गलतफहमी की वजह से ही हम अपनों को खो देते हैं

मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा- ‎हमारी अनावश्यक सोच की वजह से हम मन में सामने वाले की गलत तस्वीर बना लेते हैं

राजनांदगाँव। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि हमें गलतफहमी की वजह से अपने को खोना पड़ जाता है। इससे मन में द्वेष उत्पन्न होता है और हमारी साधना में रुकावट आती है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि हम गलतफहमी को मन से निकाल दें और सामने वाले से बात कर गलतफहमी दूर कर लें।
‎जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में श्रेयांश मुनि ने  कहा कि ज्यादातर गलतफहमी हमारी सोच और सुनी सुनाई बातों की वजह से होती है। हम सामने वाले की गलत तस्वीर मन में बना लेते हैं। किसी भी तथ्य को जाने बिना और जांचे बिना हम निष्कर्ष निकाल लेते हैं, यही गलतफहमी उत्पन्न होने का मुख्य कारण है। गलतफहमी की 99 प्रतिशत घटनाएं हमारी कल्पनाओं की वजह से होती है।
‎मुनि श्री श्रेयांशप्रभ जी ने फरमाया कि हमारे व्यवहार का असर हमारे मन में होता है। हम सामने वाले के प्रति अपने मन में जल्दी ही भाव बना लेते हैं। यहां तक कि किसी दूसरे के व्यवहार को देखकर हम तीसरे के लिए भी विचार कर लेते हैं और यहीं से गलतफहमी उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि गलतफहमी की वजह से मन में हलचल मच जाती है।गलतफहमी हुई है तो सामने वाले से बात कर इसका इलाज करें और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगे।अपनी गलती के लिए क्षमा मांगना भी बड़ी बात है।
‎श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि गलतफहमी दूर होने से मन साफ होता है, नहीं तो सारा जीवन हम गलतफहमी ही पाले रहते हैं।गलतफहमी को कभी मन में मत रहने दो। विचारों को विराम दो और सामने वालों के बारे में सोचना छोड़ दो। सामने वाले का विचार करते-करते हम खुद को भी खो देते हैं और सामने वाले को भी खो देते हैं। मन का कषाय जब तक दूर नहीं होगा तब तक हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे, इसलिए गलतफहमी को दूर करो। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।