
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
ये बात उन दिनों की है जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनकी लगातार कई फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं और लोग उन्हें अनलकी मानने लगे थे। यहाँ तक कि अमिताभ ख़ुद इतने हताश हो गए थे कि बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस अपने घर लौटने की सोच रहे थे।
ऐसे बुरे वक्त में कॉमेडियन महमूद उनके लिए भगवान बनकर आए। महमूद ने न सिर्फ अमिताभ को अपने घर में पनाह दी, बल्कि एक बड़े भाई की तरह जेबखर्च भी दिया।
साल 1972 में महमूद ने फिल्म बॉम्बे टू गोवा में अमिताभ बच्चन को लीड हीरो के तौर पर साइन किया। इसी फिल्म के एक फाइट सीन को देखकर सलीम-जावेद ने प्रकाश मेहरा को जंजीर के लिए अमिताभ का नाम सुझाया, जिसने बिग बी के करियर की दिशा हमेशा के लिए बदल दी
एक इंटरव्यू में जब रेडियो होस्ट अमीन सयानी ने महमूद से उनके रेस के घोड़ों के बारे में पूछा, तो महमूद ने कहा था, “मेरा सबसे तेज घोड़ा अमिताभ है। जिस दिन वह दौड़ना शुरू करेगा, सबको पीछे छोड़ देगा।”
उनकी यह बात आगे चलकर अक्षरशः सच साबित हुई।
आज 29 सितंबर को इसी महान और दरियादिल कलाकार महमूद का जन्मदिन है।
आज भले ही हम महमूद को उनकी अमीरी और स्टारडम के लिए जानते हैं, लेकिन उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता था। उनके पिता मुमताज अली फिल्म इंडस्ट्री में डांसर और एक्टर थे, लेकिन उनकी नशे की लत के कारण घर की माली हालत खराब हो गई।
अपने परिवार को संभालने के लिए बाल कलाकार के रूप में काम करने के बाद, महमूद ने मुंबई की लोकल ट्रेनों में टॉफियां और अंडे तक बेचे। उन्होंने फिल्म निर्देशक पी.एल. संतोषी के ड्राइवर के रूप में भी काम किया।
दिलचस्प बात ये है कि जिस इंडस्ट्री में वो ड्राइवर बनकर आए थे, एक दिन उसी इंडस्ट्री के सबसे महंगे सितारे बन गए।
60 और 70 के दशक में महमूद की लोकप्रियता इतनी चरम पर थी कि फिल्मों के मेन हीरो भी उनके साथ काम करने से घबराते थे। उन्हें डर रहता था कि महमूद अपनी कॉमिक टाइमिंग से पूरी महफिल लूट ले जाएंगे और हीरो पीछे छूट जाएगा। कई बार तो फिल्म के पोस्टर्स पर हीरो से बड़ी तस्वीर महमूद की छपती थी।
उस दौर में जहाँ सुनील दत्त, धर्मेंद्र और शमी कपूर जैसे लीड हीरोज पूरी फिल्म के लिए 5 लाख रुपये से कम लेते थे, वहीं महमूद सिर्फ कुछ दिनों के रोल के लिए 7.5 लाख रुपये तक चार्ज करते थे। प्रोड्यूसर उन्हें मुंह मांगी रकम देते थे क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर्स साफ कहते थे कि
“पोस्टर पर महमूद की फोटो होगी, तभी हम फिल्म खरीदेंगे।”
कहा जाता है कि एक फिल्म के लिए महमूद ने उस जमाने में 1 लाख रुपये प्रति दिन की फीस ली थी, जो उस वक्त के हिसाब से एक रिकॉर्ड था।
इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर्स उनके बारे में कहते थे कि हीरो से ज्यादा महंगी महमूद की मूंछ पड़ती है।
महमूद को राजा-महाराजाओं जैसी जिंदगी जीने का शौक था।
महमूद के पास उस जमाने में कई महंगी गाड़ियां थीं और उन्हें कारों का बेहद शौक था।
फ़िल्म बॉम्बे टू गोवा की शूटिंग के दौरान एक दिन अमिताभ बच्चन ने कौतूहल में आकर महमूद से पूछा,
“भाईजान, आपके पास इतनी सारी आलीशान गाड़ियां हैं, आप इनका क्या करते हैं?”
तब महमूद ने मुस्कुराते हुए अमिताभ के कंधे पर हाथ रखा और कहा,
“लल्ला, आज भले ही मेरे पास ये गाड़ियां हैं, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हारे पास मुझसे भी ज्यादा कारें होंगी और उन्हें पार्क करने के लिए तुम्हें जमीन खरीदनी पड़ेगी।
उनके भाई अनवर अली ने एक इंटरव्यू में बताया था हैं कि महमूद के पास एक समय पर 24 से ज्यादा महंगी विदेशी कारें थीं।
उनके बारे में इंडस्ट्री में एक बात बहुत मशहूर थी कि वह जिस रंग का सूट या शर्ट पहनते थे, गैरेज से उसी रंग की कार निकालकर शूटिंग पर जाते थे। अगर उन्होंने लाल रंग की शर्ट पहनी है, तो वह लाल रंग की चमचमाती कार से ही सेट पर एंट्री मारते थे।
इतना पैसा और शोहरत होने के बावजूद महमूद के पैर हमेशा जमीन पर रहे।
दरअसल, महमूद ने खुद अपने बचपन में बहुत तंगी देखी थी। उन्होंने मुंबई की लोकल ट्रेनों में टॉफियां और अंडे तक बेचे थे, यही वजह थी कि जब उनके पास पैसा और शोहरत आई, तो उन्होंने दिल खोलकर गरीबों और जरूरतमंदों के लिए खर्च किया। वह जितना कमाते थे, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा दान कर देते थे।
फिल्म सिटी या स्टूडियो के सेट पर अगर कोई स्पॉटबॉय, लाइटमैन या जूनियर आर्टिस्ट परेशान दिखता, तो महमूद तुरंत उसकी आर्थिक मदद कर देते थे। कई बार वह चुपके से उनकी जेब में पैसे डाल देते थे ताकि उन्हें शर्मिंदगी न हो।
इतना ही नहीं, अगर सेट पर किसी कर्मचारी की तबीयत खराब होती या उसके परिवार में कोई बीमार होता, तो महमूद खुद डॉक्टर बुलाते और इलाज का पूरा खर्च उठाते थे।
महमूद कहा करते थे, पैसा तो हाथ का मैल है, आज है कल नहीं, लेकिन जो दुआएं मुझे इन लोगों से मिलती हैं, वही मेरी असली दौलत है।
महमूद न सिर्फ पर्दे पर लोगों को हंसाते थे, बल्कि असल जिंदगी में भी बेहद दरियादिल इंसान थे, जिन्होंने कई नए कलाकारों का करियर संवारने में मदद की।
महमूद साहब को जन्मदिन की शुभकामनाएं।
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