
बिजली विभाग ने कुर्सियों पर बैठे अपने ही मातहतों को पाठ पढ़ाकर, कर ली खानापूर्ति
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा बुधवार को एबिस ग्रीन होटल में आयोजित “विद्युत उपभोक्ता जागरूकता एवं शिकायत निवारण सेमिनार” महज एक औपचारिक कागजी खानापूर्ति साबित होकर रह गया। जिस आयोजन का ढिंढोरा उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, स्मार्ट मीटर की खूबियों और Tier-1 से लेकर विद्युत लोकपाल तक शिकायत निवारण प्रक्रिया समझाने के नाम पर पीटा गया, वहां मुख्य हितधारक यानी ‘आम उपभोक्ता’ ही नदारद रहे।
होटल के वातानुकूलित सभागार में लगी कुर्सियों पर आम जनता की जगह बिजली विभाग के ही अधिकारी-कर्मचारी विराजमान दिखे। CSERC के सदस्य, विद्युत लोकपाल, CGRF के अध्यक्ष और रायपुर से आए ईडी ओएंडएम स्तर के शीर्ष अधिकारी मंच से उपभोक्ताओं के अधिकारों और क्षतिपूर्ति के वैधानिक प्रावधानों का बखान करते रहे, लेकिन उनकी बातें सुनने के लिए पीड़ित और आम उपभोक्ता मौजूद ही
विद्युत मंडल ने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला से मीडिया जगत को भी दूर रखा। पत्रकारों को विशेष रूप से आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे विभाग की मंशा पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं को बिलिंग की बारीकियां समझाने सौर ऊर्जा और स्मार्ट मीटर की भ्रांतियां दूर करने के लिए तैयार की गई यह उपयोगी जानकारी आम जनता तक पहुंचने से पहले ही चारदीवारी में कैद होकर रह गई।
आयोजन की विडंबना और लचर व्यवस्था तब और उजागर हो गई, जब निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा करने वाले विभाग के इसी महत्व पूर्ण कार्यक्रम में 2 बार बिजली गुल हुई। बत्ती गुल होने से सभागार में कुछ समय के लिये व्यवधान उत्पन्न हुआ और अंधेरा छा गया, जिससे विभागीय दावों की पोल खुद– ब- खुद खुल गई।
विभाग ने मंच से यह दावा तो किया कि “जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता है”, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि जागरूकता का दायरा विभागीय कर्मचारियों की उपस्थिति तक सिमट गया। आम उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों से सीधे रूबरू कराने का यह सुनहरा अवसर लचर प्रबंधन और प्रचार-प्रसार के अभाव के चलते पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हुआ।
जितेंद्र जैन जीतू, राजनांदगाँव


