पहले बॉलीवुड ब्रेक के 10 साल बाद मिला था पहला सोलो गाना

आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

अगर मैं आपसे पूछूं कि बॉलीवुड में वो कौन सा सिंगर है जिसकी आवाज सुनते ही चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ जाती है?
जो गाते समय भी मुस्कुराता रहता है?

जी हां, बिल्कुल सही पहचाना, वो हैं सबके चहेते और एवरग्रीन सिंगर शान यानी शांतनु मुखर्जी

आज यानी 30 सितंबर को शान का जन्मदिन है। हम सब उनके गानों तन्हा दिल, चाँद सिफारिश और जब से तेरे नैना को गुनगुनाते हुए बड़े हुए हैं।

लेकिन कहते हैं ना कि जो इंसान जितना हँसता-मुस्कुराता है उसके पीछे उतने ही संघर्ष छिपे होते हैं
तो चलिए, आज शान के जन्मदिन पर उनके जीवन के कुछ ऐसे अनसुने किस्से बताती हूँ, जो शायद ही आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे।

शान का जन्म 30 सितंबर 1972 को मुंबई के एक बंगाली संगीतकार परिवार में हुआ था, उनके पिता मानस मुखर्जी एक संगीत निर्देशक थे।

लेकिन जब शान 13 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया और उनके घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी खराब हो गई थी। ऐसे में घर चलाने के लिए उनकी मां सोनाली मुखर्जी ने गानों में कोरस गाना शुरू किया। शान और उनकी बहन सागरिका भी अपनी मां के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो जाया करते थे।

स्टूडियो में संगीतकारों को पता था कि ये बच्चे एक म्यूजिक फैमिली से हैं, तो इनमें सुरों की समझ तो जरूर होगी। तभी एक दिन एक विज्ञापन के लिए किसी बच्चे की आवाज की जरूरत पड़ी।
तब म्यूजिक डायरेक्टर ने शान की मां से पूछा कि क्या आपका बेटा गाएगा?
शान की मां ने तुरंत हां कह दी और इस तरह से महज 13-14 साल की उम्र में शान ने पहली बार किसी विज्ञापन के लिए जिंगल गाया था।

एक बार जब शान की आवाज लोगों को पसंद आई, तो उन्हें विज्ञापनों के लगातार ऑफर मिलने लगे। इसके बाद शान और उनकी बहन सागरिका ने मिलकर कई मशहूर ब्रांड्स जैसे रेक्सोना लिम्का और कई अन्य बड़े विज्ञापनों के लिए जिंगल्स रिकॉर्ड किए।

बचपन में विज्ञापनों से मिलने वाले इन पैसों से शान को दो बड़े फायदे हुए। पहला इससे उनके घर की आर्थिक स्थिति सुधरी और वो अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने लगे।
दूसरा स्टूडियो में घंटों बिताने के कारण उन्हें माइक के सामने गाने, सुरों को समझने और रिकॉर्डिंग टेक्नोलॉजी का बहुत कम उम्र में ही तगड़ा एक्सपीरियंस मिल गया।
जिससे जब वो बड़े हुए, तो माइक का डर उनके दिल से पूरी तरह निकल चुका था।

जिंगल्स गाने के साथ-साथ शान ने परिवार की मदद के लिए एक बुटीक में सेल्समैन की नौकरी की, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और यहाँ तक कि घर-घर जाकर केबल टीवी के कनेक्शन भी बेचे।

शान को बॉलीवुड में पहला बार गाने का मौका उनकी माँ सोनाली मुखर्जी और महान संगीतकार आर डी बर्मन की वजह से 17 साल की उम्र में मिल गया था।
दरअसल, एक दिन सोनाली मुखर्जी आर. डी. बर्मन के स्टूडियो में एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए गई थीं। वहाँ उन्होंने पंचम दा को बताया कि उनका बेटा शान और बेटी सागरिका भी बहुत अच्छा गाते हैं।

तब पंचम दा ने शान और सागरिका को ऑडिशन के लिए स्टूडियो बुलाया और उनकी आवाज़ सुनी, तो उन्हें उनकी आवाज़ बहुत पसंद आई।
उसी दौरान फिल्म परिंदा के गाने कितनी है प्यारी प्यारी दोस्ती हमारी…की रिकॉर्डिंग चल रही थी। इस गाने में बच्चों की आवाजों के कुछ लाइन्स की जरूरत थी।
पंचम दा ने तुरंत शान और उनकी बहन सागरिका को माइक के सामने खड़ा कर दिया और उनसे उस गाने की कुछ लाइनें गंववाईं।

और इस तरह अपनी मां की कोशिशों और पंचम दा की पारखी नजर की वजह से शान को अपनी जिंदगी का पहला बॉलीवुड ब्रेक मिला था।

लेकिन इस छोटे से ब्रेक के बाद भी शान को बतौर प्लेबैक सिंगर के तौर पर पहला बड़ा गाना मिलने में पूरे 10 साल लग गए।
बॉलीवुड में उनका कोई गॉडफादर नहीं था, वो कई स्टूडियोज के चक्कर काटते थे, लेकिन लोग उन्हें ये कहकर मना कर देते थे कि उनकी आवाज बहुत चॉकलेटी है और उस दौर के सीरियस हीरोज पर सूट नहीं करेगी।

जब बॉलीवुड में काम नहीं मिला, तब शान ने अपनी बहन सागरिका के साथ मिलकर प्राइवेट पॉप एल्बम्स बनाने शुरू किए।
यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

90 के दशक के में मशहूर म्यूजिक कंपनी Magnasound ने उन्हें साइन किया। उन्होंने आर. डी. बर्मन के गानों का एक रीमिक्स एल्बम Roop Inka Mastana निकाला, जो काफी पसंद किया गया।
इसके बाद भाई-बहन की इस जोड़ी ने अपना पहला ओरिजिनल पॉप एल्बम Naujawan रिलीज किया। यह एल्बम सुपरहिट रहा।

कुछ समय साथ काम करने के बाद, दोनों भाई-बहन ने तय किया कि वे अपने सोलो करियर पर ध्यान देंगे। इसके बाद सागरिका ने अपनी राह चुनी और शान ने साल 2000 में तन्हा दिल एल्बम रिलीज किया, जिसने उन्हें पॉप म्यूजिक का बेताज बादशाह बना दिया।

उस समय कॉलेज में पढ़ने वाले हर युवा के हाथ में गिटार और जुबां पर तन्हा दिल हुआ करता था।
जिसे देखकर बॉलीवुड के डायरेक्टर्स समझ गए कि देश का यूथ शान की आवाज का दीवाना है, और फिर उनके लिए बॉलीवुड के रास्ते हमेशा के लिए खुल गए।

और बतौर प्लेबैक सिंगर शान को बड़ा ब्रेक साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्यार में कभी कभी’ से मिला। इस फिल्म में उन्होंने दो गाने गाए थे, लेकिन एक गाने ने रातों-रात उनका करियर बदल दिया और वो गाना था..

मुसू मुसू हासी देउ मलाई.. ये गाना रिलीज होते ही युवाओं के बीच जबरदस्त हिट हो गया। इस गाने की ताजगी और शान की मुस्कुराती हुई आवाज ने लोगों का दिल जीत लिया।

इसी फिल्म का एक और रोमांटिक गाना वो पहली बार भी शान ने गाया था, जो आज भी सदाबहार गानों में गिना जाता है।

इसके बाद शान ने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में अपनी आवाज दी है और 2000 के दशक में वह रोमांस और यूथफुल गानों की पहली पसंद बन गए…

शान ने रियलिटी शो जैसे Sa Re Ga Ma Pa और Star Voice of India को भी होस्ट किया और उन्हें “Chand Sifarish” और “Jab Se Tere Naina” गानों के लिए Filmfare Best Male Playback Singer Award से भी नवाजा जा चुका है।

शान ने अपनी गर्लफ्रेंड राधिका से साल 2000 में शादी की थी,
वो अपनी पत्नी राधिका से पहली बार मुंबई के एक क्लब में मिले थे, वहाँ बैकग्राउंड में अकबर मेरा नाम गाना बज रहा था, और राधिका को लगा कि ये गाना उनके पीछे खड़े शान ने ही डेडिकेट किया है। इसलिए वह शान को ही अकबर समझने लगी थीं।
जब इसी कन्फ्यूजन में बातचीत शुरू हुई, तो शर्मीले स्वभाव के शान नर्वस हो गए., और शान ने घबराहट में मजाक में राधिका को आंटी कह दिया, जिस पर राधिका ने भी तुरंत पलटकर उन्हें अंकल बोल दिया।

जब शान पहली बार राधिका के माता-पिता से मिलने गए, तो उन्होंने एक चमकीली सिल्वर पैंट पहन रखी थी।
उन्हें देखकर राधिका के पिता ने धीरे से अपनी बेटी से पूछा था, “क्या तुम किसी सर्कस के कलाकार से शादी करने जा रही हो?”
हालांकि, शान ने अपनी जादुई मुस्कान से सबका दिल जीत लिया।

गॉल्डन वॉइस ऑफ इंडिया शान को जन्मदिन की शुभकामनाएं!

अब आप बताइए कि पहली बार आपने शान का कौन सा गाना सुना था..?
और कौन सा फेवरेट है..?

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