
दंतेवाडा़। बस्तर के बैलाडीला की पहाडि़यों से लौह अयस्क निकालकर एनएमडीसी (NMDC) सालाना करीब छह हजार करोड़ की कमाई करती है लेकिन लौह उत्खनन के बाद खदानों से निकलने वाला लाल जहर बैलाडीला क्षेत्र के गाँवों में पहाडो़ं और नदी-नालों में डम्प हो जाता है और इससे न सिर्फ जलश्रोत बर्बाद हो रहे हैं, बल्कि नदी-नाले सूख भी रहे हैं।
बैलाडीला की पहाडो़ं में लौह उत्खनन करने वाली और भारत की नौ रत्न कम्पनियों में से एक NMDC का प्रतिवर्ष सालाना मुनाफा अनुमानित छः हजार करोड़ रूपये से अधिक है। NMDC के बैलाडीला के पहाड़ों से लौह उत्तखनन के बाद निकलने वाला लाल जहर का अधिकांश हिस्सा पहाड़ों के पीछे डम्प कर दिया जाता है। इस लाल जहर के चलते पहाड़ के पीछे मौजूद दर्जनों नदी नाले प्रभावित और दूषित हो चुके हैं।
और यह लाल जहर अभिशाप की तरह दर्जनों गांव के हजारों एकड़ जमीन को प्रभावित कर चुका है। इलाके की नदियाँ लाल हो गई हैं। नदियों की मछलियां मर गई हैं। लाखों पेड़ सूख चुके हैं। खेत बंजर हो चुके हैं। इंसान और पशुओं की अकाल मृत्यु हो रही है। तस्वीर और वीडियो बैलाडीला पहाड़ के पीछे के गांव तमोरी की हैं।


