
मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और संस्कृति मंत्री ने पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ में लोककला ‘नाचा‘ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की 24 सितंबर को पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा‘ को पुनर्जीवित करने और उसे बचाए रखने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ’नाचा’ को एक नये मुकाम पर पहुंचाया। उन्होंने नाचा को सामाजिक कुरीतियों के प्रति जनचेतना जगाने के माध्यम के रूप में बखूबी उपयोग किया।साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने नाचा के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को जीवंत रखा और उसे संरक्षित करने के लिए आजीवन लगे रहे। राज्य सरकार द्वारा कला के ऐसे सच्चे साधक के सम्मान और नाचा कला को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ी लोककला के संरक्षण में दाऊ जी के अमूल्य योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आज भी उनका व्यक्तित्व और कृतित्व नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के माटी पुत्र, लोक कला नाचा के पितामह “दाऊ दुलार सिंह मंदराजी” की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
छत्तीसगढ़ी लोककला “नाचा” को नई पहचान दिलाने और हमारी सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने में दाऊ जी का योगदान अमूल्य है। उनके कार्य और योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दाऊ मंदराजी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और नाचा की परंपरा को समृद्ध करने में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि दाऊ दुलार सिंह मंदराजी ने नाचा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे छत्तीसगढ़ के जनजीवन, लोकभाषा, सामाजिक सरोकारों और सांस्कृतिक भावनाओं को अभिव्यक्त करने वाले सशक्त लोकमंच के रूप में विकसित किया। उनका पूरा जीवन लोककला और कलाकारों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कलाकारों को संगठित कर ‘रैली रिगनी साज’ नाचा दल बनाया, जो छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी है।
अग्रवाल ने कहा कि दाऊ मंदराजी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की सहजता, हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों को नाचा के माध्यम से प्रभावी अभिव्यक्ति दी। उनके प्रयासों से नाचा को गांवों की सीमाओं से आगे व्यापक पहचान मिली और अनेक प्रतिभाशाली लोक कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का मंच प्राप्त हुआ।


