निर्दलीय विधायक रहे, पर भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव हार गए थे भूपेन हजारिका

आज जन्मजयंती

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

आज का दिन संगीतप्रेमियों के लिए बेहद खास है क्योंकि आज के दिन ही 8 सितंबर 1926 को डॉ भूपेन हजारिका का जन्म हुआ था. वे भारत के एक महान गायक, गीतकार, संगीतकार, कवि और फिल्म निर्माता थे

भूपेन दा की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वो एक कम्पलीट आर्टिस्ट थे। वे अपने गीत खुद लिखते थे, ख़ुद उनकी धुन बनाते थे और उन्हें खुद ही गाते भी थे। जब वे गाते थे, तो उनकी शानदार आवाज सीधे सुनने वाले के दिल में उतर जाती थी।
फिर चाहे फिल्म रुदाली का वो दर्दभरा गीत दिल हूम हूम करे हो या फिर समाज को जगाने वाला गाना ओ गंगा तू बहती है क्यों…उनके हर गीत में एक गहरा संदेश छिपा होता था।

जब भूपेन दा सिर्फ 10 साल के थे, तब उन्होंने पहली बार असम के तेजपुर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपनी माँ का सिखाया एक पारंपरिक भजन गाया था…
उनकी आवाज़ की मिठास सुनकर दर्शकों की लाइन में बैठे दो लोग बहुत प्रभावित हुए थे..
वे दो लोग कोई साधारण इंसान नहीं थे…
उनमें से एक थे असम के पहले फिल्म निर्माता ज्योतिप्रसाद अग्रवाल और दूसरे थे क्रांतिकारी कवि व कलाकार बिष्णु प्रसाद राभा.

उन्होंने भूपेन दा के भीतर छिपे हुनर को पहचाना और वे तुरंत उनके पिता के पास गए और उन्हें संगीत सिखाने व रिकॉर्डिंग के लिए कोलकाता ले जाने की अनुमति माँगी।
यहीं से भूपेन दा के फ़िल्मी सफर की शुरुआत हुई..
ज्योतिप्रसाद अग्रवाल, उन्हें कोलकाता के मशहूर ऑरोरा स्टूडियो ले गए, जहां भूपेन दा ने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था।

इसके बाद साल 1939 में 12 साल की उम्र में भूपेन दा ने ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के ही निर्देशन में बनी असमिया भाषा की दूसरी फीचर फिल्म इंद्रमालती में एक बाल कलाकार के रूप में एक्टिंग की और प्लेबैक सिंगर के तौर पर दो गाने गाए।
उनके गाए गाने असम की संस्कृति में इतने लोकप्रिय हुए कि लोग इस छोटे से बच्चे के दीवाने हो गए। असमिया सिनेमा और संगीत जगत को उनका नया सितारा मिल चुका था…

भूपेन दा जितने बड़े कलाकार थे, उतने ही पढ़े-लिखे इंसान भी थे। उन्होंने BHU से राजनीति विज्ञान में MA किया।
इसके बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो गुवाहाटी में कुछ समय के लिए नौकरी की।

रेडियो की नौकरी के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए और वहां की मशहूर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में PhD की डिग्री हासिल की,

डिग्री लेकर भारत लौटने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाया भी।

लेकिन उनका दिल तो सिर्फ संगीत के लिए धड़कता था।
आखिरकार उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी और अपने सपनों को पूरा करने कोलकाता आ गए। यही से उन्होंने संगीत निर्देशक और गायक के रूप में खुद की पहचान बनाई और बंगाली संगीत में भी अपना एक अलग मुकाम हासिल किया।

क्या आप सोच सकते हैं कि जिन्होंने अपने गाने से दुनिया को अपना मुरीद बनाया, उन्हें गाना सीखने की वजह से जेल भी जाना पड़ा था…

दरअसल, जब भूपेन दा न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में अपनी Ph.D. की पढ़ाई कर रहे थे, तब अमेरिका में अश्वेत लोगों के हक के लिए Civil Rights Movement बहुत तेजी से चल रहा था।
वहाँ भूपेन दा की मुलाकात मशहूर अश्वेत गायक और एक्टिविस्ट पॉल रॉबसन से हुई।
अब चूँकि रॉबसन से उस समय भूपेन दा संगीत के बारे में सीख रहे थे, तो जब एक्टिविस्ट रॉबसन को नस्लवाद और अन्याय के खिलाफ रैलियां निकालने पर अरेस्ट किया गया तो उनकी साथ भूपेन दा को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था..
और भूपेन दा को 7 दिनों तक अमेरिकी जेल में रहना पड़ा था।

जेल के उस अनुभव और पॉल रॉबसन के संगीत ने भूपेन दा को जिंदगी को देखने का एक नया नज़रिया दिया था।
रॉबसन का एक वर्ल्ड-फेमस गाना था…Old Man River जो मिसिसिपी नदी को गवाह बनाकर समाज में फैले अन्याय पर सवाल उठाता था.. इस गाने से भूपेन दा इतने इन्स्पायर हुए थे कि उन्होंने भारत लौटकर गंगा नदी पर एक गाना लिखा
“ओ गंगा तू, गंगा तू बहती है क्यों? नैतिकताओं के नष्ट होने पर भी, मानवता के पतित होने पर भी, तू निर्लज्ज होकर बहती है क्यों?”

भूपेन दा का स्वभाव एक जगह टिकने वाला नहीं था। वे पूरी दुनिया घूमना चाहते थे और हर संस्कृति को करीब से देखना चाहते थे। इसलिए वे खुद को असमिया में जाजाबोर यानी यायावर/घुमक्कड़ कहते थे।
उनका एक बहुत मशहूर गाना भी है, जिसके हिंदी बोल गुलजार साहब ने लिखे थे..
आवारा हूं जमीन पर चलते छलकते बहते दरिया की धारा हूं…
भूपेन दा का जीवन जितना उनके संगीत के लिए जाना जाता है, उतने ही बड़े विवाद उनकी निजी जिंदगी से भी जुड़े..
उन्होंने प्रियंवदा पटेल से साल 1950 में शादी की थी, लेकिन आपसी मतभेदों के कारण यह शादी जल्द ही टूट गई

सालों बाद, जब साल 2011 में भूपेन दा का निधन हो गया, तो उनकी पहली पुण्यतिथि 2012 के मौके पर उनकी पत्नी प्रियंवदा ने एक टीवी इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि उनके अलग होने की एक वजह लता मंगेशकर थीं,
प्रियंवदा का दावा था कि जब हम कोलकाता रहते थे तब लता जी और भूपेन दा के बीच रोमांटिक अफेयर था।

इस आरोप पर संगीत जगत में भारी बवाल मचा था,
स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया था.
लता जी ने कहा था कि वे अपने पूरे जीवन में प्रियंवदा से केवल एक बार मिली हैं और वे इन दावों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी..
यहाँ तक कि मंगेशकर परिवार और खुद भूपेन दा के करीबियों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
हालांकि, भूपेन दा ने अपनी आत्मकथा में मुंबई की एक बड़ी गायिका के प्रति अपने विशेष लगाव की बात स्वीकार की थी, लेकिन उन्होंने मर्यादा रखते हुए कभी किसी नाम का खुलकर जिक्र नहीं किया।
वह राज हमेशा के लिए उनकी खामोशी के साथ ही चला गया।

संगीत के साथ-साथ भूपेन हजारिका देश की राजनीति का भी हिस्सा रहे. वो 1967 से 1972 तक असम विधानसभा के निर्दलीय विधायक रहे थे. इसके बाद, साल 2004 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुवाहाटी से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उसमें उन्हें जीत नहीं मिली थी।

संगीत के क्षेत्र में उनके इसी अद्भुत योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत साल 2019 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार जैसे बड़े सम्मान भी मिले।
आज असम में लोहित नदी पर बने भारत के सबसे लंबे सड़क पुल का नाम भी उन्हीं के सम्मान में डॉ. भूपेन हजारिका सेतु रखा गया है

भूपेन दा को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं

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