
डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, इंदौर
बॉक्स ऑफिस पर फिर आई सुनामी !
ज़िन्दगी में पहली पहली बार मैं कोई ऐसी फिल्म देखने गया, जिसके न तो हीरो का नाम मालूम था और न ही डायरेक्टर का ! फिल्म 31 जुलाई को ही लग गई थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस के रेकॉर्ड अब तोड़ रही है। फिल्म है -हनुमान अंश !
लगता है कि हिन्दी फिल्मों का वो पुराना चमत्कार फिर लौटआया है। साल 1975 याद है? जब एक तरफ 70 एमएम स्क्रीन पर गब्बर और जय-वीरू की ‘शोले’ गरज रही थी, तो दूसरी तरफ बेहद शांत तरीके से रिलीज हुई कम बजट की ‘जय संतोषी मां’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफान खड़ा किया कि लोग सिनेमाघरों के बाहर चप्पलें उतारकर अंदर हाथ जोड़कर बैठते थे। जब उस फिल्म में पर्दे संतोषी माता की आरती आती तो लोग खड़े हो जाते और सिनेमा के स्क्रीन की तरफ चढ़ावे के रूप में चिल्लर फैंकते थे।
2026 में इतिहास ने खुद को फिर दोहरा रहा है। बड़े बजट की (कहते हैं 500 करोड़ की ) टॉक्सिक के सामने केवल दो करोड़ की लागत से बनी ‘हनुमान अंश’ से सुनामी ला दी है। हनुमान अंश ने अब तक अपनी लागत का 25 गुना से ज़्यादा (करीब 50 करोड़ ) अर्जित कर लिया है। केवल इंदौर में आज एक ही दिन डिस्ट्रिक्ट ऍप पर इसके 137 शो की बुकिंग हुई। कल भी लगभग इतने ही शो होंगे।
शुरुआत ठंडी, फिर आया सुनामी जैसा तूफान! जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो बड़े मल्टीप्लेक्सों में सन्नाटा था। न भारी-भरकम स्टारकास्ट, न कोई 50 करोड़ का प्रमोशनल इवेंट। पहले दिन की ओपनिंग इतनी कमजोर थी कि ट्रेड पंडितों ने इसे खारिज कर दिया था। लेकिन फिर शुरू हुआ असली खेल— ‘वर्ड ऑफ माउथ’ और आस्था का मेल!
एक ने देखी, चार को बताया, चार ने चालीस को। तीसरे दिन से सिनेमाघरों के बाहर ‘हाउसफुल’ के बोर्ड लटकने लगे और छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्सों में स्क्रीन्स बढ़ानी पड़ गईं।
इसने बड़े-बड़े धुरंधरों को धूल चटा दी। बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह इस फिल्म ने बड़ी बजट की एक्शन और स्टार-स्टडेड फिल्मों को हिन्दी बेल्ट में पछाड़ा है, उसने बॉलीवुड के गणित को हिलाकर रख दिया है: मल्टी-स्टारर पैन-इंडिया फिल्मों और करोड़ों के वीएफएक्स वाली फिल्मों के सामने ‘हनुमान अंश’ का कंटेंट भारी पड़ गया। फिल्म ने कम स्क्रीन्स पर सबसे ज्यादा ‘ऑक्यूपेंसी रेट’ और तीसरे हफ्ते में पहले हफ्ते से ज्यादा कमाई करने का एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।
यह फिल्म देखकर लग गया कि सिनेमा सिर्फ करोड़ों के बजट और वीएफएक्स के शोर से नहीं चलता। जब नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक सादगी, संकट मोचन की गहरी आस्था और शुद्ध भारतीय नैरेटिव दर्शकों के दिल को छूता है, तो पीआर एजेंसियां किनारे हो जाती हैं और जनता खुद फिल्म की प्रमोटर बन जाती है। कंटेंट और आस्था का संगम बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार ही होता है! भारत में तंत्र-मंत्र, बाधा मुक्ति और असाध्य रोगों के चमत्कारी इलाज को लेकर लोगों में हमेशा कौतूहल रहता है। जब इसे हनुमान भक्ति और उनकी शक्ति से जोड़ा गया, तो धार्मिक दर्शकों ने इसे सीधे अपनी आस्था से जोड़कर देखा। गहरी लोक-आस्था और ‘संकट मोचन’ का भाव इस फिल्म को ऊपर ले गया।
करोली सरकार के दरबार के वीडियो पहले से ही सोशल मीडिया पर वायरल रहते हैं। फॉलोअर्स ने फिल्म के क्लिप्स और संवादों को रील्स व शॉर्ट्स में फैलाकर इसे बिना बड़े बजट के भारी ऑर्गेनिक रीच दी। उसने मुझ जैसे दर्शकों में भी यह जानने की उत्सुकता पैदा की कि पर्दे पर बाबा की दुनिया को कैसे दिखाया गया है।
फिल्म के बारे में इतना ही कहूंगा कि यह फिल्म हनुमान भक्त नीम करोली बाबा के जीवन और उनके चमत्कारों पर बेहद सादगी से बनाई गई है। फिल्म दावा करती है कि अगर आप संकट में हों तो हनुमान चालीसा का पाठ संकट से बचाता है ! यही भावना करोड़ों लोगों की है।
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