नाबालिग मामलों में खाकी का दोहरा चरित्र

गैंदाटोला में लापरवाही पर सस्पेंशन, कृष्णा हॉस्पिटल के प्रसव मामले में डॉक्टर पर चुप्पी क्यों?

जितेंद्र जैन जीतू

राजनांदगांव। जिले में नाबालिगों से जुड़े संवेदनशील अपराधों की जांच में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ गैंदाटोला थाना क्षेत्र में नाबालिग से जुड़े अपराध में त्वरित कार्रवाई न करने पर एसपी अंकिता शर्मा ने थाना प्रभारी और एएसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है, तो वहीं दूसरी ओर शहर के चर्चित कृष्णा हॉस्पिटल में नाबालिग के प्रसव मामले में पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी ने निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

जनवरी माह में कृष्णा हॉस्पिटल में एक नाबालिग बालिका के अवैध प्रसव और गर्भपात/डिलिवरी के संवेदनशील मामले का खुलासा हुआ था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। कानूनी और चिकित्सकीय नियमों के तहत नाबालिग के प्रसव की सूचना तत्काल पुलिस और बाल कल्याण समिति को देना अनिवार्य होता है। इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम भूमिका उस डॉक्टर की थी जिसने यह प्रसव संपन्न कराया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने प्रसव कराने वाले डॉक्टर (महिला या पुरुष) को जांच के दायरे से ही बाहर रखा।

मामले में जांच अधिकारी द्वारा मुख्य आरोपी डॉक्टर को बचाने के आरोप लग रहे हैं। एसपी को इस मामले में जांच अधिकारी की कथित लापरवाही और डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करने के संबंध में शिकायत पत्र सौंपे महीनों बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कानून सबके लिए समान है, तो एक मामले में थानेदार पर फौरी कार्रवाई और दूसरे मामले में जांच अधिकारी की स्पष्ट ढिलाई पर चुप्पी क्यों?

पोक्सो एक्ट और मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर नाबालिग का प्रसव कराने वाले डॉक्टर को अब तक आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? क्या सफेदपोश डॉक्टर को बचाने के लिए पुलिस पर किसी रसूखदार का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव है? 10 सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्य चिकित्सकीय साक्ष्य और कर्ताधर्ता को अनदेखा करना क्या जांच अधिकारी की सीधी मिलीभगत की ओर इशारा नहीं करता? नाबालिगों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर कानून बेहद सख्त है, लेकिन राजनांदगांव पुलिस के इस दोहरे रवैये से आम जनता और सामाजिक संगठनों में रोष पनप रहा है। अब देखना यह होगा कि गैंदाटोला मामले में सख्त तेवर दिखाने वाली पुलिस कप्तान क्या कृष्णा हॉस्पिटल के इस बहुचर्चित मामले में भी निष्पक्ष जांच बैठाकर मुख्य आरोपी डॉक्टर पर कानूनी शिकंजा कसती हैं या यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाएगा।