
आज जन्मदिन है दिवंगत ऋषि कपूर का
प्रीति सिंह, गाजियाबाद उत्तरप्रदेश
बॉलीवुड में जब भी किसी ऐसे अभिनेता का नाम लिया जाता है जिसने दशकों तक दिलों पर राज किया, तो ऋषि कपूर का चेहरा सामने आ जाता है। 70 और 80 के दशक में रंग-बिरंगे स्वेटर पहनकर लड़कियों के दिलों की धड़कन बढ़ाने वाले ऋषि कपूर जितने बेहतरीन एक्टर थे, असल जिंदगी में उतने ही बेबाक और दिलचस्प इंसान थे।
एक्टिंग उन्हें विरासत में मिली थी, उनके भीतर बचपन से ही एक एक्टर छुपा हुआ था। बचपन में जब भी उनकी मां उन्हें किसी बात पर डांटती थीं, तो नन्हे चिंटू रोते-रोते सीधे शीशे के सामने जाकर खड़े हो जाते थे और खुद को रोता हुआ सर्फ इसलिए देखते थे ताकि समझ सकें कि रोते समय चेहरे के एक्सप्रेशन्स कैसे बदलते हैं।
उनके दादा पृथ्वीराज कपूर ने जब उनकी इस हरकत को देखा, तो तभी कह दिया था कि ये लड़का आगे चलकर कपूर खानदान का नाम बहुत रोशन करेगा।
ऋषि कपूर ने पहली बार कैमरा तब फेस किया था जब वह सिर्फ़ 3 साल के थे।
फिल्म ‘श्री 420’ के एवरग्रीन गाने प्यार हुआ इकरार हुआ…में बारिश में रोते हुए तीन बच्चे पैदल चलते दिखाई देते हैं, उनमें से एक छोटे ऋषि कपूर थे…उस समय वो बारिश में भीगने और रोने का शॉट देने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे।
तब बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री नरगिस जी ने उन्हें कैडबरी चॉकलेट की रिश्वत दी थी, जिसके बाद उन्होंने अपना पहला फ़िल्मी शॉट पूरा किया था।
इसके बाद बाल कलाकार के तौर पर पिता राज कपूर ने उन्हें साल 1970 में अपनी फिल्म मेरा नाम जोकर में राजू के बचपन का रोल दिया।
एक बाल कलाकार के रूप में ऋषि कपूर ने इस फिल्म में इतना शानदार अभिनय किया कि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला..इस अवार्ड ने साबित कर दिया कि कपूर खानदान का ये चिराग लंबी रेस का घोड़ा है..
और जब ये चॉकलेट बॉय बड़ा हुआ, तो साल 1973 में आई फिल्म बॉबी से उन्होंने बतौर हीरो ऐसा धमाकेदार डेब्यू किया कि रातों-रात देश के सबसे बड़े यूथ आइकॉन बन गए।
बॉबी की सफलता के बाद ऋषि कपूर ने पहली बार शराब चखने की कोशिश की थी। जब उनके पिता राज कपूर को यह पता चला, तो उन्होंने ऋषि कपूर को बहुत डांटा था और कहा था कि
अगर पीना ही है, तो एक स्टार की तरह सलीके से महफिल में पियो, ऐसे छुपकर चोरों की तरह नहीं।
बॉबी की कामयाबी ने उन्हें स्टार तो बना दिया, लेकिन इसी स्टारडम के नशे में उनसे एक ऐसी गलती हुई जिसे उन्होंने सालों बाद दुनिया के सामने खुद कबूला था…
ये बात आज के दौर में सोचकर भी अजीब लगती है, लेकिन ऋषि कपूर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी खुल्लम खुल्ला में खुद इस बात को स्वीकार किया था…
साल 1973 में जब उनकी फिल्म बॉबी सुपरहिट हुई, तो उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
ऋषि कपूर ने बताया था कि उन्होंने इस अवार्ड को पाने के लिए उन्होंने 30,000 की रिश्वत दी थी। उस साल बिग बी भी जंज़ीर के लिए रेस में थे, और इस वाकये की वजह से दोनों के बीच कुछ समय के लिए अनबन भी हो गई थी।
खैर, बच्चन साहब और ऋषि कपूर जी के बीच ये मनमुटाव ज्यादा दिन नहीं चला और जल्द ही दोनों ने कभी कभी, अमर अकबर एंथनी और नसीब जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में साथ काम किया।
पर हैरान करने वाली बात ये थी कि नसीब के बाद इन दोनों ने लंबे समय तक स्क्रीन शेयर नहीं की। पूरे 27 साल बाद ये दोनों दिग्गज अभिनेता फिल्म 102 नॉट आउट में एक साथ पर्दे पर आए, जहाँ अमिताभ बच्चन ने ऋषि कपूर के 102 साल के जिंदादिल पिता का और ऋषि जी ने उनके 75 साल के नीरस बेटे का किरदार निभाया था।
आपने देखा होगा कि ऋषि कपूर अपनी हर रोमांटिक फिल्म में नए और बेहद खूबसूरत स्वेटर पहने नजर आते थे?
दरअसल, ऋषि कपूर को रंग-बिरंगे और महंगे स्वेटर पहनने का जबरदस्त शौक था। उन्होंने अपनी लगभग हर रोमांटिक फिल्म में एक नया स्वेटर पहना और उनका ये शौक इस हद तक था कि उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में कभी भी कोई स्वेटर दोबारा रिपीट नहीं किया।
उनके पास दुनिया भर के ब्रांड्स के स्वेटर्स का इतना बड़ा कलेक्शन था कि उनके घर में सिर्फ स्वेटर रखने के लिए एक अलग अलमारी बनी हुई थी, जो उनकी हर फिल्म में एक नया फैशन ट्रेंड बन जाती थी।
ऋषि कपूर सिर्फ लुक्स के मामले में ही परफेक्ट नहीं थे, बल्कि वह अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए कड़ी मेहनत करते थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण फिल्म कर्ज जो साल 1980 में आई थी, उसका आइकॉनिक गाना ओम शांति ओम…जो आज भी पार्टी की जान है…
इस गाने में ऋषि कपूर एक घूमते हुए रिवॉल्विंग स्टेज पर बड़े से गिटार के साथ डांस करते नजर आते हैं। असल में ऋषि कपूर को गिटार बजाना नहीं आता था, लेकिन वह पर्दे पर नकली नहीं दिखना चाहते थे, गाने की शूटिंग से पहले उन्होंने हफ्तों तक गिटार पकड़ने और उसकी स्ट्रमिंग की रीयल टाइमिंग सीखी ताकि जब गाना स्क्रीन पर आए, तो दर्शकों को लगे कि वो सचमुच गिटार बजा रहे हैं। उनकी इस मेहनत ने उस गाने को इतिहास का सबसे आइकॉनिक डांस नंबर बना दिया।
इसी साल यानी 1980 में उनकी जिंदगी में वो दौर आया जब उनका रीयल-लाइफ रोमांस शादी के मंडप तक पहुंचा।
ऋषि कपूर और नीतू सिंह की लव स्टोरी जितनी फिल्मी थी, उनकी शादी भी उतनी ही ड्रामेटिक रही। साल 1980 में जब दोनों की शादी हो रही थी, तो वहां बिन बुलाए मेहमानों और फैंस की इतनी भारी भीड़ उमड़ पड़ी कि पैर रखने की जगह नहीं थी। भीड़ का तनाव और अपनी भारी शेरवानी के कारण ऋषि कपूर को चक्कर आ गया और वह स्टेज पर ही बेहोश हो गए। मजेदार बात ये थी कि अपनी भारी-भरकम ड्रेस संभालते-संभालते नीतू जी भी उसी वक्त बेहोश हो गईं थीं।
शादी के बाद ऋषि कपूर ने सालों तक अपनी चॉकलेटी हीरो वाली इमेज को संभाले रखा, लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया।
ऋषि कपूर को दुनिया हमेशा चॉकलेटी बॉय के रूप में देखती थी।
इसलिए जब साल 2012 में करण जौहर ने उन्हें फिल्म अग्निपथ में खूंखार विलेन रऊफ लाला का रोल ऑफर किया, तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था कि लोग उनकी क्यूट इमेज के कारण उन्हें विलेन के रूप में कभी पसंद नहीं करेंगे।
लेकिन लेकिन जब निर्देशक के कहने पर उन्होंने लुक टेस्ट दिया, तो शीशे में खुद को देखकर वह पहचान नहीं पाए।
इस रोल में उन्होंने ऐसी क्रूरता दिखाई कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए और जो लड़का कभी चॉकलेट खाकर कैमरे के सामने आया था, उसने अपनी उम्र के 60वें दशक में बेस्ट विलेन का अवार्ड अपने नाम कर लिया।
ऋषि कपूर सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि सिनेमा की एक जीती-जागती यूनिवर्सिटी थे। उन्होंने चॉकलेटी हीरो से लेकर विलेन और 102 नॉट आउट व कपूर एंड संस में बूढ़े दादाजी तक के किरदारों को जिस शिद्दत से जिया, वह मिसाल है। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी फिल्मों और इन यादों के जरिए वह हमेशा जिंदा रहेंगे।
रोमांटिक फ़िल्मों के हीरो ऋषि कपूर को जन्मदिन की शुभकामनाएँ ❤️❤️❤️
आपको ऋषि कपूर की कौन सी फ़िल्म सबसे ज़्यादा पसंद आई..?
उनका चॉकलेटी अंदाज वाली या फिर उनके संजीदा किरदार वाली..?
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