दमदार कहानी या सस्पेंस हो तब चलती है फिल्में

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

एनिमल सिर्फ वायलेंस या तृप्ति के सूक्स सीन कारण नहीं चली थी..इसमें पिता-पुत्र के बीच का रिश्ता था, टॉक्सिक रिलेशनशिप था जिसने दर्शकों को बांधकर रखा।

धुरंधर फ़िल्म में भी केवल एक्शन नही था इसमें जासूसी मिशन का सस्पेंस, रोमांस और पारिवारिक जुड़ाव को इस तरह पिरोया गया था कि दर्शक अंत तक बंधा रहा और दोनों किस्तें हिट हुई फ़िल्म की..

KGF में भी रॉकी भाई का किरदार इसलिए अमर हुआ क्योंकि उसके एक्शन के पीछे एक इमोशनल रीज़न था। उसका बचपन, उसकी माँ का वह संघर्ष और उसका वादा कि बेटा गरीबी में नहीं मरेगा, और केजीएफ के खदानों में काम करने वाले मजदूरों की कहानी थी जिसने दर्शकों को बांध कर रखा..

अगर आपकी फ़िल्म में कहानी नही है. तो अब केवल सूक्स सीन और एक्शन के जोर दर्शकों को तीन घंटे तक नही बिठा सकते. पहले जो दर्शक थिएटर्स में सिर्फ बोल्ड कंटेंट देखने जाते थे, उनके लिए मॉर्निंग शो अलग से चलता था.. लेकिन अब वो दौर खत्म हो चुका है।
क्योंकि इंटरनेट और स्मार्टफोन ने सब कुछ एक क्लिक पर लाकर खड़ा कर दिया है।

आज का दर्शक टिकट के पैसे और अपने तीन घंटे तभी खर्च करता है जब स्क्रीन पर कोई दमदार कहानी या सस्पेंस चल रहा हो। केवल एक्शन या सेक्स सीन के दम पर फिल्म पहले वीकेंड के बाद दम तोड़ देती है।

शाहरुख, सलमान, आमिर या साउथ के महेश बाबू और थलपति विजय जैसे एक्टर्स ने कभी दर्शकों को थियेटर तक खींचने के लिए सिक्स सूक्स कंटेंट का सहारा नहीं लिया…इनका स्टारडम साफ-सुथरी कहानियों, रोमांस और फैमिली ड्रामा के दम पर बना है

आसिफ अली की है इस बात से मैं सहमत हूँ,

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