खून भरी मांग ने संवार दिया था रेखा का डांवाडोल होता करियर

आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

सिनेमा की दुनिया में रेखा को आज एक लीजेंड माना जाता है, कहा जाता है कि वो हर किरदार में उतर जाती हैं..
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अस्सी के दशक के आखिरी सालों में उनका करियर एकदम ढलान पर आ गया था?
लगातार फ्लॉप हो रही फिल्मों की वजह से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया ने मान लिया था कि रेखा का दौर अब खत्म हो चुका है।

ऐसे मुश्किल वक्त में एक फिल्म आई, जिसने रेखा की किस्मत को पलट कर रख दिया और उन्हें बॉलीवुड की सबसे खतरनाक रिवेंज क्वीन बना दिया… और वो फिल्म थी साल 1988 की ब्लॉकबस्टर खून भरी मांग…

साल 1987 में राकेश रोशन बतौर डायरेक्टर अपनी दूसरी फिल्म खून भरी मांग बनाने की तैयारी कर रहे थे। ये एक वुमन-सेंट्रिक एक्शन-थ्रिलर फिल्म थी, जो उस जमाने के हिसाब से बहुत बड़ा रिस्क थी…क्योंकि तब तक दर्शक बड़े पर्दे पर विलेन को सिर्फ हीरो से मार खाते देखते रहे थे।
इसके बावजूद उन्होंने रेखा के साथ ये फ़िल्म बनाने का फैसला किया।

जैसे ही ये खबर फ़िल्मी गलियारों में फैली, तो फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स और राकेश रोशन के दोस्तों ने उनके कान भरने शुरू कर दिए।
उन्होंने कहा,
“रेखा के साथ फ़िल्म मत बनाओ, वो सेट पर लेट आती है, उन पर पैसा लगाना यानी अपनी गाढ़ी कमाई कुएं में फेंकना है।”

राकेश रोशन ने ख़ुद बताया था कि उनके दोस्तों ने उन्हें बहुत समझाया था।

लेकिन राकेश रोशन अड़ गए। उन्होंने किसी की एक न सुनी और अपनी जिंदगी की पूरी जमापूंजी इस फिल्म पर लगा दी।

वो रेखा के पास फ़िल्म की स्क्रिप्ट लेकर गए और कहा कि दुनिया चाहे जो कहे, मुझे पता है कि आरती का यह किरदार तुम्हारे अलावा कोई नहीं निभा सकता।

रेखा ने भी राकेश रोशन के इस भरोसे का मान रखा,
उन्होंने फिल्म में दो एकदम अलग अलग किरदार निभाए पहले में वो एक सादा जीवन जीने वाली, डरी-सहमी दो बच्चों की मां बनी और दूसरे में प्लास्टिक सर्जरी के बाद बदला लेने वाली एक बेहद ग्लैमरस और खतरनाक लेडी ज्योति।

फिल्म का वो सीन तो आपको याद ही होगा, जब आरती का लालची पति कबीर बेदी, उसे मगरमच्छों से भरे पानी में फेंक देता है। आरती रोती है, चीखती है और धीरे धीरे मगरमच्छ उसे खा जाता है। वो सीन इतना खतरनाक था कि हम बच्चे अपनी आँख बंद कर लेते थे।

ये फिल्म जब थियेटर्स में रिलीज हुई तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। डेढ़ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने राकेश रोशन को छ करोड़ के लगभग कमाकर दिए थे।

इसी फिल्म ने रेखा को उनके करियर का दूसरा फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दिलाया था

आज उन्ही रिवेंज क्वीन रेखा का जन्मदिन है,
उनका असली नाम भानुरेखा गणेशन है। उनके पिता जेमिनी गणेशन साउथ के बहुत बड़े स्टार थे, लेकिन उन्होंने रेखा की मां पुष्पावली से कभी शादी नहीं की। इस वजह से रेखा को बचपन में न पिता का नाम मिला और न उनका प्यार। जब घर के आर्थिक हालात बेहद खराब हो गए, तो महज 12 साल की उम्र में नौवीं क्लास में ही उनका स्कूल छूट गया और उन्हें जबरन फिल्मों में काम करना पड़ा।

जब रेखा ने 1970 में हिंदी फिल्म सावन भादों से बॉलीवुड में कदम रखा, तो इंडस्ट्री ने उनका स्वागत तालियों से नहीं बल्कि तानों से किया। उनके सांवले रंग, भारी वजन और हिंदी न बोल पाने की वजह से उनका जमकर मजाक उड़ाया गया।
एक इंटरव्यू में रेखा ने बताया था कि स्कूल के बच्चे तो उन्हें भारी वजन की वजह से “लोटा” कहकर चिढ़ाते थे।

इन तानों से टूटने के बजाय रेखा ने खुद पर काम करना शुरू किया। वो बॉलीवुड की पहली ऐसी एक्ट्रेस बनीं जिन्होंने नियमित रूप से जिम जाना शुरू किया, योग को अपनी लाइफस्टाइल बनाया और अपनी फिटनेस के वीडियो कैसेट्स भी लॉन्च किए।
उन्होंने उर्दू सीखी, हिंदी सुधारी और खुद को ऐसा बदला कि वो बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टाइल आइकन बन गईं।
आज भी जब वो अपनी कांजीवरम साड़ी, लाल लिपस्टिक, बालों में गजरा, माँग में सिंदूर लगाए किसी इवेंट में आती है, तो महफिल थम सी जाती है।

बॉलीवुड की एवरग्रीन दिवा रेखा को जन्मदिन की शुभकामनाएं

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