
तिलक जी से एक साल पहले 1892 में पुणे में विराजित हुए थे पहली बार गणेश जी
शरद कोकास, दुर्ग
क्या आप जानते हैं? तिलक जी से पहले पुणे में किसने शुरू किया था सार्वजनिक गणेशोत्सव ?
हम सब जानते हैं कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने देश को एकजुट करने के लिए सार्वजनिक गणेशोत्सव को एक बड़ा जन-आंदोलन बनाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिलक जी से भी एक साल पहले, साल 1892 में पुणे में पहला सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाया जा चुका था?
यह क्रांतिकारी शुरुआत की थी स्वतंत्रता सेनानी और शाही चिकित्सक श्रीमंत भाऊसाहेब लक्ष्मण जावले (भाऊसाहेब रंगारी) ने!
ग्वालियर से मिली थी प्रेरणा: साल 1892 में पुणे के कृष्णजीपंत खासगीवाले ग्वालियर यात्रा पर गए थे, जहाँ उन्होंने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाते देखा। पुणे लौटकर जब उन्होंने यह बात भाऊसाहेब रंगारी को बताई, तो भाऊसाहेब ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए तुरंत बुद्धवार पेठ (पुणे) में पहली सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापित कर दी।
राक्षस का वध करते गणपति:भाऊसाहेब रंगारी द्वारा स्थापित की गई पहली मूर्ति मिट्टी की नहीं, बल्कि कागज की लुगदी और लकड़ी से बनी थी। इसमें भगवान गणेश को एक राक्षस (जो ब्रिटिश शासन का प्रतीक था) का वध करते हुए दिखाया गया था। यह मूर्ति आज भी सुरक्षित है।
लोकमान्य तिलक जी ने स्वयं 26 सितंबर 1893 को अपने समाचार पत्र ‘केसरी’ में भाऊसाहेब के इस प्रयास की जमकर तारीफ की थी और इसके बाद 1893 से तिलक जी ने इसे एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।इतिहास के इस सुनहरे पन्ने को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें!
Source: Official Archives of Shrimant Bhausaheb Rangari Ganpati Trust, Pune & ‘Kesari’ Newspaper Records (1893).#Ganeshotsav #HistoryOfPune #BhausahebRangari #LokmanyaTilak #IndianHistory #GanpatiBappaMorya #UnsungHeroes आप जानते हैं? तिलक जी से पहले पुणे में किसने शुरू किया था सार्वजनिक गणेशोत्सव ?
हम सब जानते हैं कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने देश को एकजुट करने के लिए सार्वजनिक गणेशोत्सव को एक बड़ा जन-आंदोलन बनाया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिलक जी से भी एक साल पहले, साल 1892 में पुणे में पहला सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाया जा चुका था?
यह क्रांतिकारी शुरुआत की थी स्वतंत्रता सेनानी और शाही चिकित्सक श्रीमंत भाऊसाहेब लक्ष्मण जावले (भाऊसाहेब रंगारी) ने!
ग्वालियर से मिली थी प्रेरणा: साल 1892 में पुणे के कृष्णजीपंत खासगीवाले ग्वालियर यात्रा पर गए थे, जहाँ उन्होंने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाते देखा। पुणे लौटकर जब उन्होंने यह बात भाऊसाहेब रंगारी को बताई, तो भाऊसाहेब ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए तुरंत बुद्धवार पेठ (पुणे) में पहली सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापित कर दी।
राक्षस का वध करते गणपति:भाऊसाहेब रंगारी द्वारा स्थापित की गई पहली मूर्ति मिट्टी की नहीं, बल्कि कागज की लुगदी और लकड़ी से बनी थी। इसमें भगवान गणेश को एक राक्षस (जो ब्रिटिश शासन का प्रतीक था) का वध करते हुए दिखाया गया था। यह मूर्ति आज भी सुरक्षित है।
लोकमान्य तिलक जी ने स्वयं 26 सितंबर 1893 को अपने समाचार पत्र ‘केसरी’ में भाऊसाहेब के इस प्रयास की जमकर तारीफ की थी और इसके बाद 1893 से तिलक जी ने इसे एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया।इतिहास के इस सुनहरे पन्ने को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें!
Source: Official Archives of Shrimant Bhausaheb Rangari Ganpati Trust, Pune & ‘Kesari’ Newspaper Records (1893).#Ganeshotsav #HistoryOfPune #BhausahebRangari #LokmanyaTilak #IndianHistory #GanpatiBappaMorya #UnsungHeroes


