
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
सुपरस्टार बनने के पीछे किसी भी एक्टर की मेहनत के साथ-साथ उसकी किस्मत का भी हाथ होता है. फिल्म इंडस्ट्री में कितने ही ऐसे किरदार हैं जो पहले किसी और एक्टर के लिए लिखे गए लेकिन बाद में उन्हें किसी दूसरे एक्टर ने निभाया और उनकी किस्मत चमक उठी.
अनिल कपूर भी ऐसे ही एक्टर्स में से एक हैं जिनके करियर की पहली फिल्म उनके लिए नहीं लिखी गई थी लेकिन किस्मत उनका इंतजार कर रही थी और वो फिल्म थी साल 1983 में आई फिल्म वो 7 दिन जिसमें उनके साथ पद्मिनी कोल्हापुरे नज़र आई थीं।
इस फिल्म में अनिल कपूर ने प्रेम प्रताप पटियालेवाला का किरदार निभाया था.
और ये फिल्म अनिल कपूर के करियर की पहली बड़ी हिट फिल्म थी, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। लेकिन इस रोल को पाना उनके लिए आसान नहीं था।
फिल्म के निर्माता और अनिल कपूर के बड़े भाई, बोनी कपूर इस रोल के लिए अनिल को कास्ट नहीं करना चाहते थे। वो चाहते थे कि कोई स्थापित एक्टर ये रोल करे। इसके लिए उन्होंने संजीव कुमार या फिर नसरुद्दीन शाह के नाम सोच भी लिए थे..
उस समय अनिल कपूर इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे और उन्हें अपने ही भाई की फिल्म में लीड रोल पाने के लिए काफी प्रयास करने पड़े थे…
फ़िल्म के निर्देशक बापू के कहने और अनिल कपूर के स्क्रीन टेस्ट देने के बाद ही उन्हें इस रोल के लिए चुना गया।
यह फिल्म अनिल कपूर के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उन्हें बॉलीवुड में एक मुख्य अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
इस फिल्म के राइट्स खरीदना भी आसान नहीं था…
यह फिल्म तमिल सुपरहिट फिल्म अंधा 7 नातकल की रीमेक थी. जिसे साउथ के जाने माने डायरेक्टर के भाग्यराज ने बनाया था और वही इस फिल्म के हीरो भी थे.
जब बोनी और अनिल कपूर इसके राइट्स खरीदने चेन्नई गए, तो उनके पास पैसों की कमी पड़ गई. लेकिन किस्मत अच्छी थी उस समय चेन्नई में एक्टर संजीव कुमार अपनी किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, तब अभिनेता संजीव कुमार और शबाना आज़मी ने बड़ा दिल दिखाते हुए बोनी कपूर को कुछ लाख रुपये उधार दिए, जिससे फिल्म के राइट्स खरीदे जा सके..
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बोनी कपूर राइट्स मिलने के बाद फिल्म में मिथुन और पद्मिनी की जोड़ी को साथ लाना चाहते थे. लेकिन तब तक मिथुन चक्रवर्ती स्टार बन चुके थे और उनके पास कई फिल्में के ऑफर थे जिस वजह से वह काफी बिजी थे और डेट्स और फीस की प्रॉब्लम के चलते उन्होंने फिल्म को रिजेक्ट कर दिया.
लेकिन असली ट्विस्ट तो अब आना था..
जैसे ही बोनी कपूर ने घोषणा की कि वे पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ एक बिल्कुल नए लड़के अनिल कपूर को लीड रोल में में ले रहे हैं, तो फिल्म के कुछ बड़े फाइनेंसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने प्रोजेक्ट से अपने हाथ पीछे खींच लिए …
तब फिल्म की स्टार कास्ट कमजोर न पड़े और डिस्ट्रीब्यूटर्स का भरोसा बना रहे, इसके लिए बोनी कपूर ने नसीरुद्दीन शाह को डॉ. आनंद के किरदार के लिए साइन किया…चूँकि वो भी नए लड़के के साथ सपोर्टिंग रोल नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्हें मनाने के लिए बोनी कपूर ने उन्हें उनकी फीस से काफी ज्यादा पैसे दिए थे…
दिवंगत अभिनेता और निर्देशक सतीश कौशिक ने इसी फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा था. बोनी कपूर ने उन्हें एक छोटे से रोल के लिए 200 रुपये में साइन किया था, लेकिन अनिल कपूर के कहने पर बोनी ने उन्हें 300 रुपये और दिए दिए थे…
इस फिल्म की शूटिंग के दौरान इसका नाम संजोग रखा गया था. लेकिन रिलीज से ठीक कुछ समय पहले इसका नाम बदलकर वो सात दिन कर दिया गया.
चूँकि ये फ़िल्म बहुत पुरानी है तो क्या आपने देखी है..? कैसी लगी थी आपको ज़रूर बतायें ..?
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