
खुशदीप सहगल, नई दिल्ली
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा 16 दिसंबर 2024 को फिलिस्तीन के लोगों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए ऐसे हैंडबैग के साथ संसद पहुंची जिस पर ‘फिलिस्तीन’ लिखा हुआ था. बी@जेपी सांसद संबित पात्रा ने तब कहा था कि गांधी परिवार हमेशा से ही तुष्टीकरण का बैग ढोता रहा है. अंधभक्तों ने भी इस बैग को लेकर काफ़ी हाय-तौबा मचाई थी…
नई दिल्ली में अब 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में जारी संयुक्त घोषणापत्र में 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु, स्वतंत्र और सक्षम फिलिस्तीन राज्य की मांग की गई है, जिसमें गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक शामिल हों तथा पूर्वी येरुशलम उसकी राजधानी हो. घोषणा-पत्र में ग़ज़ा और कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाकों की मानवीय स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई. इसमें ग़ज़ा में सीजफ़ायर बनाए रखने और बगैर किसी बाधा के मानवीय मदद पहुंचाने की अपील की गई. इसमें फ़लस्तीनियों को जबरन विस्थापित किए जाने का विरोध किया गया है…
तो 2 साल पहले प्रियंका गांधी वाड्रा के फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता जताने की इतनी आलोचना क्यों की गई थी? बकौल संबित पात्रा वो तुष्टिकरण का बैग ढोना था तो ये हमारी अध्यक्षता में ब्रिक्स का ये घोषणापत्र क्या है? क्या दो साल पहले इस्राइल और उसके शासकीय मुखिया नेतन्याहू के लिए जो मुहब्बत ठांठे मार रही थी, वो समुद्री झाग की तरह अब बैठ गई है. या घोषणापत्र में फिलिस्तीन के उल्लेख को लेकर व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की ही चली?…
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