
सिर्फ 19 मिनट में निर्धारित कक्षा में स्थापित भी हो गया
ISRO ने गुरुवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। रात 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इसरो के लगभग 16,500 वैज्ञानिक, इंजीनियर और सहायक कर्मचारियों ने थकान, दबाव और अपेक्षाओं के बावजूद EOS-05 को करीब 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर महज 19 मिनट के भीतर यानि सुबह 3:14 बजे उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर भारत को अंतरिक्ष में रणनीतिक और तकनीकी विजय दिला दी। अब इसे अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचाया जाएगा, जो पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर है।


इस ऊंचाई से बड़े इलाकों की बार-बार तस्वीरें लेने की क्षमता रखने वाला यह भारत का पहला सैटेलाइट है। इससे भारत और आसपास के क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी।
यह सैटेलाइट देश की सीमाओं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों की निगरानी में भी अहम भूमिका निभा सकता है। इसके जरिए पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं समेत बड़े क्षेत्रों की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा इस सैटेलाइट से बाढ़, चक्रवात, भारी बारिश और जंगल की आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखने और उनके असर का तेजी से आकलन करने में भी मदद मिलेगी।
लॉन्च के करीब 19 मिनट बाद सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। अब इसे अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचाया जाएगा, जो पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से करीब 35,786 किलोमीटर ऊपर होती है। इस कक्षा में सैटेलाइट पृथ्वी के घूमने की गति के साथ तालमेल बनाए रखते हुए लगभग 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सैटेलाइट किसी बड़े क्षेत्र पर लंबे समय तक नजर रख सकता है। इसके मुकाबले LEO यानी लो-अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी के काफी करीब होती है, जहां सैटेलाइट तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं और किसी खास इलाके के ऊपर कम समय के लिए रहते हैं।
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर लगाए गए हैं। ये कैमरे अलग-अलग प्रकाश तरंगों में धरती की तस्वीरें लेते हैं। इससे सिर्फ सामान्य तस्वीरें ही नहीं, बल्कि जमीन, पानी, पेड़-पौधों और पर्यावरण में होने वाले बदलावों की भी जानकारी मिल सकेगी। इसके एक इमेजर का रिजॉल्यूशन करीब 42 मीटर प्रति पिक्सल है। यानी तस्वीर में एक पिक्सल जमीन के लगभग 42×42 मीटर क्षेत्र की जानकारी देता है। इस सैटेलाइट का मकसद छोटी वस्तुओं की बेहद बारीक तस्वीरें लेना नहीं है। इसकी असली ताकत बहुत बड़े इलाके की तस्वीरें लेना और उन्हें बार-बार अपडेट करना है।


