
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश
बॉलीवुड में कुछ ऐसे निर्देशक हैं जिनकी अपनी एक अलग पहचान है। राकेश रोशन भी उन्हीं में से एक हैं…उनकी फ़िल्मों का नाम आते ही एक चीज ऐसी है, जिसे शायद ही कोई भूल सकता है और वो है उनकी फिल्मों के नाम का K कनेक्शन..
खुदगर्ज, खून भरी मांग, किशन कन्हैया, किंग अंकल, करण अर्जुन, कोयला,,……
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर राकेश रोशन ने अपनी फिल्मों के नाम K से शुरू क्यों किए..
दरअसल इसके पीछे उनके एक प्रशंसक का लिखा हुआ खत था…और दिलचस्प बात ये है कि राकेश रोशन को जब वो ख़त मिला था तब उन्होंने उस खत को गंभीरता से लिया ही नहीं था।
1970 में अपना फिल्मी सफर शुरू करने वाले राकेश रोशन दिखने में बेहद हैंडसम थे, लेकिन बतौर सोलो हीरो उनका सिक्का बॉक्स ऑफिस पर कभी नहीं चला। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में लगभग 84 फ़िल्मों में काम किया, और ज्यादातर फिल्मों में उन्हें सहायक या सेकंड लीड भूमिकाएं ही मिलीं।
लोग उन्हें सपोर्टिंग एक्टर या फ्लॉप हीरो कहने लगे थे।
इसके बाद वो फ़िल्म डायरेक्शन और प्रोडक्शन में की लाइन में आ गए.. कैमरे के पीछे रहके एक्शन बोलने लगे…
राकेश रोशन ने बतौर निर्माता अपनी पहली फिल्म 1980 में आप के दीवाने बनाई थी..इसके बाद इसके बाद 1982 में कामचोर बनाई जो कि बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही..
इसके बाद जब वो 1984 में अपनी फिल्म जाग उठा इंसान बना रहे थे तब एक दिन उनके ऑफिस में एक फैन का खत आया। उस खत में लिखा था कि
आप ध्यान दीजिए, जब आपने कामचोर बनाई थी, तो वो सुपरहिट रही थी। आपकी फिल्मों के नाम अगर K अक्षर से शुरू हों, जैसे खट्टा मीठा, खूबसूरत, खानदान तो वे आपके लिए बहुत Lucky साबित होंगे।
तब राकेश रोशन ने इस ख़त को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और बात आई गई हो गई..
फिर 1986 में भगवान दादा बनाई। ये दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गईं, जिससे राकेश रोशन काफी कर्ज में डूब गए और डिप्रेशन में आ गए..
कुछ दिनों बाद राकेश रोशन ने बतौर डायरेक्टर अपनी अगली फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे..जब नाम की बारी आई तो बाय चांस उन्होंने उस फिल्म फिल्म का नाम खुदगर्ज रख दिया
और जब 31 जुलाई 1987 को राकेश रोशन के निर्देशन में बनी पहली फिल्म खुदगर्ज रिलीज हुई, तो उसने बॉक्स ऑफिस हिला दिया..
इस फ़िल्म को बनाने से पहले राकेश रोशन करो या मरो वाली स्थिति में थे, क्योंकि उन्होंने अपना सब कुछ इस फ़िल्म के लिए दांव पर लगा दिया था, लेकिन इस फ़िल्म के रिस्पांस ने उनकी पूरी ज़िंदगी बदल दी…
फ़िल्म का म्यूजिक राकेश रोशन के भाई राजेश रोशन ने तैयार किया है,
इस फिल्म का गाना आपके आ जाने से…जिसमें गोविंदा और नीलम ने डांस किया था उस साल का सबसे बड़ा एंथम बन गया।
रेडियो, शादियों और हर गली-मोहल्ले में सिर्फ यही गाना बजता था।
ढाई करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग दस करोड़ रुपए कमाए थे, उस साल हुकूमत और मिस्टर इंडिया जैसी बड़ी फिल्में भी रिलीज हुई थी लेकिन इसके बावजूद ये फ़िल्म सिनेमाघरों में 25 हफ्तों से ज़्यादा चली थी..
आपने एक बात नोटिस की होगी कि राकेश रोशन हमेशा शेव्ड क्लीन यानी गंजे रहते हैं,
दरअसल खुदगर्ज़ की रिलीज़ से पहले उन्होंने मन्नत मांगी थी कि अगर फिल्म हिट हो गई, तो वे अपना सिर मुंडवा लेंगे और फिर कभी बाल नहीं उगाएंगे। फिल्म सुपरहिट रही और उन्होंने अपनी मन्नत पूरी की।
फ़िल्म सुपरहिट होने के बाद राकेश रोशन के पास उस फैन का ख़त दोबारा आया और कहा,
“देखा, मैंने कहा था ना कि आपकी K वाली फ़िल्में हिट होंगी।”
यहीं से राकेश रोशन का K अक्षर पर भरोसा और मजबूत हो गया।
इसके बाद वो उन्होंने खून भरी मांग, किशन कन्हैया, किंग अंकल, करण अर्जुन, कोयला, कहो ना… प्यार है, कोई… मिल गया, कृष सीरीज जैसी बैक-टू-बैक सुपरहिट फिल्में अपने लकी अल्फाबेट K से दीं..
साल 2000 में राकेश रोशन ने अपने बेटे ऋतिक रोशन को फ़िल्म कहो ना… प्यार है से बॉलीवुड में लांच किया…
राकेश रोशन शुरुआत में ऋतिक रोशन को सीधे हीरो के तौर पर लॉन्च नहीं करना चाहते थे। वे चाहते थे कि ऋतिक पहले फिल्म मेकिंग की बारीकियां सीखें।
यही वजह थी कि ऋतिक रोशन ने अपने पिता के साथ करण अर्जुन और कोयला जैसी बड़ी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया, बाद में, राकेश रोशन ने उन्हें बॉलीवुड में डेब्यू करवाया, और ऋतिक रोशन की पहली ही फ़िल्म कहो ना प्यार है ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
तो रोशन परिवार की खुशियों को अंडरवर्ल्ड की नजर लग गई।
मुंबई अंडरवर्ल्ड ने राकेश रोशन से इस फिल्म के मुनाफे में एक मोटी हिस्सेदारी मांगी, लेकिन राकेश रोशन ने झुकने से इनकार कर दिया, तो 21 जनवरी 2000 को सांताक्रुज में उनके ऑफिस के बाहर दो शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं।
एक गोली उनकी छाती और दूसरी हाथ में लगी। लेकिन वे इस जानलेवा हमले से सुरक्षित बच गए।
मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं..
साल 2018 में राकेश रोशन को गले का कैंसर का पता चला था। उन्होंने बेहद बहादुरी से इस बीमारी का सामना किया और सर्जरी व इलाज के बाद वे पूरी तरह ठीक हो गए। आज भी वे अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखते हैं।
आज 6 सितंबर को राकेश रोशन 77 साल के हो गए हैं।
उनका जन्म 6 सितंबर 1949 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता प्रसिद्ध संगीतकार रोशन लाल नागरथ थे और उनके भाई राजेश रोशन बॉलीवुड के जाने-माने संगीतकार हैं।
एक अभिनेता के तौर पर शुरुआत करने वाला यह शख्स आगे चलकर निर्माता और निर्देशक बना।
फिल्मों में खुद हीरो बनकर वह वो मुकाम हासिल नहीं कर पाए जिसकी शायद उन्हें उम्मीद रही होगी, लेकिन उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर इतिहास रच दिया…
और शायद यही उनकी सबसे खास बात है..क्योंकि हर कोई हर चीज़ के लिए नहीं बना होता.. जो समय रहते अपनी प्रतिभा पहचान ले वो एक दिन इतिहास जरूर बनाता है..
राकेश रोशन को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
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