
मुनि श्रेयांशप्रभ जी ने कहा- किसी की सफलता के पीछे उसके अतीत की मेहनत पर भी नजर डालें
राजनांदगांव। “किसी को आगे बढ़ने के लिए जोश एवं इच्छा की जरूरत होती है। इसी तरह किसी को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन की जरूरत होती है। हम लोगों की गलतियों को देखकर हंसते हैं। यही नहीं उसे प्रताड़ित भी करते हैं। हमें अपने व्यवहार में बदलाव लाना चाहिए।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
मुनि श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि हम उन लोगों में से है जो किसी को गिरते देख उसकी कमियों की हंसी उड़ाते हैं। उनकी गलतियों को सुधारना छोड़ हम उन पर हंसते हैं। उन्हें प्रोत्साहित करना छोड़ प्रताड़ित करते हैं। हमें व्यक्ति की जीत तो दिखती लेकिन उसके पीछे के संघर्ष को हम नहीं देखते। अतीत में उसने कितना मेहनत किया होगा, किसने उसका उत्साह बढ़ाया होगा जो आज वह इस मुकाम तक पहुंचा। किसी की जीत के पीछे उसका सपोर्टिंग सिस्टम होता है जो उसे गिरने नहीं देता।
मुनि श्री ने कहा कि इस दुनिया में चार तरह के लोग होते हैं:- पहले वह जो किसी को कुछ प्रयास करने नहीं देना चाहते , दूसरा वह जो सामने वाले को एक दो बार प्रयास करने देते हैं,तीसरा वह जो थोड़ा और ज्यादा प्रयास करने देना चाहते हैं और चौथा वह जो अंतिम चरण तक प्रयास करने देना चाहते है। अब आप तय कर लीजिए कि आप इनमें से कौन हैं। उन्होंने कहा कि सभी चाहते हैं कि हम आगे आगे भागें किंतु हमारे अंदर वह जोश होना चाहिए कि हम बात सकें। उन्होंने कहा कि हम सपोर्टिंग सिस्टम बने केकड़े की तरह एक दूसरे की टांग खींचने वाला न बने। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।


