बॉलीवुड के सबसे बोल्ड और चर्चित लाइव-इन-रिलेशनशिप में रहे हैं महेश भट्ट

आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

20 सितंबर 1948 को जन्मे महेश भट्ट फिल्म इंडस्ट्री के इकलौते ऐसे फिल्मेकर हैं, जिन्होंने पर्दे पर कभी नकली कहानियां नहीं बेचीं। जिनकी पहचान लीक से हटकर फिल्में बनाने, अपने बेबाक बयानों और विवादों से घिरे निजी जीवन के कारण रही है।
उनकी सबसे बड़ी खासियत ये रही कि उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे गहरे जख्मों और रिश्तों को पर्दे पर उतार दिया।

आज उनके जन्मदिन पर बात उस सबसे चर्चित और दर्दनाक पन्ने की, जो उनके और उस दौर की सबसे ग्लैमरस अभिनेत्री परवीन बाबी के बीच रहा।

महेश भट्ट और परवीन बाबी की पहली मुलाकात साल 1977 में हुई थी। ये वो दौर था जब परवीन बाबी बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार थीं।मैगजीन के कवर पेज से लेकर हर बड़े डायरेक्टर की फिल्मों तक, सिर्फ परवीन का नाम था।
मशहूर स्टार कबीर बेदी से उनका हाल ही में उनका ब्रेकअप हुआ था।

कबीर बेदी से ब्रेकअप के बाद परवीन बुरी तरह टूट चुकी थीं। और वे तब जुहू में एक फ्लैट पर रहती थीं।

महेश भट्ट और कबीर बेदी अच्छे दोस्त थे। एक दिन कबीर बेदी ने महेश भट्ट से गुजारिश की कि
वे उनके जुहू वाले फ्लैट पर जाएं और वहां से कबीर का कुछ सामान और किताबें ले आएं, परवीन वहीं है।

महेश भट्ट जब उस फ्लैट पर सामान लेने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि परवीन बाबी एक कोने में बेहद शांत और उदास बैठी थीं। उनकी आंखों में गहरा अकेलापन और दर्द था।
महेश भट्ट ने कबीर की किताबें लीं, लेकिन परवीन का उदास चेहरा उनके दिल को छू गया। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

इस बाद महेश भट्ट अक्सर परवीन से मिलने उनके घर जाने लगे। वे घंटों बातें करते, फिल्में और साहित्य पर चर्चा करते।
महेश उस वक्त एक संघर्षरत डायरेक्टर थे और शादीशुदा भी थे, उनकी पहली किरण भट्ट के साथ उनका पूरा परिवार था।

एक शाम, परवीन के घर पर दोनों बैठे थे। अचानक परवीन ने महेश भट्ट की तरफ देखा और बेहद संजीदगी से एक फिल्मी और गहरा सवाल पूछा कि

“ तुम रोज़ यहाँ आते हो, मेरे साथ वक्त बिताते हो… लेकिन किस हैसियत से? दोस्त की तरह, या कुछ और? अगर कुछ और है, तो पहले अपनी पत्नी को जाकर सच बताओ।”

परवीन बाबी की इस बेबाकी और ईमानदारी ने महेश भट्ट को झकझोर दिया।
वे उसी रात अपने घर गए और अपनी पत्नी किरण को परवीन के बारे में सब कुछ सच-सच बता दिया। इसके बाद वे अपना कपड़े का सूटकेस उठाकर हमेशा के लिए परवीन बाबी के घर शिफ्ट हो गए।
उस समय ये रिश्ता बॉलीवुड का सबसे बोल्ड और चर्चित लाइव-इन रिलेशनशिप बन गया था।

दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा था, लेकिन किस्मत ने एक बेहद डरावना मोड़ ले लिया।

साल 1979 की एक शाम जब महेश भट्ट काम से लौटकर परवीन के फ्लैट पर पहुंचे, तो पूरा घर अंधेरे में डूबा था।
महेश भट्ट ने जब बेडरूम का दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। परवीन बाबी जो कुछ दिन पहले तक लाखों दिलों की धड़कन थीं, आज बिखरे बालों के साथ, चेहरे पर अजीब सा खौफ लिए अलमारी के पीछे दुबकी बैठी थीं। उनके हाथ में एक तेज धार वाला चाकू था।

महेश भट्ट ने घबराकर पूछा,
“परवीन, ये सब क्या है? तुम यहाँ क्यों बैठी हो?”

परवीन ने चाकू से हवा में इशारा करते हुए धीरे से कहा

“धीरे बोलो! कमरे के पंखे मत चलाओ, उनमें बम लगा है। वो लोग मुझे मारना चाहते हैं। अमिताभ बच्चन मुझे जान से मारना चाहते हैं। बाहर देखो, पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं और सब मुझे खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।”

महेश भट्ट उनकी ये बात सुनकर सन्न रह गए, क्योंकि कमरे में न कोई बम था, न बाहर कोई पुलिस थी और न ही अमिताभ बच्चन वहां थे। ये सब परवीन के दिमाग का एक Hallucination था, जो उनकी बीमारी के कारण पैदा हुआ था। बीमारी में इंसान को लगने लगता है कि पूरी दुनिया उसकी जान की दुश्मन है।

भट्ट ने उस रात परवीन को संभालने की बहुत कोशिश की, उन्हें गले लगाया और शांत करने का प्रयास किया। लेकिन परवीन का डर और हिंसक बर्ताव बढ़ता ही जा रहा था।
महेश भट्ट ने उन्हें बड़े से बड़े डॉक्टरों को दिखाया, परवीन को बांध कर इंजेक्शन दिए जाते, लेकिन उनकी हालत बद से बदतर होती गई।

परवीन का महेश भट्ट पर से भी भरोसा उठने लगा।
धीरे-धीरे बीमारी ने उनके दिमाग में ये बात डाल दी कि महेश भट्ट भी उसी साजिश का हिस्सा हैं जो उन्हें मारना चाहती है।

हालात इतने हिंसक और बेकाबू हो गए कि डॉक्टरों ने महेश से कहा,
“आपका यहाँ रहना अब आपके लिए भी खतरनाक है।”
और फिर एक रात, हालात इतने बिगड़ गए कि महेश भट्ट को अपनी जान बचाने के लिए, बिना कुछ सोचे-समझे, आधी रात को परवीन का घर छोड़कर भागना पड़ा।

ये जुदाई परवीन बाबी के जीवन का सबसे दुखद अंत लेकर आई। वे पूरी दुनिया से कट गईं और साल 2005 में उनके फ्लैट में उनकी लाश मिली, जिसके बारे में दुनिया को दो दिन बाद पता चला।

महेश भट्ट ने इस दर्द, इस तड़प और इस अधूरी मोहब्बत को कभी अपने दिल से नहीं निकाला। उन्होंने अपने इस हकीकत के जख्म को पर्दे पर उतारा और साल 1982 में एक फिल्म अर्थ बनाई।
ये फिल्म परवीन बाबी के साथ उनके अफेयर और उनके शादीशुदा जीवन के मानसिक द्वंद्व पर आधारित थी। इसे आज भी एक क्लासिक फिल्म माना जाता है।

साल 1990 में आशिकी बनाई जो उनके और उनकी पहली पत्नी किरण के शुरुआती कॉलेज रोमांस से प्रेरित थी। इस फिल्म के गानों ने उस दौर में इतिहास रच दिया था।

और साल 1998 में उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे गहरे और निजी दर्द को ज़ख़्म फिल्म के रूप में पर्दे पर उकेर दिया।
ये फिल्म उनकी मां श्रीन मोहम्मद अली और उनके माता-पिता के अंतरधार्मिक रिश्ते की कहानी पर आधारित एक बेहद भावुक फिल्म थी, जिसने राष्ट्रीय एकता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार Nargis Dutt Award जीता था।

बतौर निर्देशक उन्होंने बॉलीवुड को सारांश, नाम, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, गुमराह जैसी कई यादगार फिल्में दी हैं।

साल 1999 में फिल्म कार्तूस के बाद उन्होंने निर्देशन से संन्यास ले लिया था और पूरा ध्यान केवल लिखने और फिल्में प्रोड्यूस करने पर लगा दिया था।

महेश भट्ट को जन्मदिन की शुभकामनाएँ

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