‎सभी को घर का काम करना‎ ही चाहिए‎


मौलिकप्रभ जी का चातुर्मासिक प्रवचन
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‎राजनांदगांव। “अगर स्वस्थ रहना हैं तो हर व्यक्ति को घर का काम करना ही चाहिए। घर का काम करने से शरीर के अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मौलिकप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए।
‎मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्ल्भ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने फरमाया कि हम अक्सर अपने घर के कामों से बचते रहते हैं। नौकरों के जरिए गृह कार्य करवाते हैं जिसकी वजह से शरीर का व्यायाम नहीं हो पाता और हम नाना प्रकार के रोगों से घिर जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को घर का काम करना ही चाहिए जिससे कि वह रोगों से दूर रहे।
‎ मुनि श्री मौलिकप्रभ जी ने कहा कि हम शरीर का सौंदर्य बढ़ाने के लिए कॉस्मेटिक सामानों का खुलकर एवं बड़ी मात्रा में उपयोग करते हैं। जबकि कॉस्मेटिक पदार्थ में जीव अंश का खुलकर उपयोग होता है। बड़े पैमाने पर जीव हिंसा होती है और हम कॉस्मेटिक सामानों का बड़ी मात्रा में उपयोग करते हैं। अबोले जीवों की हत्या को देखकर ही मन सिहर उठता है तो फिर हम ऐसे कॉस्मेटिक सामानों का उपयोग कैसे कर सकते हैं?
‎ मुनिश्री ने कहा कि कम से कम कॉस्मेटिक सामानों का उपयोग करो और ज्यादा से ज्यादा घर कार्य करो। कॉस्मेटिक सामान हमारा क्षणिक सौंदर्य बढ़ाते हैं किंतु बाद में नुकसान भी पहुंचते हैं। बाहरी सौंदर्य से कुछ नहीं होता, भीतर का सौन्दर्य ही सबकुछ है, वह ऊर्जावान और बलिष्ठ बनाता है। घर का काम करोगे तो आप भीतर से मजबूत होगे। उन्होंने कहा ज्यादा से ज्यादा गृह कार्य करो और अपने को मजबूत रखो।