‎बुरे टाइम के बाद अच्छा टाइम जरूर आता है



‎जैन बगीचे में मुनि श्रेयांशप्रभ जी का चातुर्मासिक प्रवचन

‎राजनांदगांव। “बुरे समय के बाद अच्छा समय जरूर आता है। हमें सहनशक्ति होनी चाहिए ताकि हम बुरे समय का डटकर सामना करते हुए अच्छे समय का उपभोग कर सके।” उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज जैन बगीचा स्थित नये हाल में संवत्सरी पर्व के पांचवें दिन व्यक्त किए।
‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि हम अपने पापों को धोने के लिए मंदिर जाते हैं ताकि हमारे मन के पाप धुल जाए, हमारे भावों में शुद्धता आये। हमें हमारी गलती नहीं दिखती, उल्टे हम हमारी गलती बताने वालों के प्रति द्वेष पाल लेते हैं। यही बैर भाव हमारे पतन का कारण होता है। हमारी दुर्गति का कारण खुद के मन का क्रोध होता है जिसे हम नियंत्रित नहीं कर पाते। हमें अपने मन के क्रोध को नियंत्रित करना सीखना होगा तभी हम शांत रह पाएंगे।
‎ मुनिश्री ने कहा कि वैराग्य का भाव तो मन से निकलता है। एक बार यह भाव उत्पन्न हुआ तो फिर संसार का कोई भी भाव उसके ऊपर नहीं चढ़ सकता। कोई भी वस्तु उसे नहीं लुभा सकती और वह संयम पथ की ओर अग्रसर हो जाता है। उन्होंने कहा कि जहां विशेष लगाव होता है तो मन उसके आसपास ही घूमता रहता है और कर्म बंधन बांध लेता है। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में अक्सर स्त्रियां ही आगे होती है।
‎ मुनिश्री ने आज भगवान महावीर एवं भगवान आदिनाथ के विचारों को साझा किया। साथ ही उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ के जन्म का वृतांत सुनाया । उन्होंने भगवान नेमिनाथ सहित अन्य तीर्थंकरों के बारे में भी बताया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।