मासूमियत और बेमिसाल खूबसूरती रखने वाली इस अदाकारा का है आज जन्मदिन

भारतीय सिनेमा के गोल्डन एरा की बात हो और स्क्रीन पर अपनी मासूमियत और बेमिसाल खूबसूरती से जादू बिखेरने वाली सायरा बानो का जिक्र न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है।
आज 23 अगस्त को सायरा जी अपना जन्मदिन मना रही हैं।
उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया।

सायरा बानो के जीवन का सबसे बड़ा और खूबसूरत किस्सा उनकी और ट्रैजेडी किंग दिलीप कुमार की प्रेम कहानी है।

सायरा बानो का जन्म 1944 में मशहूर एक्ट्रेस नसीम बानो और प्राइड्यूसर मियाँ अहसान उल हक़ के घर हुआ था.. और उनके जन्म की सबसे इंट्रेस्टिंग बात ये थी कि जिस साल सायरा बानो इस दुनिया में आई थीं उसी साल उनके होने वाले हमसफ़र दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म ज्वार भाटा रिलीज़ हुई थी..

जब सायरा केवल 12 साल की थीं, तब पहली बार उन्होंने दिलीप साहब की फिल्म आन देखी थी…और वो दिलीप कुमार पर इस क़दर फ़िदा हो गई थी कि फ़िल्म देखने के बाद उन्होंने अपनी माँ से कहा कि वो बड़ी होकर दिलीप कुमार की दुल्हन बनेंगी…
तब उनकी माँ ने मज़ाक में ये कह दिया था कि अगर तुम्हें दिलीप की दुल्हन बनना है तो पहले उनकी पसंद -नापसंद तो जान लो.. और इस बात को सायरा ने इतना सीरियस ले लिया था कि उन्होंने दिलीप साहब की पसंद की चीज़ें सीखनी शुरू कर दी थीं..

दरअसल सायरा की माँ नसीम एक एक्ट्रेस थी तो उनकी मुलाक़ात दिलीप कुमार से होती रहती थी और वो उनके हवाले से सायरा बानो को भी जानते थे…
1960 के दशक की शुरुआत में जब प्रोड्यूसर एस मुखर्जी अपनी फ़िल्म दिल दिया दर्द लिया की कास्टिंग कर थे तब उन्होंने दिलीप कुमार से कहा कि यूसुफ़, ये लड़की तुम्हारे साथ फ़िल्म में काम करने के लिए पागल है…

तब दिलीप कुमार ने अपने काले-सफ़ेद बालों में हाथ फेरकर कहा कि क्या तुमने मेरे ये सफेद बाल देखे हैं? मैं तुमसे बहुत ज्यादा उम्र का हूं और मैं बहुत खाता हूं..

दरअसल शुरुआत में दिलीप साहब उन्हें बहुत छोटी समझते थे और उनके साथ फिल्मों में काम करने से भी कतराते थे। उनका मानना था कि सायरा उम्र में उनसे बहुत छोटी और नासमझ लगती हैं, इसलिए परदे पर उनकी जोड़ी अच्छी नहीं दिखेगी। हालांकि, बाद में उन्होंने गोपी और सगीना जैसी फिल्मों में साथ काम किया और दोनों की जोड़ी सुपरहिट रही…

वैसे तो शायरा बानो को साल 1960 में सुनील दत्त की फ़िल्म हम हिंदुस्तानी से बॉलीवुड में डेब्यू करना था लेकिन किन्हीं कारणों से बात आगे नहीं बढ़ी और सायरा बानो ने सिर्फ़ सोलह साल की उम्र में शम्मी कपूर के साथ फिल्म जंगली से 1961 अपने करियर की शुरुआत की..
ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके याहू गाने व सायरा बानो की एक्टिंग के लिए उन्हें पहली ही फिल्म से फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन दिला दिया, जिससे वह रातों-रात स्टार बन गईं।

लेकिन सालों तक जिस सायरा को दिलीप कुमार बच्ची समझकर उसके साथ काम करने से बचते रहे एक शाम उसी लड़की को देखकर उनका नजरिया बदल गया…

जब सायरा बानो साड़ी पहनकर आज ही के दिन 23 अगस्त 1966 को अपने जन्मदिन की पार्टी में पहुंचीं, तो दिलीप साहब उन्हें देखते ही रह गए। वह उनकी खूबसूरती के दीवाने हो गए और दोनों के बीच मुलाकातें शुरू हुईं और महज 8 दिनों के डेटिंग के बाद दिलीप कुमार ने सीधे सायरा की मां नसीम बानो से उनका हाथ मांग लिया था। और यह आइकॉनिक जोड़ी हमेशा के लिए एक हो गई।
शादी के बाद उन्होंने और दिलीप साहब ने आपसी सहमति से तय किया कि वह अब फिल्मी करियर जारी नहीं रखेंगी।
लेकिन जो फ़िल्में उन्होंने शादी से पहले ही साइन कर ली थी, उन्हें तो पूरा करना ही था..उन्ही में से एक थी पूरब और पश्चिम.. जो सायरा बानो के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है..

लेकिन इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सायरा बानो से तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्हें अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या हुई थी और इलाज के लिए लंदन जाना पड़ा। उन्होंने निर्देशक मनोज कुमार से कहा कि वह किसी और हीरोइन को फिल्म में ले लें।
लेकिन मनोज कुमार ने कहा कि “अगर इस फिल्म में सायरा नहीं होगी, तो मैं यह फिल्म ही नहीं बनाऊंगा…
मनोज कुमार ने महीनों इंतजार किया और सायरा जी के ठीक होने के बाद ही शूटिंग शुरू की..
इसी फिल्म की मेकिंग के दौरान मनोज कुमार को बॉलीवुड में भारत कुमार का परमानेंट टैग मिला था।
दरअसल फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर अक्सर सायरा बानो और बाकी क्रू मेंबर्स मनोज कुमार को उनके असली नाम के बजाय मज़ाक-मज़ाक में भारत कहकर ही पुकारने लगे थे। फिल्म रिलीज होने के बाद जब यह सुपरहिट हुई, तो दर्शकों ने भी मनोज कुमार को हमेशा के लिए भारत कुमार का नाम दे दिया।

फिल्म रिलीज होने के बाद सायरा बानो के गोल्डन विग वाले लुक और उनके अभिनय की जबरदस्त तारीफ हुई और यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में शुमार हो गई।

क्या आपकी भी सायरा बानो की फिल्म पूरब और पश्चिम देखी है..?

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश