ऋषि कपूर का स्थायी घोस्ट वॉइस बनना चाहते थे शैलेन्द्र सिंह

आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

शैलेंद्र सिंह और ऋषि कपूर की दोस्ती बॉलीवुड की उन चुनिंदा जोड़ियों में से एक थी जहाँ एक पर्दे पर जीता था और दूसरा अपनी आवाज़ से उसमें जान फूंकता था।
शैलेंद्र सिंह की आवाज़ को आज भी ऋषि कपूर की पहली ऑन-स्क्रीन आवाज़ के रूप में याद किया जाता है।

ऋषि कपूर और शैलेंद्र सिंह की उम्र में सिर्फ एक महीने का अंतर था। ऋषि कपूर का जन्म 4 सितंबर 1952 को हुआ था और शैलेंद्र सिंह का ठीक एक महीने बाद 4 अक्टूबर 1952 को।

आमतौर पर लोग मानते हैं कि शैलेंद्र सिंह संगीत की दुनिया में ही नाम कमाने मुंबई आए थे, लेकिन सच इसके ठीक उलट है।
दरअसल, जाने-माने निर्देशक लेख टंडन उन्हें अपनी फिल्म में बतौर मुख्य हीरो लॉन्च करना चाहते थे और उन्होंने ही शैलेंद्र को एक्टिंग कोर्स करने के लिए एफटीआईआई में एक्टिंग सीखने की सलाह दी थी।

लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

जब शैलेंद्र सिंह पुणे FTII में एक्टिंग की पढ़ाई कर रहे थे। उसी समय राज कपूर अपनी फिल्म बॉबी बना रहे थे, तब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल चाहते थे कि ऋषि कपूर के गानों के लिए महान गायक मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ का इस्तेमाल किया जाए। लेकिन राज कपूर का मानना था कि जिस तरह स्क्रीन पर एक नया लड़का आ रहा है, उसी तरह प्लेबैक सिंगिंग में भी एक बिल्कुल नई और फ्रेश आवाज़ होनी चाहिए।

तब राज कपूर साहब के एक पारिवारिक परिचित साठे साहब ने उन्हें बताया कि शैलेंद्र बहुत अच्छा गाते हैं।
इसके बाद शैलेंद्र सिंह को राज कपूर साहब ने अपनी आवाज़ का ऑडिशन देने के लिए आरके स्टूडियो बुलाया। वहाँ उन्होंने राज कपूर के सामने कुछ गज़लें गाईं, जो उन्हें बेहद पसंद आईं और इसी मुलाकात से उन्हें फिल्म बॉबी में पहला ब्रेक मिला

शैलेंद्र सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वे आरके स्टूडियो में गज़लें गा रहे थे तब एक गोरा-चिट्टा लड़का वहाँ चुपचाप गाना सुन रहा था। रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद उसने खुद आकर परिचय दिया था कि वह ऋषि कपूर है। उम्र एक जैसी होने के कारण दोनों में तुरंत ही गहरी दोस्ती हो गई थी जो जिंदगी भर कायम रही।

शैलेंद्र सिंह का एक बड़ा सपना था कि वे ऋषि कपूर की स्थायी घोस्ट वॉइस बनें। वे चाहते थे कि जैसे मुकेश साहब की आवाज़ राज कपूर की पहचान बन चुकी थी, वैसे ही लोग उनकी आवाज़ सुनते ही समझ जाएं कि स्क्रीन पर ऋषि कपूर ही होंगे।

ऋषि कपूर को भी शैलेंद्र की आवाज़ पर पूरा भरोसा था और वे निर्माताओं से हमेशा शैलेंद्र के नाम की सिफारिश करते थे।

लेकिन बाद में फिल्म इंडस्ट्री के समीकरण बदले, और किशोर कुमार व मोहम्मद रफ़ी साहब को ऋषि कपूर के बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे, जिससे शैलेंद्र का यह सपना पूरी तरह पूरा न हो सका।

फिर भी दोनों ने मिलकर झूठ बोले कौवा काटे, हम ने तुम को देखा, और सालों बाद जाने दो ना जैसे कई यादगार गाने दिए।

90 के दशक की शुरुआत में शैलेंद्र सिंह के करियर को सबसे बड़ा झटका संगीत की वजह से नहीं, बल्कि एक झूठी अफवाह की वजह से लगा।

90 के दशक तक आते-आते शैलेंद्र सिंह ने खुद को फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध से पूरी तरह दूर कर लिया था।

लेकिन सालों बाद 2009 में आई फिल्म लव आज कल में जब बॉबी फिल्म के मशहूर गाने मैं शायर तो नहीं का रीमेक इस्तेमाल किया जा रहा था, तब ऋषि कपूर ने खुद उनसे खास गुजारिश की कि इस रीमेक में वे ही अपनी आवाज दें।
तब ऋषि कपूर के कहने पर उन्होंने सालों बाद दोबारा माइक संभाला…और गाया

मैं शायर तो नहीं…मगर ए हसीन जब से देखा मैंने तुझको, मुझको शायरी आ गई…

साल 2020 में जब ऋषि कपूर का निधन हुआ, तो शैलेंद्र सिंह बुरी तरह टूट गए थे। तब उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा था

“मैं अपनी पुरानी शोहरत या अतीत के बारे में ज़्यादा बात नहीं करता। लेकिन जब मेरा दोस्त चिंटू इस दुनिया से गया, तो मुझे लगा कि मेरे जीवन का वो सबसे खूबसूरत और सुनहरा दौर हमेशा के लिए समाप्त हो गया, जब हम दोनों ने मिलकर अपनी कला से पूरी दुनिया को चकाचौंध कर दिया था।”

सालों तक फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध से दूर रहने के बाद, शैलेंद्र सिंह अब मुंबई में रहते हैं और वहां आने वाले नए व उभरते हुए कलाकारों को अभिनय और कला की ट्रेनिंग देते हैं।

शैलेंद्र सिंह को जन्मदिन की शुभकामनाएँ

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