नसबंदी ऑपरेशन फेल, महिला फिर हो गई गर्भवती, पहले ही दो बच्चे हैं

राजनांदगाँव मेडिकल कॉलेज के गायनिक डॉक्टरों की दबंगई, एबार्शन के बाद फिर नसबंदी कराने का दबाव

राजनांदगाँव। में गायनिक वार्ड के डॉक्टर दबंगई पर उतर आए हैं। स्थिति देखकर लगता है कि अब वार्ड में महिला डॉक्टरों को मरीज और मरीज के परिजनों से बात करने का तरीका सीखना पड़ेगा। ताजा मामला यह है कि दो बच्चों के बाद नसबंदी करा चुकी एक महिला का नसबंदी ऑपरेशन फेल हो गया और वो फिर से गर्भवती हो गई। अब शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के डॉक्टर महिला और उसके परिजनों को परेशान कर रहे हैं।

गायनिक वार्ड के डॉक्टर आये दिन मरीजों और मरीजों के परिजनों के साथ बदसलूकी करते नजर आते है। गर्भवती महिलाओं पर इच्छा विरुद्ध जबरदस्ती नसबन्दी का दबाव डाला जाता है। डॉक्टर नसबन्दी नहीं करवाने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने की धमकी देने से भी पीछे नही हटते हैं।

ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें बिजनापुर निवासी सुमन कुमार वर्मा ने बताया कि उसके पहले ही दो सन्तान हैं। दूसरी सन्तान प्राप्ति के बाद उसकी पत्नी का नसबन्दी कर दिया गया था, जो कि आम तौर पर दो सन्तानों के बाद डॉक्टर कर ही देते हैं, और जरूरी भी है, क्योकि आज महंगाई के दौर में दो से अधिक बच्चों की परवरिश काफी कष्ट दायक होती है। नसबन्दी के लिए डॉक्टरों को वेतन के अलावा अलग से शासन बोनस के रूप में राशि भी देती है। लेकिन इस मामले में पीड़ित की पत्नी का नसबन्दी ऑपरेशन फेल हो गया और पीड़ित की पत्नी ने फिर गर्भधारण कर लिया।

अब पीड़ित और बच्चा नही चाहता था, इसलिये वह शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में (DNC) एबॉर्शन करवाने पहुंचा जहां गायनिक वार्ड कि डॉक्टरों ने 5 माह की गर्भधारण कर चुकी महिला का गर्भपात करना जो कि काफी जटिल होता है, उसे करने के बाद पीड़ित को डरा धमकाकर उससे नसबन्दी के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। गांव के लोग डॉक्टरों की इस परिभाषा को नहीं समझ पाते और उस वक्त डॉक्टर की वह सब बातों पर अपनी सहमति दे देते हैं, जिसे वे स्वीकार भी नहीं करना चाहते हैं।

पीड़ित सुमन ने बताया कि एबॉर्शन की प्रक्रिया के बाद उनकी पत्नी बहुत कमजोर महसूस कर रही थी, और वे नही चाहते थे पुनः नसबन्दी करवाना, क्योंकि पहले का नसबन्दी ऑपरेशन फेल होने के चलते उस नसबन्दी की प्रक्रिया से वे डर गए थे। उन्होंने नसबन्दी करवाने से मना कर दिया। वार्ड की महिला डॉक्टरों ने पीड़ित को नसबन्दी के लिए डराना धमकाना शुरू कर दिया। मरीज को बिना नसबन्दी डिस्चार्ज देने से मना कर दिया। साथ ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने की बात भी कही।

पीड़ित किसी तरह हम तक पहुंचा। चूंकि गायनिक वार्ड की प्रभारी (HOD) प्रदेश से बाहर थी। ऐसे में हमने उनसे फोन के माध्यम से सम्पर्क स्थापित कर वस्तु स्थिति से अवगत करवाया। प्रभारी डॉक्टर मीना आर्मो के दखल के बाद मरीज को बिना नसबन्दी किये डिस्चार्ज दिया गया।

कमलेश सिमनकर, राजनांदगाँव