
रूचिर गर्ग, रायपुर
मुद्दा सिर्फ पेपर लीक ही नहीं है!
यह पत्रकार बनने का सपना लिए गांव से आई एक बच्ची की कॉपी है।
यह बच्ची रायपुर के एक निजी कॉलेज में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही है।
पापा का सपना है कि बेटी पत्रकार बने।
पापा मेहनत करते हैं। बेटी उनकी मेहनत का सम्मान करती है।
पढ़ना चाहती है। पत्रकारिता सीखना चाहती है।
गांव से शहर आकर निजी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है।
लेकिन इस देश के आम पत्रकारिता के विश्वविद्यालय या कॉलेज/विभाग, खासतौर पर निजी संस्थान क्या पढ़ा रहे हैं, क्या सिखा रहे हैं यह इस कॉपी को देखकर समझा जा सकता है।
कोई संस्थान इसकी चिंता भी नहीं करना चाहता।
अगर निजी हैं तो उन्हें सिर्फ फीस से मतलब है और अगर सरकारी हैं तो दफ्तर की रोज की राजनीति और महीने का वेतन – बस चिंता खत्म!
जेन–अल्फ़ा से लेकर जेन–ज़ी तक की कुंठा को क्या यह देश समझने को तैयार है?
जब उस बच्ची को हकीकत समझाई गई तो यह मान लीजिए कि उसकी मायूसी से उसके कॉलेज को कोई लेना–देना नहीं होगा!
इंतजार कीजिए उस दिन का जब ये पीढ़ियां बगावत करके ऐसी शिक्षा व्यवस्था, इसे पालने वाली सरकारों और ऐसे संस्थानों पर कालिख पोतेंगी!


