
1960 और 70 के दशक की खूबसूरत और हसीन एक्ट्रेस विमी ने अपनी पहली ही फिल्म से वो मुकाम हासिल कर लिया था जिसे पाने में लोगों को सालों लग जाते हैं, लेकिन उनका अंत इतना दर्दनाक था कि सुनकर रूह कांप जाती है।
आज एक्ट्रेस विमी की डेथ एनिवर्सरी है, आइए जानते हैं इस मशहूर एक्ट्रेस की पूरी कहानी..
विमी का जन्म 1943 में पंजाब के जालंधर के एक बेहद अमीर और संभ्रांत पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। उनका असली नाम विमलेश कौर वधावन था। बचपन से ही उन्हें कला और फैशन का बहुत शौक था।
जब विमी मुंबई के सोफिया कॉलेज से पढ़ाई कर रही थीं, तब उनकी मुलाकात कोलकाता के एक बहुत बड़े मारवाड़ी उद्योगपति के बेटे शिव अग्रवाल से हुई। दोनों में प्यार हो गया।
विमी एक रूढ़िवादी पंजाबी सिख परिवार से थीं और शिव एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार से थे। विमी की कम उम्र, अलग जाति और अलग संस्कृति होने के कारण दोनों के परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
लेकिन प्यार की खातिर विमी और शिव ने बगावत की और शादी कर ली। इस शादी के बाद दोनों के के माता-पिता ने उनसे हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया।
शादी के बाद दोनों कोलकाता में एक आलीशान जिंदगी जीने लगे और उनके दो बच्चे बेटा रजनीश और बेटी शोना हुए।
चूँकि विमी के पति एक रईस बिजनेसमैन थे और उनका अक्सर बड़ी बड़ी पार्टीज़ में जाना होता रहता था, ऐसे ही कोलकाता की एक पार्टी में उनका सामना उस जमाने के एक बड़े मशहूर संगीतकार रवि से हुआ…
जैसे ही उन्होंने विमी को देखा वो उनकी खूबसूरती पर फिदा हो गए और बोले, “आप फिल्मों में ट्राय क्यों नहीं करती..”
इस पर विमी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “ मैं दो बच्चो की माँ हूँ, मुझे भला फ़िल्मों में कौन रोल देगा..?
तभी रवि साहब ने डिसाइड कर लिया कि वो विमी को फ़िल्मों में ज़रूर लाएंगे और उन्होंने विमी के पति को मुंबई आने का न्यौता दे दिया…
विमी के पति शिव अग्रवाल को उनके फ़िल्मों में काम करने पर कोई ऐतराज़ नहीं था, वो विमी को लेकर मुंबई आ गए..
रवि साहब ने विमी की मुलाकात जाने-माने निर्माता-निर्देशक बी. आर. चोपड़ा से करवाई। बी. आर. चोपड़ा उस समय अपनी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म हमराज़ के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे। विमी को देखते ही उन्होंने उन्हें सुनील दत्त और राजकुमार जैसे बड़े सितारों के अपोजिट लीड रोल में साइन कर लिया।
उनकी पहली ही फिल्म हमराज़ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही और इसके गाने नीले गगन के तले…और तुम अगर साथ देने… न मुंह छिपा के जिओ और न सिर झुका के जियो,…लोगों की ज़ुबाँ पर चढ़ गए..
पहली ही फिल्म में विमी को इस कदर प्यार मिला कि उस जमाने के बड़े-बड़े डायरेक्टर्स भी उन्हें लेने के लिए घर के बाहर इंतजार किया करते थे..
उस जमाने में विमी हर फिल्म के 3 लाख रुपए चार्ज किया करती थीं।
हमराज़ फ़िल्म साइन करते समय बीआर चोपड़ा के साथ तीन फ़िल्मों का कांट्रैक्ट था जिसके अनुसार जब तक विमी उनकी तीन फ़िल्मों में काम ना कर लें तब तक वो किसी और के साथ फ़िल्में नहीं कर सकती थी…
उस समय उनके काम का हिसाब उनके पति शिव ही रखते थे, और वही उनके पर्सनल असिस्टेंट भी थे।
एक बार विमी को बीआर चोपड़ा की फ़िल्म की शूटिंग के लिए शहर के बाहर जाना था पर शिव ने मना कर दिया कि विमी आउटडोर शूटिंग नहीं करेगी…पूरी टीम उनका दूसरे शहर में इंतज़ार करती रही लेकिन शिव ने उन्हें जाने नहीं दिया..
अगले दिन बीआर चोपड़ा तुरंत फ्लाइट पकड़कर विमी के घर पहुंचे, काफ़ी समझाया पर शिव नहीं माने, आख़िरकर तीखी बहस के साथ कांट्रैक्ट रद्द हो गया…
बीआर चोपड़ा से हुए विवाद के बाद कई बड़े मेकर्स ने विमी को काम देना बंद कर दिया, इसके बाद विमी की लगातार कई फिल्में जैसे आबरू, वचन और पतंगा बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गईं। फिल्में फ्लॉप हुईं तो विमी पर भी फ्लॉप एक्ट्रेस का ठप्पा लग गया और उन्हें फिल्में मिलना बंद हो गईं। कुछ लोग उनके पति के रवैये के चलते भी उन्हें फिल्म में नहीं लेना चाहते थे।
लगातार फ्लॉप फिल्मों और आर्थिक तंगी के कारण उनके पति शिव भी शराब पीने लगे। आए दिन घर में झगड़े होते और शराब के नशे में शिव, विमी को पीटते थे।
झगड़े इतने बढ़ने लगे कि तलाक की नौबत आ गई. बच्चे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे थे बाद में पति भी तलाक लेकर वापस अपने परिवार के पास कोलकाता चले गए.
अब विमी अकेले रहने लगी . अपने अकेलेपन से उबकर विमी शराब पीने लगी.
कहते हैं जब स्त्री अकेली हो जाती है तो लूटने वाले गिद्धों से घिर जाती है.
इसी बीच विमी की मुलाक़ात जॉली नाम के एक प्रोड्यूसर से हुई, जॉली ने उनसे कहा कि वो उन्हें फ़िल्मों में काम दिलवाएगा, जिसके सिलसिले में उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं। साथ समय बिताते हुए दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे।
लेकिन जॉली को विमी से प्यार नहीं था, वो सिर्फ़ सहारा देने का नाटक कर रहा था , असल में वो उनका शोषण करने लगा था, जॉली ने विमी के बचे-खुचे पैसों और उनकी प्रॉपर्टी पर भी कब्जा कर लिया।
वो, विमी को जबरदस्ती दूसरे प्रोड्यूसर्स के पास भेजता था और बदले में उनसे मोटी रकम वसूल करता था और सारे पैसे ख़ुद रखता था। यहाँ तक कि वो भी विमी से मारपीट करता था..
विमी की एक करीबी दोस्त कृष्णा ने एक इंटरव्यू में विमी के देह व्यापार करने की बात भी कही थी।
एक दिन तंग आकर विमी ने जॉली का घर भी छोड़ दिया और अकेले रहने लगी.. काम न मिलने और डिप्रेशन के कारण विमी को शराब की भयानक लत लग गई।
अधिक शराब पीने के कारण विमी का लीवर पूरी तरह खराब हो गया। उनके पास न इलाज के पैसे
ना होने की वजह से उन्होंने जॉली से संपर्क किया लेकिन वो भी उन्हें मुंबई के अस्पताल के जनरल वार्ड में की तरह भर्ती कराया।
आखिरकार 22 अगस्त 1977 को विमी की अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल ने जॉली को कॉल किया और उसे डेडबॉडी ले जाने को कहा।
जब जॉली हॉस्पिटल पहुंचा तो उसके पास एम्बुलेंस के भी पैसे नहीं थे, तब जॉली ने लाचार होकर अस्पताल के बाहर खड़े एक चाय बेचने वाले से उसका ठेला कुछ समय के लिए मांगा…
अपने जमाने की मशहूर एक्ट्रेस विमी के पार्थिव शरीर को एक मैली धोती में लपेटकर उस हाथ-ठेले पर लादा गया. उसी ठेले को धक्का लगाते हुए सड़क पर जॉली और दो-तीन लोकल लोग सांताक्रुज श्मशान घाट लेकर गए .
ये वही सड़क थी जहां कुछ साल पहले विमी अपनी महंगी कार में घूमा करती थीं और उस दिन ठेले पर जा रही थी..।
ऐसी ज़िन्दगी को देखकर उनकी दोस्त कृष्णा ने कहा था कि विमी की मौत उसके लिए पैन रिलीवर थी, जैसे जिंदगी उसने गुज़ारी, उससे कई गुना ज़्यादा मौत उसके लिए बेहतर थी..
लेकिन मैं यहाँ ये जानना चाहती हूँ कि इसका ज़िम्मेदार कौन था?
उसके लिए ग़लत फ़ैसले..?
या फिर अपनों का धोखा..जिन्होंने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया और शारीरिक, मानसिक शोषण किया ?
या फिर इंडस्ट्री का क्रूर चेहरा ..?
आख़िर कौन..? क्या समय..?
प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश


