पाइपलाइन के लिए खुदाई के बाद छोडे़ गए गड्ढे हो रहे जानलेवा

बालोद, दल्ली, धमतरी और कांकेर मार्ग का मुख्य रास्ता बना जानलेवा, भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ा खतरे का दायरा

करोड़ों की लागत से बनी सड़क को चंद महीनों में किया छलनी, निगम की अदूरदर्शी कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल

1राजनांदगाँव। शहर के महत्वपूर्ण नंदई से मोहरा मार्ग इन दिनों विकास के नाम पर हो रही भारी मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ गया है। नगर निगम द्वारा पाइपलाइन विस्तार के नाम पर सड़क की ऐसी दुर्गति की गई है कि अब यह मार्ग वाहन चालकों के लिए किसी खतरे के कुएं से कम नहीं है। काम पूरा होने के बाद सड़क को उसकी मूल स्थिति में न लौटाए जाने के कारण यहां हर वक्त बड़े हादसे का अंदेशा बना हुआ है।

सबसे गंभीर बात यह है कि इसी मार्ग से बालोद, दल्लीराजहरा, धमतरी और कांकेर की ओर प्रतिदिन दर्जनों यात्री बसें और भारी मालवाहक वाहन गुजरते हैं, जिससे स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है।

नंदई से मोहरा तक लगभग 2 से 3 किलोमीटर के लंबे हिस्से में सड़क की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई गहरी खुदाई के बाद मिट्टी और मलबे को यूं ही खुला छोड़ दिया गया है। हालिया बारिश के चलते यह पूरी मिट्टी कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुकी है, जिससे सड़क बेहद संकरी और फिसलन भरी हो गई है।
इस मार्ग से रोजाना निकलने वाले भारी मालवाहकों और यात्री बसों के भारी वजन के कारण सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। स्थिति यह है कि दोपहिया वाहन चालक और स्कूली बच्चे रोजाना यहां फिसलकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें अब तक नहीं खुली हैं।

स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का आक्रोश फूट पड़ा है। उनका कहना है कि जिस सड़क के निर्माण में जनता के खून-पसीने की कमाई (करोड़ों रुपये की लागत) का उपयोग किया गया था, उसे बिना किसी सोची-समझी योजना के चंद महीनों में खोदकर बर्बाद कर दिया गया।
अन्तर-जिला यातायात से जुड़े इस प्रमुख मार्ग पर भारी वाहनों के लगातार दबाव के चलते सड़क टूटने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। सवाल यह उठता है कि जब इस रोड का निर्माण किया गया था, तब क्या नगर निगम और अन्य विभागों के बीच आपसी तालमेल का कोई नामो-निशान नहीं था? आखिर जनता की गाढ़ी कमाई से बनी पक्की सड़कों को इस तरह खंडहर में क्यों तब्दील किया जा रहा है?

क्षेत्रीय जनता और राहगीरों में नगर निगम की इस लचर कार्यशैली को लेकर भारी गुस्सा है। काम खत्म होने के बाद भी सड़कों की सुध न लेना और अधूरे निर्माण को जस का तस छोड़ देना निगम के निकम्मेपन को उजागर करता है। लगता है कि नगर निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी इस अत्यंत व्यस्त मार्ग की समस्या पर भी पर्दा डाला जा रहा है।
क्षेत्र के नागरिकों और जागरूक जनों ने जिला प्रशासन और नगर निगम आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मांग की गई है कि नंदई-मोहारा रोड की इस बदहाली को तुरंत सुधारा जाए, सड़क पर फैले कीचड़ को साफ कर भारी वाहनों व बसों के आवागमन को सुरक्षित बनाया जाए तथा सड़क का तत्काल डामरीकरण कर इसे पूर्ववत स्थिति में लाया जाए।
यदि समय रहते प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो आक्रोशित जनता और परिवहन संघ उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।