
बॉलीवुड में हर साल सैकड़ों चेहरे अपनी किस्मत आजमाने आते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो लीक से हटकर अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं। ऐसा ही एक नाम है इमरान हाशमी।
आज हम उन्हें सीरियल किसर हिट गानों के किंग और एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी शुरुआत इतनी आसान नहीं थी?
उन्हें अपनी पहली ही फिल्म से निकाल दिया गया था।
फिर चलिए जानते हैं कि इमरान हाशमी का पहली फिल्म से रिजेक्शन होने के बाद वो स्टार कैसे बने…?
बहुत कम लोग जानते हैं कि इमरान हाशमी का डेब्यू साल 2003 में नहीं, बल्कि 2001 में ही होने वाला था। मशहूर फिल्म निर्माता और उनके मामा महेश भट्ट उन्हें अमीषा पटेल के अपोजिट फिल्म ये जिंदगी का सफर से लॉन्च करने वाले थे।
फिल्म की शूटिंग शुरू हुई, लेकिन इमरान कैमरे के सामने कम्फर्टेबल नहीं थे। मेकर्स और उनके मामा महेश भट्ट को लगा कि इमरान की एक्टिंग स्किल्स अभी कैमरे के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें शूटिंग शुरू होने के बाद फिल्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया..
शूटिंग शुरू होने के बाद फ़िल्म से बाहर निकाल देना ये किसी भी नए कलाकार का हौसला तोड़ने के लिए काफी था।
लेकिन फिल्म से निकाले जाने के बाद इमरान हाशमी ने हार नहीं मानी। उन्होंने समझा कि एक्टिंग से पहले उन्हें फिल्म मेकिंग और कैमरे की तकनीकी बारीकियों को समझना होगा। इसके लिए उन्होंने कैमरे के पीछे काम करने का फैसला किया। उन्होंने साल 2002 की सुपरहिट हॉरर फिल्म राज़ में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। वहां विक्रम भट्ट के साथ काम करते हुए उन्होंने सेट का अनुभव लिया…
राज़ फिल्म के दौरान उनकी मेहनत और लगन को देखकर निर्देशक विक्रम भट्ट और निर्माता महेश भट्ट काफी प्रभावित हुए।
उन्हें यकीन हो गया कि अब ये लड़का कैमरे का सामना करने के लिए तैयार है।
इसके बाद विक्रम भट्ट ने अपनी अगली क्राइम थ्रिलर फिल्म फुटपाथ जो 2003 में आई थी, में इमरान को एक गैंगस्टर का सपोर्टिंग रोल ऑफर किया..
हालांकि इस फिल्म में लीड हीरो आफताब शिवदासानी थे, लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों और क्रिटिक्स की नजरें इमरान हाशमी पर भी टिक गईं। उनके निभाए ग्रे-शेड किरदार की जमकर तारीफ हुई।
फुटपाथ में इमरान के शानदार काम को देखकर उनके मामा महेश भट्ट को समझ आ गया कि इमरान में एक बड़े स्टार बनने की काबिलियत है।
और उन्हें अब अपने घर का नया स्टार मिल गया था…
इसी बीच महेश भट्ट उस समय हॉलीवुड फिल्म अनफेथफुल से प्रेरित होकर एक बोल्ड, इरॉटिक थ्रिलर बनाने की प्लानिंग कर रहे थे। उन्हें एक ऐसे एक्टर की तलाश थी जो बिना किसी झिझक के एक ग्रे-शेड और बेहद बोल्ड किरदार को पूरी शिद्दत से निभा सके।
इमरान हाशमी इसके लिए परफेक्ट चॉइस थे। फिल्म में मल्लिका शेरावत के अपोजिट इमरान को कास्ट किया गया और दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने आग लगा दी।
मर्डर बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई।। इसी फिल्म ने इमरान हाशमी को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया और उन्हें बॉलीवुड में सीरियल किसर का टैग भी इसी फिल्म की सफलता के बाद मिला।
साल 2004 से 2006 तक इमरान हाशमी की पहचान एक बोल्ड एक्टर और सीरियल किसर के रूप में पक्की हो चुकी थी। लेकिन साल 2007 में आई फिल्म आवारापन ने उनकी इमेज को बदल दिया..
इस क्राइम-ड्रामा फिल्म में इमरान ने शिवम नाम के एक ऐसे उदास और गंभीर गैंगस्टर का किरदार निभाया, जो अपनी मोहब्बत को खो चुका है। फिल्म में उनके चेहरे का खालीपन, दर्द और इंटेंस एक्टिंग ने लोगों का मुंह बंद कर दिया, जो उन्हें सिर्फ बोल्ड रोल तक ही समझते थे..
इस फिल्म का संगीत ब्लॉकबस्टर रहा। प्रीतम के संगीत निर्देशन में तो फिर आओ और तेरा मेरा रिश्ता जैसे गानों ने सूफी संगीत ने धूम मचा दी..
भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक कमाई न कर सकी हो, लेकिन आज इसे इमरान हाशमी के करियर की कल्ट फिल्म माना जाता है।
और इसका सीक्वल जो अभी रिलीज हुआ है बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है..
इसके बाद 2008 में आई जन्नत को कौन भूल सकता है..जिसके किरदार अर्जुन का हेयरस्टाइल, लुक्स , डायलॉग्स को उस दौर में खूब कॉपी किया गया..
इस फिल्म के गाने जो केके की आवाज में ज़रा सी दिल में…और हाँ तू है आज भी हर आशिक की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं..
इस फिल्म ने साबित कर दिया था कि इमरान हाशमी अकेले अपने दम पर थिएटर्स में भीड़ जुटा सकते हैं।
अगर विश्लेषण किया जाए कि इमरान हाशमी की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे किसका हाथ है तो इसका सबसे बड़ा क्रेडिट उनके मामा और मशहूर फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट को जाता है..
खुद इमरान हाशमी भी अपने कई इंटरव्यू में कह चुके है कि अगर उनके मामा महेश भट्ट का साथ न होता, तो उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री में इस मुकाम तक पहुंचना नामुमकिन था।
महेश भट्ट ने इमरान के करियर को दिशा दी। उन्होंने ही इमरान को फिल्मों में लॉन्च किया और उनके हुनर को पहचाना और मर्डर, ज़हर, और गैंगस्टर, जैसी भट्ट कैंप की हिट फिल्मों ने इमरान को बॉलीवुड में पहचान दिलाई।
साथ ही इमरान हाशमी की फ़िल्मों की सबसे बड़ी ख़ासियत थी उनके गाने जो हिमेश रेशमिया, केके, आतिफ असलम की आवाज में उनकी सफलता की सबसे बड़ी रीढ़ बने।
उन्होंने हीरो की इमेज से हटकर बैड बॉय की जो इमेज बनाई, उसने युवाओं को दीवाना बना दिया।
इमरान हाशमी की हिट फ़िल्मों का दौर वो टाइम था जब हम अपने युवा होते दिनों से गुज़र रहे थे..जब इमरान हाशमी की पहली फिल्म आई मर्डर तब मैंने बीएससी में एडमिशन लिया था..
और उस समय एफएम का दौर था इमरान हाशमी के गाने सारा दिन रेडियो पर बजते रहते थे, लोग म्यूजिक लाउड करके सिस्टम पर सुनते थे..
“झलक दिखला जा…एक बार आजा आजा आजा आजा..”
2003 बीएससी में कहो ना कहो सुनते-सुनते शुरू हुआ मेरा ये सफ़र…2008 में दिल्ली की बस में ऑफिस जाते हुए FM पर जन्नत का ज़रा सा दिल में…सुनने तक आ पहुँचा था…
वैसे आपको इमरान हाशमी की कौन सी फ़िल्म या गाना पसंद है..❤️
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश


