सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ का eBook संस्करण प्रीऑर्डर के लिए उपलब्ध

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, इंदौर

Belonging
सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ को लेकर कांग्रेस नेताओं ने पेंगुइन इंडिया रैंडम हाउस पर आरोप लगाए हैं। कहा है कि Penguin India मोदी, RSS और चीन से जुड़े हिस्से हटाना चाहता था। बहरहाल, किताब का eBook संस्करण अमेजन पर प्रीऑर्डर के लिए उपलब्ध है।10 नवम्बर 2026 को यह ईबुक उपलब्ध हो जाएगी। प्रकाशक ने इसे अपने जॉनर की बेस्ट सेलर नंबर 1 बताते हुए इस किताब के बारे में लिखा है :

एक चौंकाने वाली, गहरी और मनमोहक संस्मरण – – जो निजी जीवन को राजनीति से इस तरह बुनती है कि कहानी रुकती ही नहीं। प्रेम की कहानी। परिवार की कहानी। और उस देश की कहानी जो कभी भी पूरी तरह जाना नहीं जा सकता – भारत।

इटली के एक छोटे से गाँव की लड़की भारत की राजनीति की सबसे चर्चित चेहरों में कैसे शामिल हो गई? और दुनिया भर में कैसे पहचानी जाने लगी?

‘बिलॉन्गिंग’ की शुरुआत इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है। साल 1965। उन्नीस साल की सोनिया मैनो पहली नज़र में उस सुंदर, गहरी आँखों वाले युवक से उलझ जाती है, जिससे उसकी शादी होनी है – राजीव गांधी। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पौत्र।

इस किताब में वह सोनिया गांधी खुलती हैं, जो सालों तक चुप रहने के लिए जानी जाती थीं। गर्मजोशी से, साफ-साफ। युद्ध के बाद के वेनेटो में बीता बचपन। वह प्रेम जो उन्हें भारत ले आया। और फिर वे टूटनें, जिन्होंने न सिर्फ उनके जीवन का रास्ता मोड़ दिया, बल्कि उनके गोद लिए हुए देश का भविष्य भी बदल दिया।

हम देखते हैं सोनिया का अपनी सास से पहला सामना – इंदिरा गांधी। नेहरू की बेटी। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री। और फिर राजीव के साथ-साथ उनका धीरे-धीरे खुलना। नई ज़मीन की आवाज़ें, रंग, गंध। हिंदी सीखना। साड़ी पहनना। तीखे स्वाद से दोस्ती करना।

राजीव वाणिज्यिक विमान के पायलट बनते हैं। दोनों दिल्ली के प्रधानमंत्री निवास में अपने दो बच्चों को पालते हैं। फिर सब कुछ एक झटके में बदल जाता है। राजीव के भाई संजय, जो खुद भी पायलट हैं, हवाई दुर्घटना में चल बसते हैं। और 1984 में इंदिरा गांधी की अपने ही घर के बगीचे में सुरक्षाकर्मियों द्वारा हत्या हो जाती है। माँ की मौत के बाद, सोनिया की आशंकाओं के बावजूद, राजीव प्रधानमंत्री बनते हैं। दंपति देश और दुनिया घूमते हैं। फिर सात साल बाद वह क्षण आता है, जिसे सोनिया के शब्दों में पढ़ना दिल पर भारी पड़ता है—चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमलावर राजीव को भी छीन लेता है।

इटली का परिवार कहता है – लौट आओ। सोनिया नहीं लौटतीं। भीतर की आवाज़ उन्हें भारत में ही रोक लेती है। राजनीति उन्हें खींच ले जाती है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बनती हैं। एक समय जिन्हें ‘बाहर से आई हुई’ माना जाता था, वही करोड़ों लोगों का भरोसा और स्नेह जीत लेती हैं। फिर एक बड़े चुनाव के बाद पार्टी उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहती है। वे मना कर देती हैं। देश का सबसे ऊँचा पद ठुकराकर अपनी पार्टी को उस गठबंधन में ले जाती हैं, जो दस साल तक भारत चलाता है।

यह विवरण एक साथ विशाल भी है और बेहद निजी भी। भारत के स्वतंत्रता के बाद के उथल-पुथल भरे इतिहास पर, आज की राजनीतिक खींचतान पर, और पचास वर्षों में देश में आए भारी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों पर एक अंदरूनी नज़र। किताब एक प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार के पर्दे के पीछे ले जाती है। लेकिन सबसे अधिक खुलकर सामने आती हैं खुद सोनिया। अपनी खुशियाँ, अपनी टीसें, और वे लोग व घटनाएँ जिन्होंने उन्हें बनाया। उनकी आवाज़ पैनी भी है और विनम्र भी। पहचान क्या होती है, कर्तव्य क्या होता है, और ‘घर ‘आखिर किसे कहते हैं – इन्हीं सवालों पर वे ठहरकर बात करती हैं।

‘बिलॉन्गिंग’ एक साहसी स्त्री की कहानी है। एक पुरुष से प्यार करने की। एक देश से प्यार करने की। अपने जीवन को फिर से गढ़ने की हिम्मत जुटाने की। और उस जगह की सेवा करने की, जिसे वह अपना घर कह सकती हैं – भारत।

ईबुक किताब की कीमत 2615 रुपये 92 पैसे (डिस्काउंट के बाद ) रखी गई है.