अपने उसूलों पर जीने वाले दिग्गज अभिनेता आदिल हुसैन का आज 5 अक्टूबर को जन्मदिन है।
असम के एक छोटे से कस्बे गोलपारा में जन्मे आदिल हुसैन का अभिनय का सफर बेहद फिल्मी रहा है। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे और चाहते थे कि आदिल पढ़-लिखकर कोई नौकरी करें। लेकिन आदिल के सिर पर तो अभिनय का भूत सवार था।
शुरुआत में उन्होंने असम के स्थानीय ग्रुप्स के साथ मिलकर 5 साल तक स्टैंड-अप कॉमेडी और मिमिक्री की। वे राजनेताओं की ऐसी नकल उतारते थे कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठता था।
बाद में जब वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा एक्टिंग सीखने पहुंचे, तो अभिनय को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया।
NSD से पास आउट होने के बाद आदिल का फिल्मों में आने का कोई इरादा नहीं था, वे सिर्फ थिएटर और नाटक करना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जब डायरेक्टर अभिषेक चौबे अपनी फिल्म इश्किया बना रहे थे, तो उन्हें विद्या बालन के पति के रोल के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो बिल्कुल आम लगे लेकिन एक्टिंग में उस्ताद हो।
कास्टिंग डायरेक्टर ने दिल्ली के NSD में पढ़ा रहे आदिल हुसैन का नाम सुझाया।
जब मेकर्स ने आदिल को फोन करके ऑडिशन के लिए मुंबई बुलाया, तो आदिल ने साफ मना कर दिया।
उन्होंने कहा, “मैं यहाँ क्लासेस ले रहा हूँ और मेरे पास मुंबई आने-जाने की फ्लाइट का टिकट खरीदने के पैसे नहीं हैं। वैसे भी मुझे कमर्शियल फिल्मों में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।”
अब डायरेक्टर को वही चेहरा चाहिए था, तो उन्होंने जिद पकड़ ली और कहा,
“तुम नहीं आ सकते तो क्या हुआ, मैं खुद दिल्ली आ रहा हूँ।”
इसके बाद अभिषेक चौबे खुद मुंबई से दिल्ली आए और एनएसडी के पास एक होटल में आदिल के लंच ब्रेक के दौरान उनसे मिलकर रोल फाइनल किया।
और इस तरह से उनके फिल्मी सफर की शानदार शुरुआत हुई।
आज भले ही आदिल हुसैन एक बड़ा नाम हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास पैसे नहीं थे।
आदिल हुसैन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो NSD में पढ़ा रहे थे, उसी दौरान उनकी पत्नी क्रिस्टन गर्भवती थीं, तब उनके बैंक अकाउंट में सिर्फ 3,000 बचे थे। वे बेहद परेशान थे कि आगे का खर्चा कैसे चलेगा। तभी अचानक उनके पास फिल्म गांगोर के मेकर्स का फोन आया।
दरअसल, इस रोल को पहले इरफ़ान खान करने वाले थे, लेकिन उनके मना करने के बाद यह रोल आदिल को मिला, जिसने उनकी आर्थिक मदद की थी।
चकाचौंध वाली इस इंडस्ट्री में जहाँ एक्टर्स में बहुत घमंड आ जाता है, वहीं आदिल हुसैन के पैर हमेशा जमीन पर रहते हैं।
वे अक्सर मुस्कुराते हुए कहते हैं कि स्टारडम आज है, कल नहीं। अगर कभी जिंदगी में उन्हें फिल्मों में काम मिलना बंद भी हो गया, तो उन्हें कोई मलाल नहीं होगा।
वे कहते हैं, “मैं बहुत अच्छी कुकिंग करता हूँ और बेहतरीन गाड़ी चला लेता हूँ। अगर एक्टिंग छूटी, तो मैं एक रसोइया या ड्राइवर की नौकरी भी खुशी-खुशी कर लूंगा।”
वे अपनी गंभीर और यथार्थवादी एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हिंदी, असमिया, अंग्रेजी, बंगाली, तमिल सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है।
उन्होंने हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता फिल्म लाइफ ऑफ पाई और द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट जैसी फिल्मों में भी काम किया है।
पैसों से ज्यादा अपने उसूलों को तवज्जो देने वाले और हर किरदार में जान फूंकने वाले इस बेहतरीन कलाकार को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं…
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