प्राचार्यों और शिक्षकों की कार्यशैली पर शिक्षामंत्री ने उठाए सवाल

प्रफुल्ल ठाकुर, रायपुर

पत्रकारों पर भी यादव के सख्त तेवर

पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में मंगलवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की मौजूदगी में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में शिक्षा मंत्री ने प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और प्राचार्यों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।

मंत्री यादव ने कहा कि स्कूलों की कई समस्याओं का मूल कारण यह है कि शिक्षक और प्राचार्य स्कूलों को अपना मानकर काम नहीं करते। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक स्कूल केवल वेतन लेने और अपना घर चलाने के लिए आते हैं। उनके भीतर यह सोच दिखाई नहीं देती कि स्कूल की व्यवस्था को बेहतर कैसे बनाया जाए।

शिक्षा मंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षक यह चिंतन क्यों नहीं कर रहे कि स्कूलों में बच्चे क्यों नहीं आ रहे हैं, शौचालय खराब क्यों हैं और स्कूल की बिल्डिंग की हालत क्यों बिगड़ रही है।

मंत्री ने स्कूलों में होने वाले आंदोलनों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कई बार शिक्षकों की मांगों को लेकर बच्चों से आंदोलन कराया जाता है। किसी शिक्षक को अतिरिक्त विषय पढ़ाने के लिए कह दिया जाए तो बच्चों को आंदोलन के लिए खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कई आंदोलन पहले से प्लान्ड होते हैं। पुराने मठाधीशों को हटाने पर भी आंदोलन किए जा रहे हैं।

अधिकारियों को निर्देश देते हुए मंत्री यादव ने कहा कि अगर वे अपना और अपने परिवार का भविष्य बेहतर चाहते हैं तो उन्हें स्कूलों और वहां पढ़ने वाले बच्चों पर फोकस करना होगा। डीईओ केवल कागजी काम तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करें और जमीनी स्थिति देखें।

मंत्री ने यह भी कहा कि एक तरफ कुछ शिक्षक आंदोलन कराने में लगे हैं, तो दूसरी तरफ कई प्राचार्यों का ध्यान स्कूल के बच्चों और पढ़ाई से ज्यादा अपने केबिन की स्पेस पर है।

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री यादव ने स्कूलों में यूट्यूबर्स और पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाने की बात भी कही।

शिक्षा मंत्री के इन बयानों को लेकर अब सवाल यह है कि क्या वाकई स्कूलों की बदहाली के लिए शिक्षकों और प्राचार्यों की कार्यशैली सबसे बड़ी वजह है? या फिर स्कूलों की समस्याओं के लिए सरकार और शिक्षा विभाग की नीतियां, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही जिम्मेदार हैं?

शिक्षा मंत्री की बात से आप सहमत हैं या असहमत? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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