अपने दम पर बच्चों को पाला और बॉलीवुड में शोहरत भी पाई, आज अपना जन्मदिन मना रहीं फरहान और जोया की माँ

साल 1991 में जब फ़िल्म लम्हे की कहानी पूरी हुई, तो हनी ईरानी बेहद घबराई हुई थीं।
निर्देशक यश चोपड़ा बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चले गए थे और हनी को लगा कि उनकी लिखी कहानी रिजेक्ट हो गई। वह रोने ही वाली थीं कि यश जी वापस आए और भावुक होकर बोले,
“तुमने इतनी खूबसूरत कहानी लिखी है कि मेरी आँखों में आँसू आ गए।”

यह किसी मँझे हुए लेखक की नहीं, बल्कि अपने बच्चों का पेट पालने के लिए घर-घर जाकर साड़ियाँ बेचने वाली एक माँ की पहली स्क्रिप्ट थी।

हनी ईरानी का जन्म 25 अगस्त 1955 को मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था.. उनकी बड़ी बहन डेज़ी ईरानी भी अपने समय की मशहूर बाल कलाकार थीं। घर में फिल्मी माहौल होने के कारण हनी ईरानी ने सिर्फ़ ढाई साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपना फ़िल्मी सफर शुरू किया था…उन्होंने संतान, तलाक, चिराग़ कहाँ रोशनी कहाँ जैसी फ़िल्मों में अभिनय किया…

ज़्यादातर फ़िल्मों में उनकी माँ का रोल उस जमाने की महान अभिनेत्री मीना कुमारी ने निभाया है. और हनी ईरानी का मानना था कि उनकी ये फ़िल्मी माँ उनकी अपनी सगी माँ से ज़्यादा उन्हें प्यार करती थी।
और मीना कुमारी भी उन्हें अपनी सगी बेटी मानती थीं..
बड़ी होने पर हनी ईरानी फ़िल्मों में सपोर्टिंग रोल निभाने लगी..
साल 1972 में आई फिल्म सीता और गीता के सेट पर उनकी मुलाकात जावेद अख्तर से हुई..
दरअसल इस फ़िल्म की कहानी मशहूर लेखक जोड़ी सलीम-जावेद ने लिखी थी।
जावेद अख्तर अक्सर सेट पर हनी को उनके डायलॉग्स समझाने आते थे।
बातों ही बातों में दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई और वो फिर रोज़ मिलने लगे और घंटों बातें करने लगे…
एक दिन ख़ाली समय में सब सेट पर ताश खेल रहे थे, जावेद अख़्तर लगातार पैसे हार रहे थे..
तब उन्होंने हनी से कहा कि तुम मेरे लिए एक पत्ता निकालो, अगर पत्ता अच्छा हुआ, तो मैं तुमसे शादी कर लूँगा..

हनी ने मुस्कुराते हुए एक पत्ता निकाला और किस्मत से जावेद अख्तर वह बाजी जीत गए। तब जावेद ने तुरंत सबके सामने हनी ईरानी से कहा, चलो चलो शादी करते हैं…

जब ताश के खेल में बात पक्की हो गई, तो जावेद अख्तर ने अपने जोड़ीदार और दोस्त सलीम ख़ान से गुजारिश की कि वे हनी ईरानी की माँ पेरिन ईरानी से शादी की बात करें। सलीम ख़ान, जावेद के दोस्त होने के साथ-साथ उनके पारिवारिक मित्र भी बन चुके थे।

सलीम ख़ान जब हनी की माँ के पास रिश्ता लेकर पहुँचे, तो उन्होंने हनी की माँ से कहा, “ये लड़का आपकी लड़की से शादी करना चाहता है, लेकिन उसके पास खुद का कोई घर नहीं है, वो शराब पीता है और ताश खेलता है।”

इस बात पर नाराज होने की बजाय हनी की माँ ने बड़ा ही मजेदार जवाब दिया।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, शराब मैं भी पीती हूँ और ताश मुझे भी पसंद है। शादी होने दो, लड़की खुद सबक सीख जाएगी…

आगे जाकर इस मजेदार कन्वर्सेशन से आईडिया लेकर सलीम-जावेद की जोड़ी ने शोले फ़िल्म का
ऐतिहासिक सीन लिखा था जिसमें जय अपने दोस्त वीरू का रिश्ता लेकर मौसी के पास गए थे..

फाइनली, 21 मार्च 1972 को हनी ईरानी और जावेद अख्तर ने एक बेहद निजी समारोह में शादी कर ली..

इधर हनी ईरानी शादी के बाद फिल्मी दुनिया छोड़ अपने घर परिवार को संवारने में व्यस्त हो गई, और उधर जावेद अख्तर सफलता की सीढ़ी चढ़ते चले गए.. और सफलता के पीक पर उन्होंने अपनी पत्नी जिसने उनके साथ मुफ़लिसी में दिन काटे, एक स्टोर रूम में रहके अपने पति की कामयाबी की दुआ माँगी, सबसे पहले उसे ही धोखा दिया, और एक्ट्रेस शबाना आज़मी के साथ नज़दीकियाँ बढ़ा ली…

जब हनी को इस बात का पता चला तो दोनों में बहुत झगड़े होने लगे..आख़िरकार रोज़ रोज़ के झगड़ों से तंग आकर हनी ने साल 1978 में अलग होने का फैसला किया और जावेद से कहा कि वह उसे छोड़कर शबाना के साथ चला जाए।

साल 1985 में दोनों का कानूनी रूप से तलाक हो गया।

जावेद अख्तर से अलग होने के बाद, हनी के ऊपर उनके बच्चों की जिम्मेदारी थी…
उन्होंने जावेद अख्तर से कोई Alimony नहीं मांगा क्योंकि उनका मानना था कि अगर प्यार ही खत्म हो गया है, तो पैसों के लिए रिश्ता क्यों रखना।

अपने बच्चों की परवरिश करने के लिए हनी ईरानी ने साड़ियों पर खुद हाथों से कढ़ाई का काम शुरू किया। वह घर-घर जाकर साड़ियां बेचती थीं।
लेकिन साथ ही उन्होंने छोटी कहानियां लिखना भी शुरू कर दिया था।

हनी ईरानी की किस्मत तब बदली जब महान निर्देशक यश चोपड़ा एक फिल्म बनाना चाहते थे.. वो हनी से मिले, उन्होंने हनी को चार लाइन दी..

“एक लड़का एक लड़की से प्यार करता है, लेकिन वह लड़की किसी और से शादी कर लेती है। बाद में वह लड़का अभी भी उस लड़की से प्यार करता है। अब तुम सोचो कि इस आइडिया के साथ आगे क्या किया जा सकता है।”

हनी ईरानी ने इन लाइन्स को एक बेहद गहरी और संवेदनशील प्रेम कहानी का रूप दिया। उन्होंने लगातार काम करके मात्र 15 दिनों में पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली। उन्होंने कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट डाला, जहाँ लड़के से बाद में उसी मृत लड़की की हमशक्ल बेटी को प्यार हो जाता है।

और जब ये कहानी उन्होंने यश चोपड़ा को सुनाई तो वो बिना कुछ कहे कमरे से बाहर चले गए..उनके इस तरह जाने से हनी को लगा कि शायद कहानी पसंद नहीं आई, वो रोने लगीं.. लेकिन थोड़ी देर बाद यश चोपड़ा वापस आए और उन्होंने कहा कि कहानी इतनी शानदार और इमोशनल थी कि वो भावुक हो गए थे..

उन्होंने तुरंत इस पर फ़िल्म लम्हें बनाने का फैसला कर लिया..
हालांकि साल 1991 में रिलीज के समय ये कहानी काफ़ी बोल्ड थी, जिसके कारण फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चली। लेकिन समय के साथ इसे बॉलीवुड की सर्वश्रेष्ठ कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिना गया।

अपनी इस पहली ही फ़िल्म के लिए हनी ईरानी को सर्वश्रेष्ठ कहानी का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला,
इसके बाद हनी ईरानी बॉलीवुड की स्थापित लेखिकाओं में गिनी जाने लगीं। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में लिखीं…

हनी ने एक सीरियल की स्क्रिप्ट भी यश चोपड़ा की पत्नी पाम चोपड़ा को दी थी, लेकिन यश चोपड़ा ने उस स्क्रिप्ट को सुनकर सीरियल बनाने की बजाय उस पर फ़िल्म आईना बनाई जो साल 1993 में रिलीज़ हुई थी..

इसके बाद उन्होंने यश चोपड़ा की फ़िल्म डर और दिलवाले दुल्हनियाँ ले जाएँगे की पटकथा भी लिखी, लेकिन जब उन्हें पटकथा लेखक का क्रेडिट यश चोपड़ा ने नहीं दिया तो हनी ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया…

इसके बाद साल 2001 में फ़िल्म क्या कहना के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, और फ़िल्म कहो ना प्यार है के लिए रवि कपूर के साथ सर्वश्रेष्ठ पटकथा का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता..

उन्होंने कई सुपरहिट फ़िल्मों जैसे परम्परा , सुहाग, और प्यार हो गया, जब प्यार किसी से होता है, कोई मिल गया, आवारापन आदि की पटकथा और कहानी लिखी…

आज हनी ईरानी फिल्म इंडस्ट्री में एक बेहद सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अकेले दम पर जिन बच्चों की परवरिश की, वे आज बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्माता हैं..फरहान अख्तर जो कि एक्टर भी हैं और जोया अख्तर मशहूर निर्देशक है..

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प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश