हर रोल में अपना परफेक्ट देने वाले इस कलाकार का है आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

90 के दशक में दीपक तिजोरी मुंबई में हीरो बनने का सपना लेकर आए थे। गुड लुकिंग थे, एक हीरो के तौर पर जो खूबी होनी चाहिए वो सब उनमें थी लेकिन निर्देशकों ने उन्हें हमेशा साइड रोल ही दिए …कभी हीरो का वफादार दोस्त बनाकर, तो कभी विलेन।
लेकिन दीपक तिजोरी की खूबी ये रही कि उन्होंने इन साइड रोल्स को भी इतनी शिद्दत से निभाया कि कई फिल्मों में वह लीड रोल पर भी भारी पड़ गए।
28 अगस्त 1961 को मुंबई में जन्मे दीपक तिजोरी एक्टर होने के साथ-साथ एक लेखक और निर्देशक भी हैं…

दीपक तिजोरी का परिवार मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा जिले का रहने वाला था। उनके परदादा तिजोरी बनाने का काम करते थे..इसी वजह से लोग उनके परिवार को तिजोरीवाला कहके बुलाते थे।
जब दीपक ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया, तो उन्होंने तिजोरीवाला से वाला हटा दिया और बन गए दीपक तिजोरी…

दीपक तिजोरी ने अपनी पढ़ाई मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज से पूरी की। एक्टिंग का शौक था तो उन्होंने एक थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया जहाँ उनकी मुलाक़ात आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और परेश रावल जैसे कलाकारों से हुई जो आगे चलकर बड़े स्टार बनें।
कॉलेज में जब भी प्ले होता था तो उसके हीरो दीपक ही बनते थे तो उन्हें पूरा भरोसा था कि कॉलेज से निकलते ही फिल्मों में भी हीरो बन जाएंगे..
लेकिन कॉलेज ख़त्म होने के बाद जब उन्होंने फ़िल्मों में काम ढूंढना शुरू किया तो उन्हें जल्दी समझा आ गया कि हीरो बनना इतना आसान नहीं था…
दीपक दिन भर प्रोडक्शन हाउस और निर्देशकों के चक्कर काटते और रात को अपना खर्च चलाने के लिए एक होटल में मैनेजर की नौकरी करते थे..

एक दिन उनके दोस्त ने उन्हें फ़ोन करके बताया कि महेश भट्ट एक फ़िल्म बना रहे है उनसे जाकर मिलो..जब दीपक ऑफिस पहुँचे तो महेश भट्ट ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था और कहा था कि तुममें हीरो बनने की कोई क्वालिटी नहीं है..

लेकिन दीपक ने हार नहीं मानी, और वो उनके ऑफिस के चक्कर काटते रहे, तब जाकर महेश भट्ट ने उन्हें फ़िल्म में हीरो के दोस्त का रोल दिया, रोल छोटा था लेकिन इस रोल को करने के बाद उन्हें कई फ़िल्में मिलती चली गईं…
सड़क, दिल है कि मानता नहीं, खिलाड़ी, जो जीता वही सिकंदर जैसे कई फ़िल्मों में उन्होंने सपोर्टिंग रोल किए…

आख़िरकार, साल 1993 में आई फ़िल्म पहला नशा में उन्हें बतौर लीड एक्टर काम मिला, फ़िल्म में शाहरुख खान और आमिर खान ने भी कैमियो किया था लेकिन फ़िल्म फ्लॉप हो गई…

2000 के दशक की शुरुआत में दीपक ने महसूस किया कि उन्हें बतौर अभिनेता वैसे रोल नहीं मिल रहे हैं जैसे वो चाहते थे। इसलिए 2003 में उन्होंने निर्देशन बनने का फैसला किया.. साल 2003 में फ़िल्म ऊप्स बनाई जो बहुत बोल्ड और उस दौर में टेबू माने जाने वाले सब्जेक्ट पर आधारित थी…
इसके बाद टॉम, डिक एंड जैरी, दो लफ़्ज़ों की कहानी जैसी फ़िल्में बनाई..

टीवी इंडस्ट्री में भी दीपक ने सैटरडे सस्पेंस, थ्रिलर एट 10 फरेब और डायल 100 जैसे शो प्रोड्यूस किए. ये शो अवॉर्ड विनिंग रहे..

दीपक तिजोरी अपनी फ़िल्मों की वजह से कम अपनी पर्सनल लाइफ की वजह से ज़्यादा सुर्खियों में रहे…
कहा जाता है कि दीपक को शादी के दो दशक बाद पता चला था कि उनकी पत्नी शिवानी तोमर क़ानूनन उनकी पत्नी नहीं हैं…

दरअसल साल 2017 में मीडिया में आया कि उनकी पत्नी शिवानी ने उन्हें घर से निकाल दिया है, और कोर्ट से एलिमिनी के लिए केस कर दिया.. लेकिन जब कोर्ट में मामले की जाँच हुई तो एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया।

जाँच में पता चला कि शिवानी ने अपने पहले पति को तलाक दिए बिना ही दीपक तिजोरी से शादी कर ली थी। और कारण कोर्ट ने उनकी 26 साल पुरानी शादी को ही अमान्य करार दे दिया,

जिससे दीपक को एक बड़ी कानूनी राहत तो मिली थी लेकिन इस वाकये ने उन्हें मानसिक रूप से एक बड़ा झटका था।

दीपक तिजोरी आजकल अभिनय में अपनी नई पारी खेल रहे हैं और साथ ही रीजनल सिनेमा (क्षेत्रीय) तथा स्वतंत्र फिल्मों में बतौर एक्टर और डायरेक्टर काम कर रहे हैं।

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